एक गांव में राजू अपनी मां राधा के साथ रहता था ।दोनों खेती करते थे कुछ दिनों बाद राजू की शादी उसकी मां ने सीमा से करा दी सीमा बहुत सुशील संस्कारी थी उसने घर को अच्छी तरह से संभाल लिया। सबका बहुत ध्यान रखती थी और अपनी सासू मां के साथ मिलकर पूरे दिन काम करती लेकिन घर के खर्चे बढ रहे थे ।राजू ने एक दिन अपनी मां से कहा मुझे अब शहर में नौकरी करने जाना पड़ेगा खेती-बाड़ी में इतना बचता नहीं है ।
ऊपर से मौसम की वजह से सारी फसल नष्ट हो गई है
मां ने कहा ठीक है बेटा तुम जाओ राजू शहर में नौकरी चल करने चला गया वहां से पहले तो शुरू शुरू में हर महीने घर में पैसे भेजता था लेकिन 6 महीने से ना उसने पैसे भेजे । और ना ही फोन पर बात की उधर सास बहू में बहुत प्यार था सीमा अपनी सासू मां का बहुत ध्यान रखती हो उनके साथ मिलकर खेत का काम भी करती थी।
एक दिन अचानक राजू ने फोन किया अपनी मां से कहा मां तुम सीमा को घर से निकाल दो मैं अब गांव में वापस कभी नहीं आऊंगा।
मैं शहर में अपनी नई जिंदगी शुरू कर दी है तलाक के पेपर भेज दूंगा तो सीमा से कह देना उसे साइन कर दे जब यह बात उनकी मां ने सुनी तो उनके पैरों के नीचे की जमीन फिसल गई
राधा कुछ नहीं बोली चुप रही लेकिन सीमा ने फोन पर सारी बात सुन ली और उसके बाद में पूरी रात रोती रही।
तब राधा जी ने कहा तू मेरी बहू नहीं है बेटा तू मेरी बेटी है राजू ने कहा मां से अगर तुम सीमा को अपने पास रखोगे तो मैं तुम्हारे पास कभी नहीं आऊंगा ।सीमा को घर से निकाल दो राधा जी ने कहा चाहे तुम आओ या ना हो लेकिन सीमा कहीं नहीं जाएंगे।
सीमा को कही नहीं जायेगी । सीमा भी अपनी सास के साथ रहने लगी गांव के लोग भी ताने देने लगे सीमा को रखने के लिए तुमने अपने बेटे को त्याग दिया राधा बोली वह मेरी बहू नहीं मेरी बेटी है।
एक दिन राजू ने तलाक की पेपर भेजे ।
सीमा ने साइन करके वापस भेज दिए। सीमा राजू का रिश्ता खत्म हो गया और सीमा को अनचाहे रिश्ते से आजाद हो चुकी थी।
राधा ने कहा जब तक मैं जिंदा रहूंगी और मेरे बाद सारी जमीन जायदाद की मालिक तू होगी राजू को इस गांव में कदम नहीं रखना दूंगी समय बिता गया दोनों सास बहू मेहनत करती।
ऐसा दिन आया कि जब राधा जी का अंतिम समय आया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने सीमा को अपने पास बुलाया और कहा बेटा मैं चाहती हूं कि मेरी चिता को अग्नि तू दे सीमा की आंखों में आंसू आ गए बोली मां यह फर्ज तो बेटे का होता है राधा ने कहा बेटा तो बहुत दिन पहले ही हमें छोड़ कर जा चुका है।
अब तू ही मेरा बेटा तू ही मेरी बेटी है कहते ही राधा ने अपने प्राण त्याग दिए
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि रिश्ते खून के रिश्ते महत्व नहीं रखते हैं रिश्ते दिल से बने होते हैं कभी-कभी अपने भी पराए जाते हैं और पराया भी अपनों से ज्यादा हो जाते हैं
विनीता सिंह (विनी)