“भाभी! क्या सीरियसली?” तान्या की आवाज में साफ कड़वाहट और तंज था, “आप मेरे पच्चीसवें जन्मदिन पर अपने हाथ से सिली हुई ड्रेस गिफ्ट कर रही हैं? आपको पता भी है कि मैं किस सर्कल में उठती-बैठती हूं? मेरी सारी फ्रेंड्स इंटरनेशनल और प्रीमियम ब्रांड्स के कपड़े पहनती हैं। अगर मैं लोकल टेलर जैसी हाथ से बनी ड्रेस पहनकर पार्टी में जाऊंगी, तो सब मेरा कितना मजाक उड़ाएंगे! आपने तो सुबह-सुबह ही मेरा सारा मूड खराब कर दिया।”
कमरे में सन्नाटा छा गया। अलका की आंखों में एक पल के लिए नमी तैर गई, पर उसने अपने चेहरे पर शिकन नहीं आने दी।
रात के करीब ग्यारह बज चुके थे। जयपुर की गुलाबी ठंडक में पूरा शहर मानो नींद की चादर ओढ़ चुका था, लेकिन अलका के कमरे की टेबल लैंप अब भी पूरी रोशनी बिखेर रही थी। मेज पर चारों तरफ महीन धागे, लेस, चमकते हुए सितारे और मोतियों की डिब्बियां बिखरी पड़ी थीं। अलका एक बेहद खूबसूरत इंडो-वेस्टर्न गाउन के आंचल पर अपने हाथों से जरदोज़ी की बारीक कढ़ाई कर रही थी। सुई में धागा पिरोते हुए उसकी उंगलियां थोड़ी थक चुकी थीं, पर उसके चेहरे पर थकान की जगह एक अनोखी चमक और सुकून था। उसने आखिरी टांका लगाया, धागा काटा और गाउन को उठाकर रोशनी के सामने फैलाया। आसमानी नीले रंग के मखमली कपड़े पर चांदी के तारों से उकेरी गई आकृतियां किसी परियों के देश की पोशाक जैसी लग रही थीं।
अलका ने गहरी सांस ली और राहत भरी मुस्कान के साथ फोन उठाया। स्क्रीन पर ‘मम्मी जी’ का नंबर डायल करते हुए उसने घड़ी की ओर देखा। दो रिंग के बाद ही दूसरी तरफ से स्नेह भरी आवाज आई, “अलका बहू, अभी तक जागी हुई हो क्या? सब खैरियत तो है ना?”
“हां मम्मी जी, सब बिल्कुल ठीक है। बस अभी-अभी तान्या की ड्रेस का आखिरी काम पूरा हुआ है। मैं आपको यही बताने के लिए फोन कर रही थी कि सुबह पहली बस से मैं घर पहुंच जाऊंगी। तान्या के उठने से पहले मैं वहां हाजिर रहूंगी। कल सुबह की चाय और नाश्ता मैं ही बनाऊंगी, आप बिल्कुल भी परेशान मत होइएगा।” अलका ने बड़ी आत्मीयता से कहा।
फोन पर उसकी सास मनोरमा जी हंस पड़ीं, “अरे पगली, तू अपनी फिक्र कर। पिछले पांच दिनों से अपने मायके में बैठकर तूने दिन-रात एक कर दिया। यहां घर के काम की तू बिल्कुल चिंता मत कर, मैं सब संभाल लूंगी। बस तू सुबह आराम से आना। सच में, तान्या बहुत खुशनसीब है कि उसे तेरे जैसी भाभी मिली है।”
“मम्मी जी, तान्या मेरी सिर्फ ननद थोड़ी है, मेरी छोटी बहन जैसी है। कल उसका पच्चीसवां जन्मदिन है और उसने अपनी नई नौकरी में भी कमाल कर दिखाया है। यह तोहफा तो उसके लिए बनता ही था।” दोनों के बीच कुछ देर और बातें हुईं और फिर अलका ने फोन रख दिया।
दरअसल, अलका की शादी को अभी मुश्किल से डेढ़ साल हुआ था। अलका ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी से टेक्सटाइल और फैशन डिजाइनिंग का डिप्लोमा किया था। वह अपने हुनर में बेहद माहिर थी। हालांकि शादी के बाद उसने किसी बड़ी कंपनी में नौकरी करने के बजाय घर और परिवार को प्राथमिकता दी थी। उसकी ननद तान्या शहर की एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में एचआर एग्जीक्यूटिव के पद पर काम कर रही थी। तान्या को नौकरी लगे अभी छह महीने ही हुए थे, पर उसके तौर-तरीकों में एक अजीब सा दिखावा और आधुनिकता का अहंकार धीरे-धीरे घर करने लगा था। वह हर चीज को उसके ब्रांड, शोरूम और कीमत की नजर से तौलने लगी थी।
