सावित्री के घर जैसे आज एक नया सबेरा हुआ है। सभी के चेहरे खुशी से खिले हैं। आठ सालों के लंबे इंतजार के बाद सावित्री की बहू की खुशी की खबर आई है। अब घर मे किलकारियां गूंजेगी, मै भी उसे गोद मे लेकर अपने सारे अरमान पूरे करूगीं। कितना तरसी हूँ ऐसा समय देखने के लिए।
हे ईश्वर जैसे तुमने मेरी पुकार सुनी वैसी सबकी सुनना। सावित्री जी भगवान् के मंदिर मे बैठीं बैठी बलइयां ले रही थी और ईश्वर का धन्यवाद कर रही थी कि तुमने मेरी पुकार सुन ली।
सावित्री और विनोद के एक ही बेटा था शिवम बडे प्यार से पाल पोस कर बड़ा किया था। अच्छा पढ लिखकर शिवम इंजीनियर बन गया था और बडी मल्टी नेशनल कंपनी मे काम करता था। सावित्री जी अब शिवम की शादी कर देना चाहती थी। वो इधर उधर लडकियों की तलाश मे थी।
रिश्ते दारो से भी कह रखा था। लेकिन सावित्री को तो कोई लडकी पसंद ही नहीं आती थी। शिवम था भी तो बांका सजीला अच्छी पर्सनालिटी का मालिक, कोई भी लडकी उससे शादी करने को तैयार हो जाती। इस लिए सावित्री जी सुंदर, सुशील, पढी लिखी शिवम के टक्कर की लडकी ढूंढ रही थी।
और इधर जनाव शिवम अपने आफिस मे ही एक लडकी स्नेहा के चक्कर मे पडे हुए थे।अभी शिवम ने स्नेहा से इजहार नहीं किया था बस चुपके चुपके देखा करता था उसे। स्नेहा भी कभी कभी शिवम को देखती थी और नजरें मिल जाने पर शरमा जाती थी।
लगता था दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे लेकिन कोई भी आपस मे बात नहीं हुई थी दोनों की। स्नेहा भी सुंदर थी गोरा रंग, कजरारे नैन, अच्छी कद काठी। लेकिन यह बात शिवम ने घर मे माँ को नहीं बताई थी कि वो स्नेहा को पसंद करता है। इधर सावित्री जी ने कई लडकियां देख ली लेकिन उन्हें एक भी लडकी पसंद नहीं आई कोई भी।
आज स्नेहा का बर्थ डे था। आफिस मे सबको लेकर स्नेहा कैटिन की ओर गई आज जिसको जो खाना हो मजे से खाओ। स्नेहा ने शिवम को भी बुलाया था। आज अच्छा मौका था शिवम के पास अपने मन की बात कहने का। एक लाल गुलाब शिवम ने अपनी शर्ट मे छुपा रखा था।
खाने पीने के बाद बर्थ डे विश करके सभी जाने लगे एक एक करके। स्नेहा थोड़ा रूककर पेमेंट करने लगी। पेमेंट करने के बाद जैसे ही स्नेहा मुडी शिवम गुलाब लेकर घुटने पर बैठ गया, हैप्पी बर्थडे स्नेहा, आई लव यू स्नेहा। स्नेहा शरमा गई। मै गलत नहीं हूँ तो शायद तुम भी मुझे पसंद करती हो।
यै हम दोनों का छुप छुप कर एक दूसरे को देखना इस बात का सबूत है कि दोनों ही एक दूसरे को पसंद करते है। आई लव यू टू इतना कहकर स्नेहा जल्दी से अदरं चली गई।
अब क्या था दोनों तरफ से प्यार का इजहार होने पर मिलना मिलाना, कैटिन जाना इधर उधर की बातें होने लगी। इधर सावित्री देवी परेशान होकर शिवम को नाश्ता देते हुए बडबड कर रही थी देखो तो जैसे लडकियों का अकाल पड गया है, क्या हुआ माँ तेरे लिए कोई लडकी ही नहीं मिल रही है।
