रुद्र के माता-पिता ने बड़े शोक के साथ उसे पढ़ाया लिखाया । इस काबिल बनाया कि वह इस समाज में अपना तथा उनका नाम रोशन करें। तकदीर ने साथ दिया और रुद्र अब एक अध्यापक बन गया ।माता-पिता उसकी तरक्की से काफी खुश थे। जिंदगी आगे बढ़ रही थी ।रुद्र अपनी मेहनत से अपने अध्यापन कार्य को निभा रहा था। उसके अध्यापन की कला से लोग काफी प्रभावित थे। उसके आगे पढ़ने वाले बच्चे भी काफी खुश थे। समय बीतता गया और रुद्र की गिनती एक अच्छे अध्यापकों में की जाने लगी। रुद्र की उम्र अभी 23- 24 वर्ष की थी। उसकी अभी शादी नहीं हुई थी ।
माता-पिता उसकी शादी के लिए अभी सोच ही रहे थे ।रुद्र रोजाना घर से बस पकड़ कर विद्यालय जाया करता। उसी बस में शाम को अपने घर पर आ जाया करता ।जिस बस से वह घर से निकलता था ।आधे रास्ते में उसी बस में उसके आगे पढ़ने वाले बच्चे भी इस बस में उसके साथ विद्यालय जाया करते ।रूद्र को कई बार बस में बैठने की जगह न मिलती तो उसके आगे पढ़ने वाले बच्चे उसे सीट दे दिया करते और खुश होते कि वह अपने अध्यापक को बैठने के लिए जगह दे रहे हैं। रुद्र भी इस बात पर बहुत खुश होता कि उसके छात्र उसकी इज्जत मान करते हैं ।
समय बीतता गया और 5 साल बाद रुद्र जैसे रोजाना बस में सफर करता था वैसे ही इस बस में सोनू नाम की लड़की जो उसके आगे पढ़ती थी। उम्र में अभी 17 -18 वर्ष की थी ।वह भी उसे बस में सफर किया करती थी ।कई बार रूद्र उसे बैठने के लिए जगह दे देता। सोनू पढ़ने में काफी होशियार थी। रुद्र उसकी काफी मदद करता ।धीरे-धीरे दोनों में नजदीकियां बढ़ने लगी ।सोनू बाली उमर के प्रभाव से मन ही मन में अपने अध्यापक रुद्र से प्यार करने लगी। कहीं ना कहीं रुद्र भी इस प्यार से दूर न रह सका और बहुत जल्दी वह भी उसे बहुत पसंद करने लगा।
सिलसिला आगे बढ़ने लगा ।दोनों घंटो एक दूसरे पर फोन के माध्यम से बातें करते हैं। ना ही रुद्र के घर वालों को इस विषय में पता था। ना ही सोनू के घर वालों को इसके बारे में कोई जानकारी थी ।परंतु दोनों ने मन ही मन में एक दूसरे को अपना मान लिया था ।उन्हें जमाने की कोई परवाह नहीं थी ।अब रुद्र और सोनू एक दूसरे से दूर नहीं रह सकते थे। दोनों को इस रिश्ते में कोई भी गलत चीज नजर नहीं आती थी। फिर एक समय ऐसा आया कि रूद्र ने अपने घर में उसके अपने माता-पिता को सोनू के विषय में सब कुछ बता दिया। माता-पिता ने कोई भी आश्चर्य जाहिर नहीं किया और वह सोनू से रुद्र की शादी के लिए तैयार हो गए। उधर सोनू ने भी अपने माता-पिता को रुद्र के बारे में बता दिया।