अलका चाहती थी कि तान्या के इस जन्मदिन पर उसे दुनिया का सबसे अनोखा तोहफा मिले। ऐसा परिधान जो किसी भी बड़े मॉल या डिजाइनर बुटीक में लाखों रुपये खर्च करने पर भी न मिल सके। इसी सरप्राइज को राज रखने के लिए उसने अपनी सासू मां से अनुमति लेकर पांच दिन अपने मायके जाकर यह ड्रेस तैयार की थी, क्योंकि ससुराल में रहकर तान्या की नजरों से इस काम को छुपाना नामुमकिन था।
उधर, ससुराल के घर में तान्या अपनी मां के कमरे में टहलते हुए लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रही थी। उसके चेहरे पर चिढ़ साफ दिखाई दे रही थी।
“मां, आपने भाभी को कुछ ज्यादा ही सिर पर चढ़ा रखा है!” तान्या ने सोफे पर धप से बैठते हुए कहा, “कल मेरा जन्मदिन है, घर में इतनी चहल-पहल होनी चाहिए थी, और भाभी आराम से अपने मायके जाकर मजे कर रही हैं। उन्हें मेरी जरा भी परवाह नहीं है। अपने मायके का मोह उनसे छूटता ही नहीं है।”
मनोरमा जी ने चश्मा उतारकर मेज पर रखा और प्यार से तान्या को समझाते हुए बोलीं, “तान्या, बात-बात पर अपनी भाभी को ताने देना बंद कर। जब तेरी शादी होगी और तू पराए घर जाएगी, तब तुझे समझ आएगा कि मायके की मिट्टी से जुड़े रहने का क्या मतलब होता है। और दूसरी बात, अलका को तेरा जन्मदिन बहुत अच्छे से याद है। देखना, कल सुबह सूरज निकलने से पहले वो घर पर होगी। तू बेवजह अपना मूड खराब कर रही है।”
तान्या ने तुनक कर मुंह बनाया, “हां, मुझे पता है आपकी लाड़ली बहू में आपको कोई कमी नहीं दिखती। खैर छोड़िए, कल का दिन मेरे लिए बहुत बड़ा है। मैंने अपनी पूरी प्लानिंग कर ली है।”
मनोरमा जी ने मुस्कुराते हुए पूछा, “अच्छा, तो हमारी बिटिया रानी का कल का क्या कार्यक्रम है?”
तान्या उत्साह से बताने लगी, “सुबह मैं सबसे पहले बिरला मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करूंगी। उसके बाद घर आकर आप और पापा के साथ छोटा सा केक काटूंगी। दोपहर में मेरी पूरी ऑफिस वाली गैंग और कॉलेज की सहेलियों के साथ एक शानदार रूफटॉप कैफे में लंच पार्टी है। पिछले छह महीने से सब कह रहे थे कि तान्या अपनी नौकरी की पहली पार्टी कब दे रही है। और हां मां, शाम का डिनर हम सब परिवार वाले शहर के सबसे आलीशान फाइव-स्टार होटल में करेंगे। और उस डिनर का पूरा बिल मैं अपनी सैलरी से भरूंगी! आप या पापा बिल्कुल मना नहीं करेंगे कि बेटी के पैसों से खाना नहीं खाते। अब मैं आत्मनिर्भर हूं और अपने परिवार को खुशियां देना मेरी भी जिम्मेदारी है।”
मनोरमा जी ने बेटी के सिर पर हाथ फेरा और गर्व से कहा, “भगवान तुझे हमेशा खुश और कामयाब रखे बेटा। लेकिन अपनी जड़ों और अपनों के प्यार को कभी मत भूलना।”
अगली सुबह जब घर के आंगन में सुनहरी धूप फैली, तो अलका घर के मुख्य द्वार पर आ खड़ी हुई। उसके चेहरे पर मायके से लौटने का सुकून और हाथ में एक बड़ा, सुंदर गिफ्ट बॉक्स था। घर में कदम रखते ही उसने देखा कि तान्या मंदिर जाने के लिए तैयार हो रही थी।
अलका मुस्कुराते हुए उसके पास गई और बड़े लाड़ से बोली, “जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं तान्या! ईश्वर तुम्हारी हर मुराद पूरी करे।”
तान्या ने हल्के से मुस्कुराकर “थैंक यू भाभी” कहा, पर उसकी आंखों में अब भी रात वाली बेरुखी झलक रही थी।
अलका ने उत्साह के साथ वह खूबसूरत बॉक्स तान्या के हाथों में थमा दिया, “यह देखो, तुम्हारे लिए मेरा छोटा सा सरप्राइज। मैंने इसे खुद अपने हाथों से सिर्फ तुम्हारे लिए तैयार किया है।”
तान्या ने उत्सुकता से बॉक्स का रिबन खोला और जैसे ही उसने देखा कि अंदर एक हाथ से सिला हुआ इंडो-वेस्टर्न गाउन है, उसके चेहरे का रंग उड़ गया। उसकी त्योरी चढ़ गई और उसने उस ड्रेस को बॉक्स में वापस फेंकने के अंदाज में रख दिया।
“भाभी! क्या सीरियसली?” तान्या की आवाज में साफ कड़वाहट और तंज था, “आप मेरे पच्चीसवें जन्मदिन पर अपने हाथ से सिली हुई ड्रेस गिफ्ट कर रही हैं? आपको पता भी है कि मैं किस सर्कल में उठती-बैठती हूं? मेरी सारी फ्रेंड्स इंटरनेशनल और प्रीमियम ब्रांड्स के कपड़े पहनती हैं। अगर मैं लोकल टेलर जैसी हाथ से बनी ड्रेस पहनकर पार्टी में जाऊंगी, तो सब मेरा कितना मजाक उड़ाएंगे! आपने तो सुबह-सुबह ही मेरा सारा मूड खराब कर दिया।”
कमरे में सन्नाटा छा गया। अलका की आंखों में एक पल के लिए नमी तैर गई, पर उसने अपने चेहरे पर शिकन नहीं आने दी।
तभी बैठक से बाहर निकलकर तान्या के पिता, हरिमोहन जी वहां आ पहुंचे। उन्होंने तान्या की सारी बातें सुन ली थीं। उनका चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था।
“तान्या! अपनी जुबान पर लगाम लगाओ!” हरिमोहन जी की सख्त आवाज से पूरा घर गूंज उठा।
तान्या सकपका गई, “पापा, मैं तो बस…”
“बस बहुत सुन लिया तुम्हारा घमंड!” हरिमोहन जी ने डांटते हुए कहा, “चार दिन क्या नौकरी कर ली, तुम्हारे पैर जमीन पर नहीं टिक रहे हैं। पैसों की चमक ने तुम्हारी आंखों पर ऐसा पर्दा डाल दिया है कि तुम्हें किसी के प्यार, त्याग और मेहनत की कोई कद्र ही नहीं रही। तुम्हें पता भी है कि तुम्हारी भाभी ने किसी आम टेलर की तरह नहीं, बल्कि देश के सबसे बेहतरीन संस्थान से फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई की है? उसके हाथ की सफाई और डिजाइनिंग की समझ किसी बड़े इंटरनेशनल डिजाइनर से कम नहीं है। उसने पांच रातें जागकर तुम्हारे लिए यह ड्रेस तैयार की है और तुम इसे लोकल कह रही हो? तुम्हें शर्म आनी चाहिए!”
तान्या की आंखें झुक गईं। हरिमोहन जी ने आगे कड़क आवाज में फैसला सुनाया, “आज तुम यही ड्रेस पहनकर अपनी पार्टी में जाओगी। अगर तुम्हें अपने परिवार के प्यार और भाभी के हुनर पर शर्म आती है, तो मुझे भी तुम्हारे इस खोखले दिखावे पर शर्म आती है।”
तान्या जानती थी कि उसके पिता अपने उसूलों के कितने पक्के हैं। वह दबी जुबान से कुछ नहीं कह सकी। उसने भारी मन और गुस्से में पैर पटकते हुए वह ड्रेस उठाई और कमरे में जाकर पहन ली। सच तो यह था कि जैसे ही उसने वह गाउन पहना, उसका आईने में खुद से नजरें हटाना मुश्किल हो रहा था। गाउन की फिटिंग ऐसी थी मानो किसी जादुई तराश से उसे गढ़ा गया हो। कपड़े का फॉल और कमर पर की गई बारीक जरदोज़ी का काम उसके व्यक्तित्व को एक शाही अंदाज दे रहा था। लेकिन अहंकार के चलते उसने अपनी भाभी की तरफ देखा तक नहीं, केक काटा और बिना ‘थैंक यू’ कहे अपने पर्स को झटकते हुए कैफे के लिए निकल गई।
घर में मनोरमा जी ने अलका के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “बहू, तू इसका बुरा मत मानना। अभी नई-नई कमाने लगी है ना, इसलिए थोड़ी नादान है। समझ आएगी तो खुद पछताएगी।”
अलका ने अपनी सासू मां के हाथों को थाम लिया और बहुत ही शांत और मधुर मुस्कान के साथ बोली, “अरे नहीं मम्मी जी, मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा। तान्या मेरी छोटी बहन जैसी है, थोड़ा बहुत गुस्सा तो बहनों में चलता ही है। और मुझे पूरा भरोसा है कि जब वह अपनी सहेलियों से मिलेगी, तो उसका यह गुस्सा अपने आप पिघल जाएगा। देखिएगा, शाम को जब वो घर लौटेगी, तो खुद आकर मेरे गले लगेगी।”
