नया नोहर बानी कनिया पियवा धरावे हंसुआ ए रामा चईत हो मासे……गांव की प्यारी सी भोर सुबह भी नहीं हुई थी… चार बज रहे थे…कानों में चैता का मधुर स्वर मनु के
मन मस्तिष्क को झंझोर गए… दरवाजा खोल कर बाहर निकल आई… महुआ के पेड़ से आ रही मादक खुशबू उफ्फ….. काश कि इस माधुर्य का आनंद लेने के लिए राहुल भी साथ होते… एक साल के लिए फ्रांस कंपनी के अनुबंध पर गए पर मुझे यहीं छोड़ गए… बालों में उंगलियां फेरते हुए मुझे बहलाते रहे मनु एक साल यूं पलक झपकते बीत जाएंगे..
दिल्ली में मन ना लगे तो थोड़े समय के लिए अपने मायके चली जाना.. कभी अम्मा बाबूजी के पास अपने ससुराल चली जाना.. उनलोगों को भी अच्छा लगेगा… राहुल के जाने के बाद किट्टी में भी जाने का मन नहीं करता… कहना कितना आसान होता है…. एक साल देखते देखते गुजर जाएगा…
कमबख्त नींद भी राहुल के साथ हीं चली गई…कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है… राहुल के साथ गुजरे खूबसूरत लम्हे कहां जीने दे रहे हैं…उनकी चुहलबाजियां शरारतें कितना कुछ आंखे बंद करते हैं चलचित्र सा घूमने लगता..वीकेंड पर राहुल पहले से हीं कुछ सरप्राइज़ प्लान कर के रखते…हंसते खेलते कैसे एक साल गुजर गया..पता हीं नहीं चला.…
जाने के एक सप्ताह पहले से छुप छुप कर रोती…सुजी आँखें देख राहुल दुःखी हो जाते..फिर प्यार से समझाते..मुझे एयरपोर्ट भी नहीं ले गए…मनु तुम्हारे आंखों से गिरते ये मोती मुझे कमजोर कर देंगे..मैं कैसे जा पाऊंगा… राहुल के जाने के बाद दिन भर रोती रही…मम्मी आ गई थी लेने मुझे..बहुत मुश्किल दरवाजा खुलवा कर चाय और टोस्ट खिलाई..कुछ दिन मम्मी के पास रही.. फिर ससुराल आ गई.. गांव का वातावरण भोले भाले स्नेही सास ससुर..
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बहु को खुश रखने की पूरी कोशिश करते.. पर पिया बिना सुनी सेज पर जाते हैं तकिया आंसुओं से गीला हो जाता… अक्सर अम्मा कहती दुल्हीन हम तोहरे पास सो जाएं… बबुआ नहीं है तबतक…मैं मना कर देती.. अम्मा आप परेशान मत हों… कभी अम्मा बात मान लेती कभी मनुहार कर के मेरे पास सो जाती…
गांव में होली के एक सप्ताह पहले से #गौरी संग लिए शिवशंकर खेले फाग.. केकर भीगे हो लाली चुनरिया…केकर भीगे हो पाग#.. जैसे खूबसूरत तन मन को सरोबार करने वाले एक से बढ़कर एक फगुआ कानों से होकर दिल तक पहुंच जाता..
मैं सोचती काश मेरा भी प्रेमी पाती मेरे साथ होता तो… आंखों से आंसुओं की झड़ी लग जाती… मजबूरियां इंसान को किस किस मुकाम से गुजरने को मजबूर कर देती है…. रोते रोते आंख लग…सपने में भी राहुल को हीं देख रही थी… अचानक फोन की आवाज से नींद खुली.. राहुल का हीं फोन था.. जैसे उन्होंने कहा मनु मै फफक पड़ी.. प्लीज अब रहा नहीं जाता आ जाओ..
राहुल भी भावुक हो गए.. मनु तुम्हारे साथ तो अम्मा बाबूजी तुम्हारे मां पापा हैं पर मैं कितना अकेला हूं सोचो.. बाबूजी के मेरे पढ़ाई के लिए गिरवी रखे खेत छुड़ाना है… रानू की शादी मै मैने जो लोन लिया था उसे चुकाना है… फिर अपने लिए घर और बच्चे भी प्लान करने है… कैसे होगा.. तुम मेरी हिम्मत हो मनु…
मैं टूट जाऊंगा… एक साल की तो बात है… कोई कोर्स कर लो जान… तुम्हारे #आसूं बहुमूल्य मोती है मेरे लिए इसे बेवजह यूं जाया ना करो#इन मोतियों को संभाल कर रखो…भावनाओं को अक्सर कर्तव्य के बेदी पर कुर्बान होना पड़ता है…ये अब तक सुनती आई थी आज महसूस कर रही हूं…
मुझे खुद को संभालना होगा… मजबूत बनना पड़ेगा… एक साल बीत हीं जाएंगे… सीधे साधे सरल स्वभाव के अम्मा बाबूजी अपने इकलौते बेटे के लिए सारी जमीन गिरवी रख दी… अपनी बेटी के लिए भी नहीं सोचा..
उसकी शादी कैसे करेंगे… राहुल अपनी बहन को पीजी करवाया फिर बैंक पिओ से उसकी शादी की… नई नौकरी थी शादी में कर्ज लेना पड़ा.. राहुल ईमानदारी से अपना कर्तब्य निभा रहा है.. मुझे भी उसका साथ देना होगा.. तभी सही अर्थों में उसकी जीवनसंगिनी बन पाऊंगी.. मैं अम्मा बाबूजी के साथ हीं रहूंगी..
यहीं स्कूल में पढ़ाने जाऊंगी… मेरे पति जिन्हें मैं सिर्फ एक साल से जानती हूं उनके जुदाई में इतनी अधीर हो उठती हूं तो अम्मा बाबूजी को कैसा लगता होगा… हर राखी में आज तक रानू भाई के कलाई पर राखी बांधती आई है उसे इस बार कैसा लगेगा.. सभी के अपने अपने दर्द हैं.. मुझे अपने,#आसूं को मोती#बनाना होगा… अब इसे बेवजह जाया नहीं करूंगी राहुल.. तुम मेरे शिव हो मै तुम्हारी गौरी…
Veena singh