मम्मी आप नया नौकर क्यों नहीं रखती हो? ” प्रिया बोली”। बेटा ,मैंने साथ वाली आंटी को बोला तो है, थोड़ा ठीक हो जाऊं ,तो बाहर बैठकर कोई काम वाली ही ढूंढ लूंगी। सिर दर्द से फटा जा रहा है ,जरा थोड़ी अदरक वाली चाय तो बना देना । सवेरे से काम कर कर के थक गई हूं। प्रिया झल्लाई ! “अरे कैसे बोल रही है”?
यहां तो सब तेरे अपने ही है ,कोई तेरा ससुराल थोड़ी ही है ,मेरी तबियत खराब है ,वरना आज तक मैंने तुझसे कब काम करवाया है । वहां तो लोग तेरे आंसू की कीमत नहीं समझते पर यहां तो मैं तेरी मां ही हूं। मम्मी तुम भी ना लेटे-लेटे बस परेशान नहीं हो जाती?
कम से कम कपड़ों की तह ही बना दो ,मशीन और खराब हो गई कपड़े धोने की। बेटा —— “इसमें मेरा क्या कसूर है “बिजली की पावर इतनी ज्यादा आई थी ,अगर तूने मशीन को बंद कर दिया होता तो ,वह जलती नहीं। इससे तो 10 गुना अच्छा मेरा ससुराल ही था,
सासू मां बीमार होने के बाद भी रोटी बना करके मुझे भी पूछ लेती थी। पर तू तो कह रही थी ,”वह हमेशा तुझे दहेज कम लाने का ताना देती है” चुप हो जाओ प्रिया जोर से चिल्लाई ।
अच्छा सुन, “अपने लिए तो कुछ भी बना लेना” पर मेरे लिए तो थोड़ी सी खिचड़ी ही बना दे ,मैं और कुछ नहीं खा सकती ,अगर इतना ही काम करना होता तो मैं वहां ही क्या बुरी थी? प्रिया धीरे से बोली ,पर मानसी को सब सुन रहा था।
प्रिया की शादी हुए लगभग 1 साल हुआ था 1 साल में वह कभी 1 महीने भी अपने ससुराल में नहीं रहती थी। जब तब आ जाती थी ,और पीछे पीछे राकेश को फोन करके बुलाती थी। दोनों साथ साथ घूमते थे, लेकिन जाने के नाम पर हमेशा वह ससुराल में खुद पर हुए अत्याचार की कहानियां सुनानी शुरु कर देती थी।
अब की बार जब वह 15 दिन पहले आई तो मानसी ने बहुत कठोरता से कहा कि अब तुझे वहां जाने की जरूरत नहीं है ।हम अब खुद ही देखेंगे। राकेश को भी यहां आने की जरूरत नहीं है ।
इस तरीके से ना तुम यहां की रहोगी और ना ही वहां की। जब तुम दोनों ने साथ रहना ही नहीं है तो यह मिलना जुलना क्या है? अब हैदराबाद में रहने वाले भाई के लिए भी लड़की देखनी है ,उसकी शादी का भी इंतजाम करना है ,कम से कम तुम्हारा तो आर पार हो जाए।
मानसी जानती थी कि प्रिया अब भी राकेश से फोन पर तो बात तो करती ही रहती है ।उसके आने के 1 दिन बाद ही उनका नौकर शंभू भी छुट्टी लेकर गांव चला गया और मानसी को भी वायरल बुखार हो गया ।अर्थराइटिस के दर्द से तो वैसे ही परेशान थी ।धीरे धीरे पापा का और घर का सारा काम प्रिया के सर पर आ गया था।
मानसी का हाल पूछने के लिए साथ वाले घर से वंदना और मिसिज़ चावला आई। चावला बहन जी की लड़की का भी तलाक का केस फाइनल स्टेज पर था। वह बोली आजकल ससुराल में लोग लड़कियों को तंग ही बहुत करने लगे हैं।
चाय की चुस्की लेते हुए दोनों औरतें बोली ,लड़कियां तो बिचारी घर ही बसाती है ,अगर अच्छी रही तो ससुराल ,”और नहीं “तो मायका कहते हुए दोनों हंस पड़ी थी।
प्रिया को तो काटो तो खून नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं था। प्रिया के ससुराल में सास ससुर ,दो बहने और उनका इकलौता भाई राकेश था। सब उसे बहुत प्यार करते थे राकेश की बड़ी बहन जो कि टीचर थी स्कूल जाने से पहले ही घर की सफाई करके जाती थी ।यहां तक कि छोटी बहन भी रसोई में सारा काम करवाती थी ।
