आंसुओं की कीमत – तोषिका

जल्दी जल्दी काम कर लेती हू, बुआ जी बस आने ही वाली होगी, अपने आप से बात करती हुई नेहा बोली। तभी वहां पर राजेश, उसका पति आया और उसको इतनी हड़बड़ाहट में देख कर बोला, नेहा कोई नहीं सारा काम हो जाएगा, तुम फिकर मत करो मैं सब संभाल लूंगा। नेहा बोली “आपको तो पता है ना,

बुआ जी कैसी है, जब मैं मां नहीं बन पा रही थी, तो कितने ताने देती थी मुझे, यह सब बताते बताते वो एक साल पहले चली गई थी, जब बुआ जी पहली बार उनके नए घर में आई थी। पहले तो बुआजी ने बहुत अच्छे से बात की, फिर धीरे धीरे वो बात को किस तरह परिवार से नेहा के मां ना बन पाने तक ले आई,

ये जानते हुए भी कि उसका ट्रीटमेंट चल रहा है हॉस्पिटल में और डॉक्टर ने सख्त मना किया है किसी भी चीज का तनाव लेने से उसको। उस दिन बुआ जी ने नेहा को इतने ताने मारे कि नेहा को बांज तक कह दिया, जिसपर उसको बहुत बुरा भी लगा और गुस्सा भी आया

पर इस से पहले वो कुछ बोले, राजेश बीच में आया और बात संभालते हुए और बढ़ो का आदर करते हुए आराम से बोला, ऐसा कुछ नहीं है बुआ जी, डॉक्टर ने कहा है कि कभी भी अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है और हमारी शादी को इतने भी ज्यादा साल नहीं हुए है,

बस अभी 6 साल ही हुए है।” फिर राजेश नेहा की तरफ देख कर बोला “जाओ नेहा तुम आराम करो, मैं बाकी यह देख लूंगा, डॉक्टर ने तुम्हे आराम करने बोला है।

कुछ समय बाद बुआ जी चली गई और राजेश कमरे आया ही था कि नेहा को ऐसे उदास देख के राजेश पलक झपकते ही बोला “तुम ऐसे मत रोया करो,

तुम जानती नहीं हो मेरे लिए तुम्हारे इन *आंसुओं की कीमत* क्या है। अपनी बीवी को चुप कराते हुए राजेश बोला। ये बात सुन कर उसकी बीवी नेहा बोली “मैं कैसे ना रू, हमारी शादी को इतने साल हो गए है और आज भी हमारा आगन सूना है, आपके परिवार वाले हो या मोहल्ले वाले कोई मौका नहीं छोड़ते मुझे बांज कहने के लिए।”

इससे पहले राजेश कुछ बोले, नेहा बोली “इसमें मेरी क्या गलती है, बताएं आप? हर बार जब भी बुआ जी घर पर आती है, यही सुना कर चली जाती है।

इसपर राजेश बोला “तुम फिकर मत करो बौर जल्दी ऐसा समय आयेगा जब हम सबको गलत साबित कर देंगे।

अपने पुरानी यादों से बाहर आते ही नेहा बोली “अब तो हमारी एक बेटी भी है, और हमारा आगन भी खिल चुका है, अब तो बुआ जी खुश होगी ना? राजेश बोला हां खुश होगी, चलो तुम जा कर मेरी बेटी को त्यार करो, उसका नामकारण है आज।

तभी घर की घंटी बजी और राजेश ने जब दरवाजा खोला तो देखा बुआ जी आ गई है, राजेश ने उनका स्वागत किया और और पानी दिया।

जब नेहा अपनी बेटी को त्यार करके बाहर लाई तो उसने बुआ जी को प्रणाम किया, लेकिन बुआ जी ने जब  राजेश की बेटी की शक्ल देखी तो एक दम से ताने देते हुए बोली “आए हाय, ये तो काली है, इसका रंग भी साफ नहीं है, लड़की सुंदर भी होती तो उसे कोई भी पसंद नहीं करेगा।

राजेश ने जैसे ही ये सुना, उस से रहा नहीं गया और ऊंची आवाज में बोला “बस बुआ जी बस, मैं आपका बहुत सम्मान करता था लेकिन अब नहीं, वो जैसे भी है, मेरी बेटी और और एक रंग के चलते आप उसके लिए ऐसे नहीं बोल सकते, मेरी बेटी मेरा जहान है और अगर कोई भी उसके बारे में बोले,

चाहे आप ही क्यों ना हो, मैं उससे उसी वक्त सारे रिश्ते खत्म कर दूंगा। बुआ जी कुछ बोले उससे पहले ही उसने बाहर का दरवाजा खोल दिया। नेहा बोली ये क्या कर रहे है आप? बड़ी है वो। राजेश बोला मेरी बेटी मेरी ताकत भी है और कमजोरी भी। मैं जो भी कर रहा हू सही कर रहा हू, मैं नहीं चाहता, मेरी बेटी की आंखों में कोई नहीं आंसू आए, बहुत अनमोल है मेरी बेटी।

*कुछ सालों बाद*

उन्होंने अपनी बेटी का नाम दुर्गा रखा था और अब वो धीरे धीरे बड़ी हो रही है, साथ ही में राजेश हमेशा अपनी दुर्गा को खुश रखता है और उस पर कोई आंच नहीं आए।

लेखिका 

तोषिका

error: Content is protected !!