बेटा नालायक, किसकी गलती?

सुना है राधा बहन? तुम्हारी बहू के कारनामे? शीतल जी अपनी पड़ोसन राधा जी के घर पर आकर हाफ्ते हुए स्वर में कहती है 

राधा जी:  क्या सुना है बहन? साफ-साफ तो बताओ? 

शीतल जी:  अरे तुम्हारी बहु जिसको रील्स बनाने का बड़ा शौक था, जिसकी वजह से उसकी कमाई होनी भी शुरू हो गई थी और उसी के घमंड से वह तुम्हारे बेटे को लेकर अलग रहने चली गई।

राधा जी:  शीतल बहन! तुम क्यों पुरानी बातों को दोहरा कर मेरे जख्मों को कुरेद रही हो? यह सारी बातें तो इस मोहल्ले के हर एक इंसान को पता है, तो इसमें नया बताने को क्या है? बड़ी मुश्किल से तो अमन के पापा संभले हैं, यह सारी बातें वापस सुनेंगे तो फिर से उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ जाएगी। तुम्हारा एहसान होगा बहन जो दोबारा अमन की बातें इस घर में या हमारे सामने ना करो। 

शीतल जी:  रुक जाओ बहन! तनिक सांस भी ले लो, मैं यह सारी बातें इसलिए नहीं बता रही ताकि तुम्हारे जख्मों को कुरेद सकूं, बल्कि इसलिए कह रही हूं, क्योंकि आज मैं तुम्हारी उस अमीर बहू को बड़े ही बुरी हालत में देखा है, भला जिनकी इतनी कमाई उसका यह हाल? इसलिए तुम्हारे पास दौड़ी चली आई। 

राधा जी:  कैसा हाल? पहली मत बुझाओ साफ-साफ बताओ!

शीतल जी:  आज मैं अपनी एक पुरानी सहेली के घर गई थी, हम सत्संग में साथ ही जाती हैं, तो एक दूसरे का घर में आना जाना लगा रहता है, तो आज उसके घर पर पूजा थी, मैंने वहां तुम्हारी बहु मंजू को देखा, वह सब की आवभगत में व्यस्त थी, उसका ध्यान जैसे ही मुझ पर गया, वह अपनी नज़रे चुराने लगी, मैंने कई बार उसे टोकने की कोशिश भी की, पर उसने मुझे ऐसे नजरअंदाज किया मानो मैं उसे दिख ही नहीं रही। तब मैंने अपनी सहेली से पूछा तो जो उसने कहा, सुनकर मैं तो दंग ही रह गई, उसने कहा कि पिछले दो-तीन महीनो से मंजू उनके घर कम कर रही है,

बेचारी अनाथ है, आगा पीछा कोई नहीं, इसलिए रख लिया, काम बड़े ही सलीके से करती है और पैसे भी ठीक-ठाक ही लेती है, अब तुम ही बताओ राधा बहन? तुम्हारे यहां उसे किस बात की कमी थी? थोड़े से पैसे क्या कमाने लगी, खुद को टाटा बिरला समझने लग गई थी, पर उसने यह क्यों कहा कि वह अनाथ है? मेरी सहेली बता रही थी कि आज तक उसने उसे किसी के साथ नहीं देखा, फिर अमन कहां है? कहीं उसने अमन के साथ कुछ ऐसा वैसा तो नहीं कर दिया ना? आजकल जिस तरह की खबरें सामने आ रही है, डर लगता है बहन, तुम एक बार पता करो आखिर माजरा क्या है?

राधा जी:   शुभ शुभ बोलो बहन! अभी मैं अपने भाई को फोन कर सब कुछ बताती हूं और तुम अपनी सहेली से मंजू का पता पूछो, मैं आज ही जाऊंगी उसके पास, फिर राधा जी मंजू के घर पहुंचती है, जहां मंजू एक छोटी सी तंग गली के एक छोटे से घर का दरवाजा खोलती है, राधा जी को देखते ही मंजू की आंखें फटी की फटी रह जाती है और राधा जी उसे गुस्से में देखने लगती है।

मंजू:   मम्मी! आप यहां?

राधा जी गुस्से में:  ज़रा अमन को बुलाओ!

मंजू:  वह अभी घर पर नहीं है 

राधा जी:  तो कहां है? 

मंजू:  मम्मी….? वह…?