लेकिन प्रिया तो अपने सपनों के नगर में ही रहना पसंद करती थी ना ,उसकी तो एक ही इच्छा थी ,कि राकेश उसे लेकर के कहीं पर भी अलग चला जाए ,हालांकि राकेश अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता था कि प्रिया खुश रहे ।वह लोग बाहर भी घूमने जाते थे पर उसकी ससुराल मेरठ के पास एक छोटा सा कस्बा था ।
दिल्ली जैसे ठाठ वहां नहीं थे। प्रिया की सास और ससुर दोनों ही बीपी और हार्ट के पेशेंट थे। उनके लिए बहुत ही परहेज वाला खाना बनता था ,हालांकि प्रिया को कुछ भी बनाने की मनाही तो नहीं थी ,पर प्रिया को कुछ बनाना अच्छा लगता हो तब ना ।
उस दिन जब सासुमां मौसी के घर से उनके बेटे की शादी से जब लौटकर आई तो सहज ही उन्होंने बहू के बहुत सारे सामान लाने की बातें की थी, जिसका कि प्रिया ने गलत मतलब निकाल कर उन पर यह इल्जाम लगाया कि वह दहेज चाहती हैं। एक बार छोटी बहन ने अपने कॉलेज के किसी फंक्शन में उसका स्वेटर पहन लिया था तो प्रिया ने तूफान मचा दिया था ।
जब छोटी बहन ने प्रिया से सॉरी बोला तो राकेश को बहुत दुख हो रहा था ,पर वह फिर भी कुछ नहीं बोला। यहां मां उससे कितना काम करवा रही है ,और एहसान भी नहीं मानती। कितनी बुरी है मां ।पहली बार उसे अपने ससुराल वालों पर बहुत प्यार आ रहा था। उसे बार-बार ख्याल आ रहा था चावला आंटी की बेटी टीना उससे कह रही थी
कि वह आज भी अपनी पति से प्यार करती है परंतु अब दोनों घरों मैं बड़ों के अहंकार के कारण हाल यह हो गया है कि हम दोनों अगर कोर्ट में सामने भी मिलते हैं ,तो एक दूसरे पर इतने झूठे इल्जाम लगाए हुए हैं कि शर्म के मारे आपस में बात भी नहीं कर सकते। थोड़ा तो हमें समय दिया होता एक दूसरे को समझने का ।पर अब तो हम कुछ भी नहीं कर सकते।
प्रिया को लगा उसके साथ भी ऐसा ही ना हो। राकेश सच में बुरा नहीं है। प्रिया ने तभी राकेश को फोन करा कि वह वापस अपने ससुराल जाना उसके साथ जाना चाहती है।
राकेश को प्रिया के बदले व्यवहार को देखकर बहुत खुशी हुई और हमेशा के जैसे शाम तक राकेश उसे वापस लेने आ चुका था था। प्रिया ने मां से कहा कि मम्मी मुझे ससुराल जाना ही होगा ,उधर भी मम्मी की तबीयत खराब है, उन्हें भी मेरी जरूरत है। मानसी ने कहा देख लो ,
और सोच समझ कर फैसला करो। वहां कोई तुम्हारे आंसुओं की कीमत भी नहीं समझना और तुम रोती रह जाती हो। चार दिन बाद फिर परेशान होकर आओगी ,
कभी तो फैसला करना ही होगा। नहीं ,अब नहीं आ रही मैं! –आप तो यही चाहती हो ना कि मैं आपका ही काम करती रहूं। ——– मानसी ने उन दोनों के लिए बाहर से खाना मंगवाया और उसकी विदा के सामान की तैयारी करके उन्हें विदा कर दिया।
अब मानसी ने फोन मिला कर शंभू को वापस आने के लिए बोला, और उसके बाद सैमसंग कंपनी में मशीन को ठीक करने के लिए कंप्लेंट लिखाई। फिर धीरे से बुदबुदाई “बेटा मैं बुरी मां ही सही” पर जब तू अच्छे से अपना घर बसाएगी तो एक दिन मेरे बुरे होने का कारण भी समझ जाएगी। तुम सदा खुश रहो।
पाठक गण आजकल हम अपने बच्चोंं को सिर्फ पैसा कमाने की ही शिक्षा देते हैं ।सच्चाई यह है कि अधिकतर लड़कियों में सहनशीलता की कमी है, और लड़कों में संयम। घरों की व्यवस्था टूटने की कगार पर है। बचाने की जिम्मेवारी भी हमारी ही है ।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा