कविता सौदामिनी का हाथ अपने हाथ में लेकर कस के थामे हुए थी।कविता जोर-जोर से रो रही थी।।अस्पताल की बिस्तर पर पडी सौदामिनी जिंदगी की अंतिम सांसे ले रही थी ,उसके पास समय नहीं था पता नहीं कितना समय बचा था एक दिन दो दिन एक घंटा या एक क्षण कुछ पता नहीं था । बस दर्द से कराह रही थी सौदामिनी।
कैंसर से पीड़ित थी सौदामिनी,लाख कोशिशों के बाद भी सौदामिनी को बचाया नहीं जा सका था। कविता सौदामिनी की देवरानी थी ,जो आज सौदामिनी की ऐसी हालत पर रो रही थी। कविता ही क्या देवर दीपक और पति भुवनेश जी भी दुखी मन से बैठे थे।
अचानक से कविता के हाथ से सौदामिनी के हाथ की पकड़ ढीली पड़ने लगी ।और अगले ही क्षण सौदामिनी का हाथ कविता के हाथ से छूटकर नीचे गिर गया और उनकी गर्दन एक तरफ लुढ़क गई । कविता ने दीपक को आवाज लगाई,डॉक्टर को बुलाओ डॉक्टर आया और सॉरी बोलकर सफेद चादर से सौदामिनी का मुंह ढककर कमरे से बाहर चला गया।
सौदामिनी के अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हो गई थी भुवनेश जी ने कहा कविता अपनी भाभी को अच्छे से तैयार करना, तुम्हें पता है ना कि तुम्हारी भाभी को सजने संवरने का बहुत शौक था । आज उसको वैसे ही तैयार करना जैसे वह पहली बार दुल्हन के रूप में तैयार हुई थी। कविता भी बेमन से सौदामिनी के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही थी ।
अच्छी तरह से तैयार होने के बाद बीमारी के बावजूद सौदामिनी का चेहरा दमक रहा था, उसकी गोरे रंग पर लाल साड़ी और लाल बड़ी बिंदिया होठों को लगी लाली बहुत खिल रही थी । ऐसा लग ही नहीं रहा था कि यह शरीर बेजान हो चुका है। थोड़ी देर में उनकी अंतिम यात्रा आरंभ हो गई और सौदामिनी का सुंदर शरीर पंचतत्व मे विलिन हो गया
सौदामिनी अपने नाम के अनुरूप ही सुंदर थी।मृदुल स्वभाव ऊंची पूरी हाइट और गोरा रंग दमकता हुआ चेहरा ,जो भी देखे एक बार उसे नजर नहीं हटा पाता था। सौदामिनी इंटर तक पढ़ी थी और घर कार्य में दक्ष थी।सौदा मिनी जी की मां उसके बचपन में चली गई थी । पिता ने दूसरी शादी कर ली थी सौतेली मां परेशान करती थी।
लेकिन सौदा मिनी सब चुपचाप सहती रहती और अपना और घर का काम करती रहती थी। सौदा मिनी अभी 18 साल की थी। तभी वहां गांव की जमींदार का बेटा भुवनेश ने सौदा मिनी से विवाह करने की इच्छा जताई । इतने अच्छे घर से रिश्ता आने पर सौदा मिनी की मां मालती झट से तैयार हो गई, पिता ने थोड़ी बे मर्जी दिखाई लेकिन पत्नी मालती के आगे सौदा मिनी के पिता की एक न चली। और बिना मर्जी के सौदा मिनी भुवनेश से ब्याह दी गई।
यहां भुवनेश के घर में भुवनेश की मां और एक छोटा भाई एक बहन थी। उसके पिताजी गांव के पंचायती चुनाव के दुश्मनी में मारे गए थे। अब सब कुछ भुवनेश ही देखता था। गांव की प्रतिष्ठित परिवार से संबंध रखता था। सौदा मिनी ने ससुराल आते ही अपने व्यवहार से सब का दिल जीत लिया । सास की खूब सेवा करती ,और छोटे देवर नंद राधा का भी खूब ध्यान रखती ।
भाभी भाभी कहकर दिनभर नंद और देवर सौदा मिनी के पास ही रहते । सास भी खूब प्रशंसा करती सौदा मिनी की। लेकिन भुवनेश सबसे में अलग था। शादी हो जाने के बाद भी भुवनेश तो दो तीन दिन तक घर में नहीं आता । सौदा मिनी ने सास से पूछा तो कह दिया अब जमीदार का बेटा है उसकी आदतें तो भी खराब है अब तुम ही उसे रास्ते पर ला सकती हो। सौदा मिनी शांत होकर रह गई।