क्यों परेशान हो रही हो माँ मत ढूढों लडकी, क्यों ऐसे क्यों कह रहा है तेरी शादी नहीं करनी है क्या। और तू कह रहा है कि मत ढूंढ लडकी। अरे माँ मैने तेरा काम आसान कर दिया है मैंने लडकी ढूंढ ली है, लडकी ढूंढ ली है हां माँ, मेरे साथ काम करती है स्नेहा नाम है उसका।
देख मुझे कोई ऐसी वैसी लडकी नहीं चाहिए कि कल के तू किसी को भी पसंद कर ले और मै तेरी शादी कर दूं ना बाबांं ना । मुझे मेरे पसंद की लडकी चाहिए।
अरे माँ तूझे पसंद आएगी लेकिन एक बात बताए दे रही हूँ बेटा यदि लडकी मुझे पसंद न आई तो मै हरगिज़ ये शादी नहीं करूगीं। हाँ हाँ मत करना।
शिवम ने स्नेहा की तसवीर दिखाई माँ को हाँ तसवीर तो ठीक लग रही है लेकिन भई मुझे तो सामने से देखनी है, अच्छा अच्छा वो भी हो जाएगा। लेकिन मै पहले स्नेहा से बात तो कर लूँ। आफिस मे आज शिवम और स्नेहा कैटिन मे मिले तो शिवम ने कहा स्नेहा मै तुमसे शादी करना चाहता हूँ तुम अपने घर मे बात करो फिर हम दोनों अपने अपने मम्मी पापा को एक दूसरे से मिलवाते है।
स्नेहा ने कहा ठीक है। आज स्नेहा ने अपने घर मे बात की शिवम के बारे मे बताया सबकुछ अच्छा था कोई नकारने वाली बात ही न थी। स्नेहा खुबसूरत थी तो शिवम भी हैडसम ं था। दोनों के मम्मी पापा ंए एक दूसरे से मिलकर बात की और रिशता पक्का हो गया और फिर एक शुभ मुहूर्त मे दोनों की शादी हो गई।
शादी के खुशी खुशी एक साल बीत गए। लेकिन एक साल बीतने तक कोई खुश खबरी स्नेहा की तरफ से न आते देख सावित्री जी चिंतित होने लगी। अब वो बहू को बच्चे के लिए टोकने लगी। शिवम से भी कहने लगी साल हो गया अब बेटा परिवार के बारे मे सोचों। लेकिन शिवम और स्नेहा अभी इस चक्कर मे नही पडना चाहते थे।
इसलिए माँ की कही बातों पर ध्यान ही नहीं दिया। लेकिन फिर एक दिन सावित्री जी शिवम से कहने लगीं देखो बेटा आजकल शादी भी ज्यादा उम हो जाने पर होती है और फिर समय पर परिवार के बारे मे न सोचो तो बहुत सी दिक्कतें सामने आती है।
अरे कुछ नहीं होता माँ आप बेकार मे परेशानहो रहीं है। अभी तो शादी हुई है अभी से क्या। यही कहते कहते दो साल निकल गए। अब तो सावित्री जी हाथ धोकर पीछे पड गई। तो फिर शिवम और स्नेहा ने इस ओर सोचना शुरू किया। आज के जमाने मे तो हर काम को प्लानिंग करके करी जाती थी पहले के जमाने की तरह थोड़ी कि बस सब हो जाता था।
कोशिश तो शुरू हुई लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल रही थी। अब तीन साल हो गए तो सावित्री जी बहुत चिंतित हो गई अब डाकटर को दिखाने की जिद करने लगी।
डाक्टर को दिखाने पर तमाम तरह के टेस्ट कराए गए अब सभी घर मे टेशन मे रहने लगे। रिपोर्ट आने पर पता चला कि स्नेहा माँ नहीं बन सकती कुछ काम्प्लीकेशन है। एक्सीपिरीमेंट करा जा सकता है हो सकता सफलता मिल भी जाए और नहीं भी। ये पता लगने पर सावित्री जी ने घर पर महाभारत मचा दी।
