आंसू – खुशी

लक्ष्मी एक सीधी साधी महिला थी।जिसकी शादी केशव से हुई ।जो अपने माता पिता की इकलौती संतान था।घर की जमीन घर  ससुर राजीव की सरकारी नौकरी सास नीला देवी ससुर साहब के हाथों का छाला जरा सा आंख में बाल भी आ जाए तो पूरा डॉक्टर की टीम खड़ी करदे।केशव बचपन से ही गुस्से का तेज था।पढ़ने में अच्छा था पर कुछ करना नहीं चाहता था क्योंकि उसे पता था कि मां बाप सब करेंगे।केशव एक कंपनी में जॉब करता था  जहां वो मालिकों की तरह जाता गाड़ी ऐश आराम वाली जिंदगी रुपया पैसा सीना चांदी सब था पर गुस्से में वो कुछ नहीं देखता था जब गुस्सा आता  तब वो आपे से बाहर हो जाता ।लक्ष्मी को मारता पीटता उसे उल्टा सीधा बोलता।लक्ष्मी का मायका भी अच्छा खाता पीता था।पिताजी सरकारी मुलाजिम थे दो चाचा चाची जो अच्छी नौकरियां करते थे।

मां गृहलक्ष्मी थी लक्ष्मी B.A कर चुकी थी ।शादी के दो साल तक बच्चे हुए नहीं। केशव का व्यवहार से वैसे भी  लक्ष्मी दुखी थी।पर  ससुर सास की इज़्ज़त पति का सम्मान मां बाप की सीख वो किसी को कुछ नहीं बताती उसने अपनी सास से पूछा मै आगे पढ़ना चाहती हूं। सास बोली पढ़ ले मुझे कोई परेशानी नहीं है लक्ष्मी ने हिंदी और संस्कृत में M.A किया फिर b.ed किया  और पास के ही एक स्कूल में अध्यापिका की जॉब ज्वाइन कर ली।

बीएड करते हुए ही लक्ष्मी को दिन ठहर गए थे तो बच्चे का सब उसकी मां ही करती थी।अब लक्ष्मी के भाई भी दोनों कमाने लगे थे। भाभियों वाला घर हो गया था परंतु लक्ष्मी का सारा खर्चा अभी भी मायके वाले ही उठाते थे। घर का साल का राशन कपड़ा लता सब लक्ष्मी के मायके वाले देते। लक्ष्मी अब दो बच्चों की मां बन गई थी।

बच्चे भी स्कूल जाने लगे उनका जितना खर्च वो उठा पाती वो करती क्योंकि केशव को कहने से कोई फायदा नहीं था वो कमाता था पर लक्ष्मी की जरूरत पूरी नहीं करता। बच्चों की कभी कभी जरूरतें पूरी करता वरना वो भी नहीं।फिर अचानक वो कंपनी बंद हो गई और केशव घर बैठ गया। पीता मार पीट करता और सब बातों का इल्ज़ाम वो लक्ष्मी को देता कि तू मनहूस है मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी तूने पता नहीं क्या क्या। एक दिन लक्ष्मी स्कूल से आई तो केशव और उसके सास ससुर बैठे थे उसके आते ही केशव चिल्लाया आ गई अपने यार से मिलकर तू आवारा है क्या कह रहे हो केशव मै तुम्हारी पत्नी हूँ।क्या बात कर रहे हो।सास भी बोलने लगी हा पड़ोसी भी कहते है ये आदमियों  से बात करती है। हंसती है बोलती है इसे घर से निकाल और केशव ने उसे धक्के मार घर से निकाल दिया।

वो अपने मायके आ गई कुछ दिन बाद सास ससुर और लक्ष्मी के माता पिता और भाईयों के बीच बचाव से लक्ष्मी वापस आ गई उसने नौकरी छोड़ दी ।अब वो घर रहती घर का सारा खर्चा सास ससुर चल।ते ससुर राजीव ने घर में ही एक डिपार्टमेंटल स्टोर खोल रखा था तो सारा राशन वही से हो जाता।लक्ष्मी को एक एक रुपए के लिए सबके सामने हाथ फैलाना पड़ता और मिलती ज़लालत ।लक्ष्मी के पड़ोसी थे माधव जो दूर के रिश्ते में लक्ष्मी के देवर लगते थे।उनके स्कूल में अध्यापिका की जरूरत थी। उन्होंने राजीव जी से पूछा कि भाभी नौकरी करेंगी अब सबके सामने क्या मना करते उन्होंने हा कर दी।लक्ष्मी फिर स्कूल जाने लगी बच्चों का खर्चा निकल जाता।

पर केशव में कोई सुधार नहीं था।एक दिन वो कही किसी काम से गया था वापसी आते हुए उसका एक्सीडेंट हो गया । कोविड का समय था बड़ी मुश्किल जान बची केशव की चोट बहुत लगी थी। लक्ष्मी ने जी जान से सेवा की और उसे फिर चलने फिरने लायक बनाया।ठीक होते ही फिर केशव का वही सब शुरू हो गया। लक्ष्मी घर देखती स्कूल देखती सब करती पर केशव के प्यार के दो बोल के लिए तरसती।मार बेज़्जती यही उसकी किस्मत थी।