एक रात घर में भुवनेश था तो सौदामिनी ने हिम्मत करके पूछ लिया कि आप दो-दो तीन-तीन दिन रात में घर नहीं आते कहां रहते हैं ।।तो भुवनेश ने कहा तुमसे मतलब, मैं आपकी पत्नी हूं मतलब तो रखना पड़ेगा। पत्नी हो तो पत्नी का तुम्हें अधिकार पूरा मिलेगा इस घर में ,लेकिन मैं कहां जाता हूं कहां रहता हूं यह मत पूछो।
एक बार मुझे बता दीजिए सही फिर मैं कभी नहीं पूछूंगी सौदामिनी ने कहा । देखो मैं जमींदार का बेटा हूं मुझे इधर उधर जाने की आदत है ,हां एक बात में और तुम्हें सच बता देता हूं तुम्हारे अलावा मेरी और भी औरतों से संबंध है, लेकिन घर सिर्फ तुम्हारे लिए है।
और पत्नी का दर्जा सिर्फ तुम्हें ही मिलेगा । तुम पत्नी भाभी और बहू होने का पूरा हक अच्छे से निभाओ, बस मेरे काम में टांग न अडाओ।अपने प्रति तुम्हारी जिम्मेदारियां को निभाने में कोई कोई कसर नहीं छोडूंगा।
उस दिन के बाद से सौदामीनी ने फिर कभी भुवनेश से कोई बात नहीं पूछी। इन सबके बावजूद भुवनेश सौदामिनी का खूब अच्छे से ख्याल रखता रहा। शादी की 1 साल बाद सौदामिनी ने एक बेटे को जन्म दिया।
सास की खूब सेवा करती और देवर ननंदो की पढ़ाई लिखाई और उनकी हर जरूरत को पूरा करती । इसी बीच सौदामिनी की सास नहीं रही । लेकिन देवर नंदो को मां की कमी महसूस नहीं होने दी। देवर कृष्णा तो सौदामिनी को भाभी मां कह कर बुलाता था।
एक दिन नंद राधा ने बताया कि गांव के एक लड़के को पसंद करती है और शादी करना चाहती है ।तो सौदामिनी ने भुवनेशको बताया तो भुवनेश भड़क गया, लेकिन फिर पत्नी के समझाने पर उस लड़के का पता लगाया सब कुछ ठीक था तो राधा की शादी कर दी ।
देवर कृष्णा अभी पढाई कर रहा था । सौदामिनी की छत्रछाया में बडा हुआ था तो वह भी बहुत संस्कारी था । पढ़ाई पूरी करने के बाद शहर में नौकरी करने लगी तो सौदामिनी से दूर जाते समय कृष्णा बहुत रोया । नौकरी लगते ही कविता का रिश्ता आया कृष्णा के लिए। जब सौदामिनी ने कृष्णा की मर्जी पूछनी चाहिए तो उसे साफ मना कर दिया की भाभी मां आप जैसा चाहेंगे वैसा होगा मैं मना नहीं कर सकता आपकी बात को।
कविता और कृष्णा दोनों को एक दूसरे को पसंद आ गए तो शादी हो गई। । लेकिन शादी के 1 हफ्ते बाद जब कृष्णा वापस शहर जाने लगा कविता को भाभी के पास छोड़कर जाने लगा ,तो सौदामिनी ने कहा पत्नी को क्यों छोड़ कर जा रहे हो । कृष्णा बोला भाभी आप जब से इस घर में आई है सबके लिए करती आ रही है ।
लेकिन अब कविता आपकी सेवा करेगी। सौदामिनी ने बहुत समझाया कृष्णा को कविता को साथ ले जाए। लेकिन कृष्णा नहीं माना। अब कविता चिढ़ गई कृष्णा जाने के बाद कविता सौदामिनी से कहने लगी आपने ऐसा क्या जादू कर दिया है इन पर जो अपनी पत्नी को भी बात नहीं मानते, आप जो कहती है वही सुनते हैं ।
मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है कविता सौदामिनी बोली मैं इसको समझाऊंगी की तुम्हे ले जाए । चिढ के मारे कविता घर का कोई काम नहीं करती और बात-बात में सौदामिनी को जवाब देती लेकिन सौदामिनी चुप रहती और अपना काम करती।
अब सौदामिनी का बेटा भी तीन साल का हो गया था। अब सौदामिनी को अक्सर खांसी आती रहती थी। कुछ दिनों बाद उसे बुखार आने लगा। दवा लेने पर बुखार उतर जाता लेकिन फिर हो जाता। सौदामिनी कमजोर होती जा रही थी। यह सुनकर शहर से कृष्णा छुट्टी लेकर घर आया तो देखा भाभी का चेहरा मुरझा गया है ।
