” मालती…बहू को इतनी छूट मत दे..उस पर नकेल कस..।” विवाह के अगले दिन ही नई-नवेली बहू को सलवार- कमीज़ पहने देख मालती की जेठानी की त्योरियाँ चढ़ गई थी।मालती बोली,” दीदी..नकेल क्यों…बहू भी तो हमारी बेटी ही है ना..।इतनी गरमी में जब हम सभी आरामदायक कपड़े पहने हैं तो बहू क्यों नहीं..। कहकर उसने अपनी जेठानी को चुप करा दिया।
मालती की जेठानी ने कभी भी अपनी सास का आदर नहीं किया।विवाह के कुछ महीनों बाद ही पति के साथ अलग रहने लगी।मालती आई तो अक्सर आकर मालती के खिलाफ़ सास के कान भरती और मालती के पास आकर सास की चुगली करती।सास के देहांत के बाद उसकी जेठानी बच्चों की शिकायत लेकर बैठ जाती और मालती को कहती कि अपनी नेहा पर नज़र रखना..कहीं ऊँच-नीच..।बेटी का ब्याह हो गया तो समधियाने पर कटाक्ष करना उनका नियम-सा हो गया था।
मालती ने बेटे का विवाह किया था।गरमी के कारण उसकी बहू को पसीना आ रहा था, यह देखकर उसने बहू को भारी साड़ी को चेंज करके सूट पहनने को कह दिया।यही देखकर उसकी जेठानी ने आदतन सलाह दे डाली।
देखते- देखते एक साल बीत गया।फ़ुरसत निकालकर मालती की जेठानी आ धमकी और कहने लगी,” मालती..तेरी बहू की गोद अभी तक खाली है..ये आजकल की बहुएँ ना…।”
” दीदी..इतनी जल्दी भी क्या है…आप तो जानती ही हैं कि नेहा को तीन साल के बाद बेटा पैदा हुआ था।वैसे ही बहू को भी…।” मालती की बात जेठानी को हजम नहीं हुई।वो फिर बोलीं,” अरे मालती..तू बहुत भोली है.. तेरी बहू में ज़रूर कोई कमी है..तू उसे डाक्टर के पास…।”
” बस दीदी…।” मालती लगभग चीख पड़ी।बोली,” आप हमेशा अम्मा जी की शिकायत करती रहीं..फिर मेरी बेटी की जासूसी करती रहीं..।मैं आपका लिहाज़ करके चुप रही और आज आप मेरी बहू की कमियाँ निकाल रहीं हैं।दीदी..इतनी नसीहत अपनी बेटी को देती वो आज अपने पति के साथ ससुराल में रहती।
अपने बेटे की भावनाओं का ख्याल करतीं तो वो आपके साथ रहता..।दीदी..हमें अपना घर-परिवार और बच्चे संभालने आते हैं..आप अपना देखिये..।” मालती के तेवर देखकर उसकी जेठानी चकित रह गईं…।उन्हें समझ आ गया कि अब उनकी दाल गलने से रही…वो #अपना सा मुँह लेकर रह गईं…।धीरे-से बोली,” मैं तो बस…।” तभी मालती ने उन्हें हाथ से बाहर का रास्ता दिखा दिया।उस दिन के बाद से उसकी जेठानी फिर कभी नहीं आईं।
विभा गुप्ता
स्वरचित, बैंगलुरु
#अपना सा मुँह लेकर रह जाना