सोनू के पिता ने विरोध किया परंतु सोनू की माता ने जिद की ।उन्हें रुद्र पूरी तरह पसंद है और वह चाहती है कि दोनों की शादी हो जाए। सोनू के पिता की एक न चली और दोनों परिवार शादी के लिए राजी हो गए ।इसी बीच रुद्र की नौकरी किसी कारणवश चली गई। अब रुद्रा किसी और स्कूल में पढ़ाने के लिए चला गया। उधर सोनू ने भी अपनी शिक्षा पूर्ण कर ली ।फल स्वरुप दोनों की शादी कर दी गई। समय आगे बढ़ता गया। शुरू में सब कुछ ठीक रहा ।दोनों अपनी जिंदगी से काफी खुश थे। परंतु जैसे-जैसे समय बीतता गया ।आसपास के लोग और रुद्र के शिष्य ,उसके आगे पढ़ने वाले बच्चे उसके विषय में तरह-तरह की बातें बनाने लगे। यहां तक की रुद्र के साथ पढ़ाने वाले अध्यापक भी कई बार मुंह पर उसे कह जाते कि आपने अपने शिष्य के साथ ही शादी कर ली है।
रुद्र कहीं ना कहीं उस समय यह तो जवाब दे देता कि उसने उसे धोखा नहीं दिया बल्कि उसके साथ जिंदगी निभाने का वादा पूरा किया है। परंतु कहीं ना कहीं रूद्र घर जाकर जब इस विषय पर विचार करता तो वह अपने निर्णय में कहीं ना कहीं पूरी तरह से कमी पाता। स्वयं से जब इस बार विषय में पूछता कि क्या उसने सही किया है? तो उसका मन हमेशा उसे यह कहता कि उसने बिल्कुल गलत किया है ।परंतु रुद्र फिर भी अपने मन को संभाल कर अपने इस रिश्ते को अच्छे से निभाने की पूरी कोशिश करता। सोनू को किसी भी प्रकार की कोई कमी ना आने देता। वह उसकी शिक्षा को काफी उच्च स्तर तक पहुंचाने के लिए दिन-रात एक कर देता है ।उसे इतनी शिक्षा दिलाता है कि कहीं ना कहीं सोनू के माता-पिता भी इस बात से बहुत खुश होते हैं। परंतु जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है। रुद्रा का मन इस बात को पूरी तरह पचा नहीं पता है कि उसने सही किया है। समय बीतता जाता है और सोनू रुद्र की बेटी को जन्म देती है। बेटी बड़ी हो जाती है और कई बार वह पिता से पूछता है। पिताजी क्या आपने मेरी माता जी को पढ़ाया है? क्या वह आपकी शिष्य थी? क्या आपने अपनी ही शिष्या से शादी कर ली? क्या यह पूर्ण रूप से सत्य है ?
कहीं ना कहीं रुद्र कई बार इस बात को टाल जाता और इस बात को टालकर किसी और बात को छेड़ देता। परंतु अब वह पूरी तरह बेचैन रहने लगा और वह इस कुंठा से अंदर ही अंदर घुटने लगा। आ- जाकर उसके मन में एक ही विचार आता कि भले ही वह जितना मर्जी कुछ कर ले ।परंतु जो उसने किया है ।अतः अपनी ही शिष्या से शादी की है। यह एक बहुत बड़ा कलंक है और यह कभी ना मिटेगा। अब रूद्र जानता था कि जीवन में उसे जो भयंकर भूल हुई है। उसका पश्चाताप भी वह नहीं कर सकता। इस जन्म में उसे इस कलंक के साथ ही जीना पड़ेगा और अब उसे अगले जन्म का इंतजार करना होगा। अगर कहीं वह होता है तो ।किसी ने सच कहा है कि पढ़ा लिखा होना ही जरूरी नहीं होता। समय पर सही निर्णय ,सही सोच के साथ लेना बहुत आवश्यक होता है। जो रूद्र कभी भी नहीं ले सका। उसकी पल भर की गलती ने उसे बरसों की सजा दी है। अब वह जिंदगी को चुपचाप आगे काट रहा है ।आए दिन उसके आगे बस यही प्रश्न आता है कि यह वह कलंक है जो कभी ना मिटेगा। धन्यवाद लेखक:
संजय सिंह।