असली खूबसूरती – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका’

दिल्ली जैसे बड़े शहर की चमक-दमक में रहने वाली रिया हमेशा अपनी खूबसूरती पर गर्व करती थी। महंगे कपड़े, ब्रांडेड मेकअप और सोशल मीडिया पर हजारों फॉलोअर्स—यही उसकी दुनिया थी। ऑफिस में भी लोग उसकी तारीफ करते नहीं थकते थे, और रिया को लगता था कि खूबसूरती ही सब कुछ है।

उसी ऑफिस में एक नई लड़की ने जॉइन किया—सोनल। वह साधारण सी दिखती थी, न ज्यादा मेकअप, न कोई खास फैशन। शुरुआत में रिया ने उस पर ध्यान भी नहीं दिया। लेकिन धीरे-धीरे ऑफिस में सब लोग सोनल की बातें करने लगे।

“यार, सोनल कितनी मददगार है!”

“आज मेरी तबीयत खराब थी, उसने मेरा काम भी संभाल लिया।”

रिया को यह सब सुनकर थोड़ा अजीब लगा। उसने सोचा, “इसमें ऐसा क्या खास है?”

एक दिन ऑफिस में एक बड़ा प्रोजेक्ट आया। रिया को उसकी जिम्मेदारी मिली, लेकिन काम बहुत ज्यादा था और समय कम। रिया घबरा गई। वह मदद मांगने में झिझक रही थी क्योंकि उसे लगता था कि इससे उसकी इमेज खराब हो जाएगी।

तभी सोनल उसके पास आई और बोली, “अगर आपको ठीक लगे तो मैं मदद कर सकती हूँ।”

रिया ने मन ही मन सोचा—“ये क्या मदद करेगी?” लेकिन मजबूरी में उसने हां कह दिया। अगले कुछ दिनों में सोनल ने पूरी ईमानदारी और मेहनत से रिया का साथ दिया। वह देर तक ऑफिस में रुकती, हर छोटी-बड़ी चीज का ध्यान रखती।

प्रोजेक्ट सफल हुआ। बॉस ने सबके सामने रिया की तारीफ की, लेकिन रिया जानती थी कि इसमें सोनल का बड़ा योगदान है। पहली बार उसे महसूस हुआ कि सिर्फ बाहरी सुंदरता से कुछ नहीं होता।

कुछ दिनों बाद रिया की तबीयत अचानक खराब हो गई। वह अकेली अपने फ्लैट में थी। उसने ऑफिस में किसी को फोन किया, लेकिन सबसे पहले सोनल ही पहुँची। उसने रिया का ख्याल रखा, दवा लाई, खाना बनाया और रात भर उसके पास बैठी रही।

रिया की आँखों में आँसू आ गए। उसने धीरे से कहा, “सोनल, मैं हमेशा सोचती थी कि खूबसूरती सिर्फ चेहरे में होती है, लेकिन आज समझ आया कि असली खूबसूरती तो दिल में होती है।”

सोनल मुस्कुराई और बोली, “खूबसूरती वो है जो किसी के काम आए, जो किसी के चेहरे पर मुस्कान लाए।”

उस दिन के बाद रिया बदल गई। उसने दिखावे की दुनिया से थोड़ा दूरी बना ली और लोगों के प्रति अपने व्यवहार में बदलाव लाया। अब उसे समझ आ गया था कि असली खूबसूरती शरीर नहीं, बल्कि मन होती है—जो इंसान को सच में सुंदर बनाती है।

सर्वथा अप्रकाशित एवं मौलिक रचना

लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका’

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