अब देख ले अपनी पसंद की लडकी से शादी करने का नतीजा। मै लडकियां ढूंढ रही थी तेरे लिए तो तू नहीं माना अपनी पसंद की लडकी से शादी कर ली। अब देखो मेरे घर मे बच्चे की किलकारी नहीं गूंजेगी, अब स्नेहा माँ नहीं बन सकती। अरे माँ ये तुम कैसी बातें कर रही भो ये तो महज एक एक्सीडेंट है
और वो किसी के साथ भी हो सकता है। चाहे वो स्नेहा हो या आपकी पसंद की लडकी। ये सब पहले से तो कुछ नहीं पता होता है। अब इलाज करवाएगें देखगे कुछ हुआ तो ठीक नहीं तो गोद ले लेगें बच्चा। अच्छा किसी दूसरे का बच्चा नहीं आएगा इस घर मे सावित्री जी जोर से बोली।
मुझे तो मेरे बेटे की ही औलाद चाहिए। अच्छा माँ ज्यादा शोर न मचाओ बच्चा बच्चा शांत रहो इलाज चलेगा लंबा और अपने उस ईश्वर पर भी भरोसा रखो देखो क्या होता है।
सावित्री जी मन मारकर बैठ गई। अब तो सावित्री जी बात बात मे स्नेहा को ताने मारने लगी। सोचने लगी अब तो मेरा खानदान अधूरा रह जाएगा, मेरा कोई वारिस नहीं होगा। लोगों को क्या मुहं दिखाऊगीं वगैरह वगैरह।
शिवम अक्सर माँ को डा़ट देता था माँ ये फालतू के डामे न करो। हम लोगो को परेशान न करो, आफिस का काम भी रहता है और तुम हो कि इतना टेशन दिए रहती हो हर समय बच्चा बच्चा। शांत बैठो जब होगा तब हो जाएगा और नहीं तो नहीं। बहुत से पति पत्नी है जिनके औलाद नहीं होती सावित्री जी चुप हो जाती लेकिन मन ही मन कुढती रहती। अब स्नेहा उनके एक आख् न सुहाती थी।
आज जब स्नेहा और शिवम डाकटर के पास गए तो डाकटर ने स्नेहा को एक खुशखबरी दी कि फ्रांस से एक डाकटर आई है वो ऐसे लोगों पर जिनके बच्चे नहीं हो रहे है उन पर ही रिसर्च कर रही है। और उस रिसर्च से कुछ उम्मीद भी जग रही है। मैंने उसमें तुम्हारा नाम दे दिया है। तुम दोनों को उनकी रिसर्च का हिस्सा बनना पडेगा वो जैसा कहैगी और जब जब बुलाएगीं तुम दोनों को आना पड़ेगा। अब स्नेहा और शिवम के भी तमाम तरह के टेस्ट और एक्सीपिरीमेंट होने लगे। दवाईयां भी दी जाने लगी, डाकटर जैसा कह रहे थे शिवम और स्नेहा वो सब कर रहे थे।
आज जब कई मिटिंग के बाद स्नेहा और शिवम डाकटर से मिले तो उन्होने खुशी की खबर दी कि स्नेहा कंसीव कर सकती है। लेकिन बहुत एहतियात की जरूरत है। जब तीन महीने हो गए तो शिवम ने माँ को बताया। सावित्री जी को विश्वास ही नहीं हो रहा था। वो बस उम्मीद ही छोड चुकी थी। लेकिन ये खबर एक नई उम्मीद की किरण लेकर आ रही थी सबके जीवन मे।
बहुत एहतियात और सावधानी बरतने के बाद आज स्नेहा ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया। सबकी खुशी का ठिकाना न रहा। सच मे दोस्तों आजकल कुछ भी असंभव नहीं है। सांइस ने इतनी तरक्की कर ली है कि कुछ भी हो सकता है। बस उम्मीद नहीं छोडना चाहिए। कोशिश जारी रखो तो सफलता मिलती है। उम्मीद का दामन कभी न छोडो़। और फिर कुछ दवा और कुछ दुआओं का भी तो असर होता है। दुआ करो तो ईश्वर सुनता जरूर है कभी न कभी है ना।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
13 मई