चंदा रे मेरे भैया से कहना बहना याद करे..दूर कहीं रेडिओ में गाना बज रहा था और गाना सुनकर मेघा की आंखों से अश्रु की धारा बह रही थी।रक्षाबंधन का दिन था,उसे छोटे भाई रोहन की बहुत याद आ रही थी जो कुसंगति में पड़कर घर छोड़कर चला गया था।मेघा अपने भाई से बहुत प्यार करती थी।
रोहन बचपन से ही पढ़ाई में होशियार था और बहुत सुंदर था।स्कूल के सभी टीचर्स उसे बहुत चाहते थे।दसवीं कक्षा तक सब कुछ ठीक चल रहा था पर उसके बाद ना जाने कैसे रोहन गलत संगत में पड़ गया..उसका मन अब पढ़ने में नहीं लगता था।उसे जुआ खेलने और सिगरेट शराब पीने की लत लग गई।
इसके लिए वो घर से पैसे चुराने लगा।मेघा के पिता रोहन को कभी गुस्से से तो कभी प्यार से समझाते मगर उस पर कोई असर नहीं होता।मेघा ने भी भाई को अपने प्यार की दुहाई दी मगर कुसंगति के आगे सब कुछ व्यर्थ ही रहा।एक दिन रोहन जुए में बड़ी रकम हार गया उसके ऊपर बहुत लोगों का कर्जा हो गया था
इसलिए वो घर में किसी को बिना बताए शहर छोड़कर चला गया।मेघा के माता-पिता को जब रोहन के दोस्तों से इस बात का पता चला तो बेचारे लाज के मारे किसी से कुछ नहीं बोले और बेटे को उसके हाल पर छोड़ दिया।
मेघा को जब भाई के बारे में पता चला तो वो तुरंत माता-पिता के पास पहुंच गई और अपने आंसुओं को छुपाकर उन्हें ढाढस बंधाया।कुछ दिन माता पिता के साथ रहकर अपने घर चली गई।
मेघा अभी भाई के विचारों में खोई हुई थी, कि फोन की घंटी बज उठी।मेघा ने फोन उठाया तो उधर से आवाज आई -“दीदी,मैं रोहन बोल रहा हूं,मुझे माफ कर दो मैं बहुत बुरा भाई हूं।आज आपकी बहुत याद आ रही थी इसलिए मुझसे रहा नहीं गया।” भाई की आवाज सुनकर मेघा खुशी से उछल उठी..कहां है तू मेरे भाई…तुझे क्या पता मम्मी पापा,
मैं सब तेरे लिए कितना परेशान हैं..तूने एक बार भी हम सबके बारे में नहीं सोचा।खैर छोड़, ये बता कि तू अभी कहां है?”मेघा के पूछने पर रोहन ने उसे बताया,कि उसके पास सारे पैसे खत्म हो गए इसलिए अब वो उसके पास के शहर में एक होटल में वेटर का काम कर रहा है।मेघा भाई की बात सुनकर बहुत दुखी हुई
जिस भाई को इतने लाडों से पाला था आज वो होटल में वेटर का काम कर रहा है।पर उसे ये तसल्ली हुई,कि राखी के दिन उसे भाई की खैरियत के बारे में पता चला।
पति के सहयोग से मेघा भाई को अपने घर ले आई और उससे वचन लिया,कि वो उसका सब कर्जा चुका देगी बशर्ते वो कुसंगति को छोड़ देगा और अपने भविष्य पर ध्यान देगा।रोहन ने भी बहन से वादा किया कि वो सब बुरी आदतें छोड़कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देगा
और एक दिन बड़ा आदमी बन कर दिखाएगा।सच बहन के प्यार में वो शक्ति होती है जो भाई को हर विपदा से बचा लेती है।
समय कब बीत गया पता ही नहीं चला,रोहन अपनी मेहनत से एक सफल बिजनेसमैन बन गया।उसकी शादी हो गई और फिर एक बेटा बेटी भी हो गए।ईश्वर की कृपा रोहन पर ऐसी रही,कि वो दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता रहा।लेकिन अब माता-पिता का साथ छूट गया था।