और वह बहुत कृष काय हो गई थी।।घर आकर भी वह दिन भर सौदामानी की देखरेख में लगा रहता । इससे कविता जल भुन जाती थी । आज कविता ने बहुत बड़ी बात बोल दी कि जब भाभी से ही रिश्ता रखना था तो मुझसे शादी क्यों की ,रहते उन्ही के साथ। कृष्णा को बहुत गुस्सा और उसने एक थप्पड़ जड़ दिया कविता को, फिर क्या था कविता नाराज होकर मायके चली गई।
इधर कृष्ण सौदामिनी को शहर ले आया जबरदस्ती और बड़े अस्पताल में जांच कराई ,तब पता लगा सौदामिनी को लंस कैंसर है । अब कृष्णा को काटो तो खून नहीं। बहुत रोया वह सौदामिनी के आंचल में छिपकर। घर में कोई देखभाल करने वाला नहीं था कविता भी मायके चली गई थी । तब कृष्णा परेशान था कि भाभी की देखभाल कैसे होगी भुवनेश को भी जब पता चला तो वह भी बहुत परेशान हो गया।
आज सौदामीनी कृष्णा और भुवनेश को लेकर कविता के घर गई और उसको मना कर वापस ले आई। और यह वादा किया कि अब उसे कृष्णा अपने साथ शहर ले जाएगा। कृष्णा के समझाने पर भी कविता नहीं मानी और कृष्णा के साथ शहर आ गई । सौदामिनी अपना धीरे-धीरे काम निपटा लेती और फिर पड़ी रहती । जब भुवनेश भी थोड़ी मदद करने लगा था। और सौदामिनी की भी देखभाल करने लगा था।
लेकिन धीरे-धीरे सौदामिनी की हालत बिगड़ने लगी ,और वह काम करने और घर की देखभाल करने में असमर्थ होती जा रही थी। कीमो होने लगा उसके बाद स्थिति और बदतर हो जाती। बीच-बीच में कृष्णा आता रहता था भाभी को देखने। भाभी का हाथ पकड़ कर वह बहुत रोता था।इतनी अच्छी भाभी मिली है हमें भगवान क्यों छीन रहा है। घर का दुखद माहौल देखकर कविता का हृदय परिवर्तन हुआ और इस बार वह घर पर ही रुक गई वापस शहर नहीं गई।
आज अचानक भुवनेश बोले उसने कहा सौदामिनी आजकल तुम तैयार नहीं होती सजती संवरती नहीं हो। क्या तैयार हूं मैं जी नहीं करता सौदामिनी बोली। अब अरे नहीं ठीक हो जाओगे तुम चिंता नहीं करो यह झूठी तसल्लियां मुझे ना दे आप। भुवनेश भी चुप हो गया वह भी जानता था कि बस कुछ ही दिनों की मेहमान है सौदामिनी।
आज सुबह जब सौदामिनी मुंह धोने गई तो मुंह से खून निकला वह आकर बिस्तर पर लेट गई अपनी बेटे गोलू का हाथ पकड़ कर कविता के हाथ में दिया की कविता भूल चुक माफ करना अब मैं जा रही हूं मेरे पास समय नहीं है मेरे गोलू का ध्यान रखना। और फिर वह बेहोश हो गई अस्पताल ले जाया गया । उनकी हालत गंभीर थी सभी अस्पताल में मौजूद थे कविता सौदामिनी का हाथ पकड़े बैठी थी एक बार आंखें खोलकर कविता को देखा कविता ने पीछे से कृष्णा को आवाज लगाई भाभी पर सौदामिनी फिर ना बोली । दीपक सिर्फ चिल्लाया भाभी भाभी कहां चली गई मुझे छोड़कर हे भगवान ऐसी भाभी सबको देना जैसी मुझको दी। मैं कैसे रहूंगा भाभी आपके बिना पर भाभी कहां सुन रही थी भाभी तो अपने अनंत यात्रा को निकल चुकी थी।
आज कविता भी बोली भाभी आप बहुत अच्छी थी मेरी गलतियों को माफ कर देना फिर सौदामिनी का पार्थिव शरीर घर लाया गया । कविता खूब अच्छे से तैयार कर रही थी सौदामिनी को । एक अच्छा इंसान अपनी अच्छाइयों को लेकर नहीं जाता यही छोड़ जाता है जिसे लोग हमेशा याद करते रहते हैं । सौदामिनी की अच्छाइयां भी सभी के जुबान पर थी। एक अच्छी बहू एक अच्छी पत्नी और एक अच्छी भाभी ऐसी भाभी जो बहुत कम देखने को मिलती है।
आज सौदामिनी को याद करके सभी की आखें नम थी। कविता भी अब बदल चुकी थी। मै ही गलत थी भाभी को गलत समझती थी। पर भाभी तो बहुत अच्छी थी। ऐसी भाभी बहुत मुश्किल से मिलती है।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
26 सितम्बर