मायके वाले साथ देते थे बस इसलिए सब चल रहा था।एक दिन तो घर में इतना झगड़ा हुआ कि सास ससुर अपने दूसरे घर चले गए यह बोल की अपना खर्चा खुद उठाओ ।बच्चे बड़े हो रहे थे खर्चे बढ़ रहे थे।जरूरतें पूरी करने के लिए कितना लक्ष्मी मांगती मायके वालों से लक्ष्मी के सास ससुर सिर्फ लक्ष्मी को बोलते पर बेटे को कभी नहीं कहते कि काम कर। लक्ष्मी परेशान हो रही थी आस पड़ोस वालों को भी सास ससुर उसके बारे में उल्टा सीधा बोलते।बच्चों के कारण वो सब सह रही थी। राजीव और नीला केशव को बच्चों को खाना खिलाते पूछते पर लक्ष्मी के साथ ऐसा व्यवहार करते जैसे वो जबरदस्ती उनके घर में रह रही हो।  अपनी कोई गलती ना होते हुए भी करवाचौथ के दिन लक्ष्मी नीला को  मन।ने गई ।

पर राजीव और नीला ने  उसे दुत्कार कर भगा दिया।सब लोग कहते तुमने इस बुढ़ापे में उन्हें घर से निकाल दिया।दुकान भी बंद कर दी अब तो एक एक चीज लक्ष्मी खरीद कर लाती।बेटा कॉलेज के 2 साल में था और बेटी ने 12 वीं की परीक्षा दी थी।बेटी को तो नानी नाना ले गए कि कुछ दिन हमारे साथ रहेगी।बेटा मनन, केशव  और लक्ष्मी  घर पर थे।लक्ष्मी की जिंदगी नरक से बदतर हो रही थी।केशव बेटे के सामने उसके चरित्र की धज्जियां उड़ाता पर वो लड़ाई ना बड़े इस कारण चुप रहती।एक दिन केशव बहुत पी कर घर आया और सारा खाना फेंक दिया ।

फ्रिज में से सब सामान निकाल कर फेंक दिया गैस का सिलेंडर निकाल दिया।मेरा है में लाया हूं तू निकल यहां से आज लक्ष्मी फट पड़ी मेरा कसूर क्या है।22 साल हो गए सहते सहते तू सह रही है मै सह रहा हूं।तू मेरी पसंद नहीं थी मैं सीमा को चाहता था पर तू मेरे गले बांध दी।मनहूस मेरी खुशियां खा गई।मेरी सीमा मुझसे दूर हो गई।तो तुमने तब क्यों नहीं मना किया कि शादी नहीं करनी फिर क्यों कि अरे ये बुड्ढा बुढ़िया कहा तैयार थे राजीव को देखते हुए लक्ष्मी बोली आपको पता था फिर क्यों कि आपने शादी।नीला चिल्लाई तू 22 साल में इसे अपना नहीं बना पाई  तुझमें कमी है ना घर चला पाई ना पति को अपना बना  पाई तेरी वजह से मेरे बेटे की गृहस्थी खराब हो गई।तीनों जाने क्या क्या बोलते रहे फिर केशव आगे आया लक्ष्मी को मारा और हाथ पकड़ घर से बाहर निकाल दिया।मनन ने कहा पापा ऐसा मत करो तो उसे अंदर कर दरवाजा बंद कर दिया।लक्ष्मी लड़खड़ाते हुए उठी और एक ऑटो में बैठ अपने घर आ गई।

लहूलुहान हालत में उसने दरवाजा खटखटाया तो उसका बड़ा भाई अंगद था वो लक्ष्मी को देख चिल्लाया सब घर वाले बाहर आ गए छोटे भाई अर्जुन ने ऑटो वाले को पैसे दिए और चलता किया ।लक्ष्मी को अंदर ला कर पड़ोस से चाचा के बेटे को बुलाया जो डॉक्टर था उसने मालहमपट्टी की और लक्ष्मी को सुला दिया।मनन का फोन आया मां पहुंच गई ।हा पर हुआ क्या अर्जुन ने पूछा ।मनन बोला झगड़ा हुआ था और फोन रख दिया।रात भर सब परेशान बैठे थे।दवाई का असर खत्म हुआ तो लक्ष्मी जागी और फूट फूट कर रोने लगी सारी बात बताई।

अंगद बोला तू इतने साल ये मार पीट सहती रही ।चल पुलिस स्टेशन चल अभी सबको जेल की हवा खिलाता हूं।लक्ष्मी और उसके पिताजी के समझाने पर वो शांत हुआ पर अंगद ने कह दिया अब ये नहीं जाएगी जिसने मेरी बहन को खून के आसू रुलाए है वो भी भुगतेगा।।लक्ष्मी अपने मायके में रहने लगी स्कूल की नौकरी वो करती थी ट्यूशन भी पढ़ाने लगी ।बेटी का कॉलेज में एडमिशन हो गया।लक्ष्मी मनन को बुलाती रही वो नहीं आया या उसे केशव ने आने नहीं दिया।हर बार मनन यही कहता तुम घर आ जाओ । माफी मांग लो सब तो है घर जायदाद पैसा फिर क्यों वहां पड़ी हो।इस झगड़े में तीन साल बीत गए।लक्ष्मी की बेटी पूजा का ये लॉ का आखिरी साल था उसने एक दिन मनन की सारी बातें सुन ली और बोली तुझे शर्म नहीं आती मां के स्वाभिमान सम्मान की जगह तू जमीन जायदाद को तरजीह दे रहा है वो सब दादी दादा का है।

यही देख नाना नानी ने शादी की तुझे अपनी मां के सम्मान की कोई परवाह नहीं ।पूजा ने अपने दादी दादा और पापा के खिलाफ केस डाल दिया जो वो जीते सास ससुर बार बार लक्ष्मी से कहते रहे केस वापस ले ले घर आ जा।पूजा बोली मेरी मां के आसू का हिसाब तो इन्हें देना होगा।आज पूजा एक बड़ी वकील है।लक्ष्मी के कहने के कारण सब छूट गए पर मनन उसी जायदाद के लालच में वही पड़ा रहा पूजा अपनी मां के साथ एक खुशहाल जिंदगी जी रही है।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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