उधर शहर के पॉश कैफे में तान्या की सहेलियां और कलीग्स उसका इंतजार कर रहे थे। तान्या मन ही मन डर रही थी कि कहीं उसकी सहेलियां उसकी ड्रेस का मजाक न उड़ा दें। उसने कैफे के दरवाजे पर कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी टेबल की ओर बढ़ी।
जैसे ही उसकी सहेलियों—प्रिया, सिमरन और नेहा की नजर तान्या पर पड़ी, वे तीनों अपनी कुर्सियों से उठ खड़ी हुईं। उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं।
“ओह माय गॉड, तान्या!” प्रिया ने लगभग चीखते हुए कहा, “हैप्पी बर्थडे डार्लिंग! पर पहले ये बता कि तूने ये मास्टरपीस कहां से खरीदा?”
सिमरन ने आगे बढ़कर तान्या के गाउन के बॉर्डर को छुआ, “तान्या, सच बता, क्या तूने यह सब्यसाची या मनीष मल्होत्रा के किसी नए विंटर कलेक्शन से कस्टमाइज करवाया है? यह फैब्रिक, यह बारीक जरदोज़ी और यह कटिंग… मैंने शहर के किसी भी मॉल या बुटीक में ऐसा रॉयल डिजाइन नहीं देखा! तू तो बिल्कुल किसी राजघराने की राजकुमारी लग रही है यार!”
नेहा ने तुरंत अपना फोन निकाला, “प्लीज तान्या, पहले एक रील बनाते हैं। इस ड्रेस का लुक इतना क्लासी और रिच है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करते ही लाइक्स की बाढ़ आ जाएगी। सच बता, किस ब्रांड का है और कितने का पड़ा?”
तान्या के कानों में अपनी सहेलियों के ये शब्द गूंज रहे थे। एक पल के लिए वह पूरी तरह सुन्न रह गई। जिस ड्रेस को वह घर में ‘लोकल’ और ‘हाथ से सिली हुई रद्दी’ बताकर आई थी, उसकी हाई-प्रोफाइल और ब्रांड-कॉन्शियस सहेलियां उसकी तुलना देश के सबसे बड़े फैशन डिजाइनरों से कर रही थीं।
तान्या के भीतर का झूठा घमंड एक ही झटके में रेत की दीवार की तरह ढह गया। उसकी आंखों के सामने सुबह का वह दृश्य घूमने लगा जब उसकी भाभी थकी हुई आंखों और चेहरे पर एक मासूम मुस्कान लिए उसे यह तोहफा दे रही थी, और उसने कितनी बेरहमी से उनकी मेहनत का अपमान किया था।
तान्या का गला रुंध गया। उसने एक गहरी सांस ली और सच बोलने की हिम्मत जुटाई। उसने गर्व और पश्चाताप के मिले-जुले स्वर में कहा, “दोस्तों, यह किसी बड़े ब्रांड का नहीं है… और न ही यह किसी मॉल में बिकता है। यह दुनिया की सबसे अनमोल ड्रेस है, क्योंकि इसे मेरी भाभी ने अपने हाथों से, रात-रात भर जागकर सिर्फ मेरे लिए डिजाइन किया है। वो एक प्रोफेशनल फैशन डिजाइनर हैं।”
यह सुनते ही तीनों सहेलियां हैरान रह गईं। प्रिया बोली, “क्या? तुम्हारी भाभी इतनी कमाल की डिजाइनर हैं और तुमने हमें कभी नहीं बताया? तान्या, प्लीज अपनी भाभी से कहकर अगले महीने मेरे भाई की शादी के लिए भी ऐसी ही एक ड्रेस डिजाइन करवा दो ना! हम पूरा प्रोफेशनल चार्ज देंगे, क्योंकि ऐसा हुनर तो बड़े-बड़े शोरूमों में भी ढूंढने से नहीं मिलता।”
पूरी पार्टी के दौरान हर कोई सिर्फ और सिर्फ तान्या के परिधान और उसकी भाभी के हुनर की तारीफ करता रहा। लेकिन तान्या का दिल अब वहां नहीं लग रहा था। उसे पार्टी का हर मिनट काटना भारी पड़ रहा था। वह जितनी जल्दी हो सके घर पहुंचकर अपनी भाभी के सामने अपने आंसुओं से अपनी गलती धोना चाहती थी।
पार्टी खत्म होते ही तान्या ने कैब पकड़ी और सीधे घर की तरफ भागी।
घर का दरवाजा खुला था। तान्या ने अंदर कदम रखा और बिना किसी की तरफ देखे सीधे अलका के कमरे में जा पहुंची। अलका उस समय अलमारी में कपड़े तरतीब से रख रही थी।
तान्या दौड़कर गई और पीछे से अलका की कमर में बाहें डालकर फूट-फूट कर रोने लगी।
अलका चौंक गई और उसने मुड़कर तान्या का चेहरा अपने हाथों में थामा, “अरे तान्या! क्या हुआ मेरी बच्ची? तू रो क्यों रही है? किसी ने कुछ कह दिया क्या पार्टी में? सब ठीक तो है ना?”