मंजू सकपकाने लगी, जिससे राधा जी का गुस्सा और बढ़ गया और इस बार वह चिल्लाकर पूछती है, सच-सच बता अमन कहां है? वरना अब तुझसे यह सवाल पुलिस करेगी, तूने क्या सोचा था? पहले तू उसे बहला फुसलाकर हमसे दूर ले जाएगी और फिर उसके साथ जो मन वह करेगी? उसके माता-पिता अभी जिंदा है समझी? मैं पहले से जानती थी मेरा बेटा बुरा नहीं है, तूने ही उसको बिगड़ा है हमारे खिलाफ, अब बताती है या नहीं? बहुएं तो घर की इज्जत होती है, पर तेरे जैसी लड़की किसी के घर की इज्जत क्या बनेगी? तुझ जैसी लड़की तो पूरे कुल के लिए कलंक है, कुलकलंकिनी है तू 

इससे पहले मंजू कुछ बोल पाए, पीछे से अमन आ जाता है। वह शराब के नशे में धुंध होता है, जिसे देख राधा जी भी पहचान नहीं पाती और कहती है यह अमन है क्या? पर यह ऐसे? देखा मंजू ना तू इसे हमारे से दूर करती, ना ही यह ऐसा बनता, तूने हमारे परिवार को बर्बाद कर दिया। 

अब मंजू से बर्दाश्त नहीं हुआ, उसने फिर रोते हुए बोला, मम्मी यह तो मैं और मेरा भगवान ही जानता है कि मैंने आप लोगों को इनसे बचाया है या आपके परिवार को बर्बाद किया? 

राधा जी:  क्या मतलब है तेरा?

मंजू:  मतलब मम्मी शराब की लत तो इनको शादी से पहले ही लग गई थी, पर शादी के बाद वह ज्यादा हो गया, आप लोगों को लगता था यह बड़े लोगों के साथ उठते बैठते हैं, तो इसलिए कभी-कभार पी लेते हैं, पर शायद ही आप लोगों को पता होगा कि जुआ खेलना भी इनकी आदत बन चुकी थी, मेरे जेवर ले जाकर बेचा करते थे, और मुझसे कहते थे मैं नया व्यापार कर रहा हूं, आप लोगों को बताने से मना भी करते, फिर जब मैंने व्यापार का सच जाना तो पता चला वह जुए में घुस चुके हैं, आज फिर मैंने रिल्स का बहाना बनाया, ताकि उसी के पैसों के बहाने वह मेरे साथ चलने को तैयार हो जाए। मैंने सोचा जब गरीबी में रहेंगे तो सारी बुरी आदतें छूट जाएगी, पर ऐसा हुआ नहीं, मैं पैसे नहीं देती तो दिहाड़ी कर शराब पीते। मैंने सबको अपने अनाथ होने का इसलिए बोला ताकि मुझे काम मिले और मैं अपना गुजारा कर पाऊं…क्योंकि इनकी वजह से तो मैं रिल्स भी नहीं बन पाती अब… 

राधा जी:  पर यह सारी बातें तुमने हमसे क्यों नहीं की?  हम भी कुछ कोशिश करते? तुम्हें क्या ज़रूरत थी इसे घर से लाने की? उसकी वजह से मामला तो और भी बिगड़ गया। 

मंजू:  इन्होंने तो आप लोगों को बहला फुसलाकर आप लोगों के घर को बेचने तक की योजना बना ली थी, अगर मैं यह आप लोगों से कहती तो क्या आप लोग मेरी बात मानते? शायद ही कोई होगा जो अपने बेटे को छोड़कर बहू की बात माने और आप लोग उनकी बचपन से ही हर जिद पूरी करते आए हैं, ऐसे में वह घर भी आप लोग से ले ही लेते, जो मैं नहीं चाहती थी। बस मुझे उस वक्त जो समझ आया मैंने वही किया और अभी भी मैं हार नहीं मानूंगी। चाहती तो सब कुछ जैसा चल रहा था वैसे चलने देती पर फिर उससे घर की बर्बादी को कोई नहीं रोक सकता था, बस मैंने घर को और आप लोगों को बर्बाद होने से, अपने को बर्बाद करना ज्यादा बेहतर समझा। इनको मैंने नशा मुक्ति केंद्र में जाने के लिए मना लिया है, इसलिए आज आखिरी बार पीने गए थे। मम्मी, मैं गरीब घर की बेटी हूं, रिश्तों और पैसों दोनों की कीमत जानती हूं अच्छे से, आप लोगों को लग रहा होगा मैं इतनी महान बन रही हूं, पर नहीं मैं सोच रही थी कि आप लोगों को आपके बुढ़ापे का सहारा लौटाऊंगी, ना कि बुढ़ापे का बोझ..! क्योंकि बेटा भले ही शादी के पहले से ही नालायक रहे, पर शादी के बाद तो उसके नालायक बनने का इल्जाम बहू पर ही आता है। 