बस बहन मेघा ही उसके लिए अब सब कुछ थी।संयोग ऐसा रहा कि मेघा के पति का एक दिन अचानक हृदय गति रुक जाने से देहांत हो गया।मेघा पर तो जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।उसके दो बेटे थे,दोनों ही अभी सेटल नहीं हुए थे।एक ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई अभी पूरी की थी और दूसरे की अभी नौकरी लगी ही थी।
मेघा के पति के बहुत अरमान थे, कि वो अपने बेटों की शादी खूब धूमधाम से करेंगे पर शायद नियति को कुछ और मंजूर था।पति के जाने के मेघा उदास रहने लगी…
उसे इस स्थिति से उबारने में रोहन ने उसका पूरा साथ दिया।समय समय पर उसके पास आकर रहता और उसे आश्वासन देता,कि मैं हूं ना दीदी आपके साथ आपको किसी चीज की चिंता करने की जरूरत नहीं है।रोहन के ये शब्द जैसे मेघा के निर्जीव तन में प्राण फूक देते।
किस्मत से रोहन की पत्नी भी बहुत अच्छे स्वभाव की थी,वो भी निरंतर मेघा के संपर्क में रहती थी।
आज मेघा के बड़े बेटे की शादी थी..उसे पति की बहुत याद आ रही थी।रोहन अपने जीजा जी की कमी को तो पूरा नहीं कर सकता था पर वो पूरी शादी में मेघा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा।उसने शादी की सारी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले रखी थी।शादी अच्छे से संपन्न हो गई।जब मेघा के बेटे बहु रोहन के पैर छूने लगे तो उसने दोनों को प्यार से गले लगा लिया।और मेघा की बहु से बोला -“बेटा, मैं तुम्हारा मामा ससुर नहीं बल्कि तुम्हारे पापा जैसा हूं।कभी भी कोई प्रॉब्लम हो तो मुझे बेटी की तरह बेझिझक बोलना।मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं।” छोटे भाई के मुंह सी इतनी बड़ी बात सुनकर मेघा कि आंखें नम हो गईं।उसने कभी जो भाई के लिए आंसू बहाए थे उन आंसुओं की कीमत वो ऐसे चुकाएगा उसने सोचा ना था।मेघा ने भी बच्चों को आशीर्वाद दिया।
शादी के बाद जब रोहन और उसकी पत्नी जाने लगे तो मेघा दोनों को गले लगाते हुए बोले -“तुम दोनों का जितना शुक्रिया अदा करूं कम है।बस ऐसे ही आगे भी मेरा साथ निभाते रहना।”
“दीदी,शुक्रिया तो मुझे आपका और जीजू का करना चाहिए।आप दोनों की बदौलत मैं आज इस लायक बन सका वरना कहीं गुमनामी के अंधेरे में खो गया होता।”कहकर रोहन रोने लगा।
“तूने मेरे आंसुओं की कीमत चुका दी यही मेरे लिए बहुत बड़ी बात।ईश्वर तुझे और तेरे परिवार को सदा खुश रखे।”कहकर मेघा ने भाई भाभी को विदा किया।
दोस्तों जिन्दगी में ऐसा कई बार होता है, कि हमारा कोई अपना हमें इतनी तकलीफ देता है,कि हम आंसू बहाने को मजबूर हो जाते हैं।मगर यदि यही अपना हमें भविष्य में इतना सुख और खुशियां दे,कि हम अपना दुख भूल जाएं तो ऐसा लगता जैसे उसने हमारे आंसुओं की कीमत चुका दी।हम सबका भी यही प्रयास होना चाहिए, कि यदि हमने कभी किसी को जाने अनजाने में दुख दिया है तो समय आने पर उसे खुशियां भी देनी चाहिए।तभी सही मायने में हम आंसुओं का मोल चुका पाएंगे |
कमलेश आहूजा
आंसुओ की कीमत साप्ताहिक कहानी प्रतियोगिता हेतु मेरी रचना