तान्या हिचकियों के बीच बोली, “भाभी… मुझे माफ कर दीजिए। मैं बहुत स्वार्थी, घमंडी और अंधी हो गई थी। मैंने आपके हुनर को नहीं पहचाना, आपके उस प्यार को नहीं देखा जो आपने इस ड्रेस के एक-एक धागे में पिरोया था। आज पार्टी में हर किसी ने इस ड्रेस की इतनी तारीफ की कि मुझे अपनी सोच पर घिन आने लगी। मैंने सुबह आपका दिल दुखाया, मुझे अपनी नादानी के लिए माफ कर दीजिए भाभी… प्लीज मुझे गले लगा लीजिए।”
अलका की अपनी आंखें भर आईं। उसने तान्या के आंसू अपने पल्लू से पोंछे और उसे जोर से अपने सीने से लगा लिया।
“पगली, तू रो क्यों रही है? आज तो तेरा जन्मदिन है, आज तो मुस्कुराने का दिन है,” अलका ने प्यार से डांटते हुए कहा, “तू मेरी छोटी बहन है तान्या। क्या कभी कोई बड़ी बहन अपनी छोटी बहन की बातों से नाराज हो सकती है? और देख, मैंने तो मम्मी जी से सुबह ही कह दिया था कि मेरी ननद शाम को खुद आकर मुझे थैंक यू बोलेगी।”
तभी दरवाजे की चौखट पर मनोरमा जी और हरिमोहन जी आकर खड़े हो गए।
मनोरमा जी ने मुस्कुराते हुए चुटकी ली, “अरे भई, तुम दोनों ननद-भाभी का रोना-धोना खत्म हो गया हो तो शाम की तैयारी करें? या तान्या मैडम पहले कोई ब्रांडेड कपड़े ढूंढेंगी? क्योंकि घर के बने कपड़ों में तो फाइव-स्टार होटल में एंट्री नहीं मिलेगी ना!”
तान्या ने शर्म से अपनी मां के गले में हाथ डाल दिए, “मां, प्लीज अब मेरी खिंचाई मत करो। मुझे मेरी गलती की सजा मिल चुकी है। और अब मैं इस ड्रेस को जिंदगी भर संभाल कर रखूंगी, क्योंकि इसमें मेरी भाभी का सच्चा प्यार बसा है।”
हरिमोहन जी के चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि की मुस्कान तैर गई। उन्होंने अपनी बहू अलका के सिर पर हाथ रखा। पूरा घर एक बार फिर हंसी, ठहाकों और पारिवारिक मिठास से भर उठा था।
अलका ने हंसते हुए कहा, “चलिए अब जल्दी से तैयार हो जाइए सब, मुझे तो बहुत तेज भूख लगी है और आज का डिनर हमारी लाड़ली तान्या की तरफ से है!”
तीनों खिलखिलाते हुए कमरे से बाहर निकले। घर की चौखट लांघते हुए मनोरमा जी ने मन ही मन ईश्वर को धन्यवाद दिया कि जिस घर में समझदार बहू और संवेदनशील ननद हो, वहां रिश्तों की डोर कभी कमजोर नहीं पड़ सकती।
अक्सर हम दुनिया के दिखाए और महंगे ब्रांड्स के चक्कर में अपनों की सच्ची मेहनत, प्यार और भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है जब किसी अपने के हाथ से बने सादे तोहफे ने बाजार के सबसे महंगे सामान से ज्यादा आपके दिल को छुआ हो? अपनी राय और अनुभव कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।
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