राधा जी:   मंजू तू तो हमारे लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं, यहां तो बहुए अपनी खुशियों के आगे अपने सास ससुर को आश्रम ही छोड़ देती है और तूने तो हमारे लिए खुद ही कैद चुन लिया, अब तू यह सब अकेले नहीं करेगी, हमारे साथ रहकर करेगी, उस घर की असली मालकिन अब तू ही है… चल बहू…

फिर मंजू और राधा जी अमन को नशा मुक्ति केंद्र में छोड़कर घर आ जाते हैं। जहां शीतल जी अपने सबसे पहले आकर कहती है, राधा बहन इस कुलकलंकनी को घर क्यों ले आई? अमन को तो खा गई होगी पक्का, मैं तो कहती हूं पुलिस को बुला लो जल्दी, वरना कहीं तुम्हें भी अमन की तरह गायब ना कर दे, ऐसी औरतें सिर्फ अपने घर परिवार के लिए नहीं पूरे समाज के लिए कलंक होती है।

राधा जी:   जब कुछ पता ना हो तो ज्यादा नहीं बोलना चाहिए! मेरी बहू कलंकिनी है या लक्ष्मी इसका पता जल्दी सबको लग जाएगा! क्या किया जा सकता है? समाज हमेशा से ही बहू के लिए अलग और बेटों के लिए लग रहा है! बेटा अगर शादी के पहले नालायक रहे तो लोग कहते बेचारे मां-बाप की तो किस्मत ही खराब है और वही शादी के बाद नालायक निकले तो कहते हैं बहू ने ही बिगड़ा होगा, चाहे बहू उसे सुधारने के हजार कोशिश ही क्यों ना करें? मेरी बहू ने क्या किया? क्यों किया? इसका जवाब मैं सबको आराम से दूंगी फिलहाल इसे अभी आराम चाहिए, यह कहते हुए राधा जी मंजू को घर के अंदर ले आती है। 

समय बितता गया और अमन में भी काफी सुधार आ गया। उसके पापा उसे अपने घर के आंगन में किराने की दुकान खोलकर दे दे देते हैं, जिसे वह बड़े मन से चलाता, फिर घर में नन्हे मुन्ने की किलकारियां भी गुंजने लगी, एक टूटा हुआ परिवार फिर से जुड़ गया, सिर्फ मंजू की वजह से… 

दोस्तों, आप सब सोच रहे होंगे, मंजू पहले ही इतना ना करके अपने सास ससुर से बात कर लेती, लेकिन लड़के के माता-पिता अपने इकलौते बेटे की बात ना सुनकर मंजू की बात क्यों सुनते? अगर खुद बुरी बनकर उसे घर से वह ना ले जाती तो, अमन अपने माता-पिता की संपत्ति जुए में डाल देता मंजू के पीछे से, इसलिए मंजू ने पहले अमन को अपने सोशल मीडिया से कमाए हुए पैसों का लोभ दिखाया, जिससे उसे अपने माता-पिता की संपत्ति कम लगने लगी और माता-पिता को रोब दिखाकर वह मंजू के साथ चला गया। अमन को लगा, वह मंजू के साथ बड़े ठांट से रहेगा, उसे वहां अपने शराब और जुए के लिए भी बहुत पैसे मिलेंगे, इसलिए जाने से पहले उसने अपने माता-पिता से बदतमीजी भी की, जिससे उसके माता-पिता का मन उससे उचट गया और यही मंजू चाहती थी, उसने खुद दूरी बनाकर अपने सास ससुर को उजड़ने से बचा लिया.. अलग जाकर मंजू ने रिल्स बनाना छोड़ दिया, ताकि अमन कुछ काम करें और इन बुरी लतों से दूर जाए, पर ऐसा हुआ नहीं इसलिए मंजू ने घर काम करने का सोचा था, क्योंकि वह ज्यादा पढ़ी-लिखी भी नहीं थी.. मंजू दिनभर लोगों के घर में काम करती, पर वह अमन की खूब सेवा भी करती, जिससे अमन का मन भी बदल गया और उसने नशा छोड़ने की ठानी.. और यह सब माता-पिता के साथ रहते हुए कभी भी संभव न होता, क्योंकि अमन अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और उसके माता-पिता उसके हर एक जिद को पूरा करते थे…   

धन्यवाद 

रोनिता 

#कुलकलंकिनी

error: Content is protected !!