बारिश की बूंदें कांच की बड़ी-बड़ी खिड़कियों पर टकरा रही थीं। शहर के सबसे पॉश इलाके में बना ‘मल्होत्रा विला’ बाहर से जितना भव्य और खूबसूरत दिखता था, आज अंदर से उतना ही शांत और सर्द महसूस हो रहा था। इटालियन मार्बल से सजे उस विशाल ड्रॉइंग रूम में बैठी नंदिनी के हाथ में कॉफी का मग था,
लेकिन उसकी नज़रें कहीं शून्य में खोई हुई थीं। तभी दरवाजे की घंटी बजी और उसकी छोटी बहन रिया अंदर आई। रिया के चेहरे पर बारिश में भीगने की वजह से एक ताज़ा और सच्ची मुस्कान थी। वह दौड़कर अपनी बड़ी बहन के गले लग गई।
नंदिनी ने मुस्कुराते हुए रिया का माथा चूमा और उसे सोफे पर बिठाया। रिया की नज़र तुरंत नंदिनी के चेहरे पर गई। नंदिनी ने हमेशा की तरह बेहद सलीके से मेकअप किया हुआ था। उसकी रेशमी साड़ी, हीरे के झुमके और चेहरे की चमक किसी मैगज़ीन के कवर पेज जैसी लग रही थी। रिया ने कुछ तस्वीरें खींचीं और चहकते हुए बोली, “दीदी,
आपकी और जीजाजी की कल रात की एनिवर्सरी पार्टी की तस्वीरें फेसबुक पर क्या तहलका मचा रही हैं! हर कोई लिख रहा है ‘परफेक्ट कपल’, ‘मेड फॉर ईच अदर’। सच में, आपकी जिंदगी तो किसी सपनों की दुनिया जैसी है। काश, मेरी किस्मत भी आपके जैसी होती।”
रिया की बात सुनकर नंदिनी के होठों पर आई मुस्कान अचानक कहीं गायब हो गई। उसकी आँखों में एक अजीब सी नमी तैर गई, जिसे वह अक्सर दुनिया से छुपा ले जाती थी, लेकिन अपनी छोटी बहन से नहीं छुपा पाई। उसने अपना कॉफी का मग टेबल पर रखा और गहरी सांस लेते हुए रिया का हाथ अपने हाथ में ले लिया।
“सपने और हकीकत में बहुत फर्क होता है, रिया,” नंदिनी की आवाज़ में एक अजीब सा भारीपन था। उसने धीरे से अपने चेहरे के बायीं तरफ, कान के ठीक नीचे से अपने बालों को हटाया। वहां मेकअप की एक मोटी परत के बावजूद एक हल्का नीला और लाल निशान उभर कर दिख रहा था। रिया की आँखें फटी की फटी रह गईं।
“दीदी… ये क्या है? ये निशान कैसा है? क्या जीजाजी ने…” रिया के गले में जैसे कांटे चुभने लगे। वह अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई।
नंदिनी ने एक फीकी सी हंसी हंसते हुए कहा, “हाँ रिया, ये उसी ‘परफेक्ट कपल’ की निशानी है जिसकी तस्वीरें देखकर दुनिया आहें भरती है। ये महंगे फाउंडेशन, ये कंसीलर और ये ब्रैंडेड कपड़े, ये सब सिर्फ मेरे शरीर के घावों को छुपाने के काम आते हैं। मैं हर रोज़ आईने के सामने खड़ी होकर अपने चेहरे के इन नीले-काले निशानों को मेकअप से पोतकर इस आलीशान घर की ‘मिसेज मल्होत्रा’ बन जाती हूँ। लेकिन सच तो ये है कि मेरी रूह पर जो चोटें लगी हैं, उन्हें छुपाने के लिए आज तक कोई मेकअप नहीं बना।”
रिया अवाक रह गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे। जिस जीजाजी को पूरा शहर एक सफल, शांत और आदर्श इंसान मानता था, उनकी असलियत इतनी भयानक हो सकती है, यह उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
नंदिनी की आँखों से अब आंसू बहने लगे थे, जो उसके महंगे मेकअप को बिगाड़ रहे थे, लेकिन आज उसे इसकी कोई परवाह नहीं थी। “पैसा, ये गाड़ियां, ये नौकर-चाकर… ये सब किस काम के रिया? जब रात को तुम्हारे बेडरूम का दरवाज़ा बंद होता है और तुम्हारा पति तुम्हें एक इंसान की तरह नहीं, बल्कि अपनी जागीर समझता है। कल रात की पार्टी में सिर्फ इसलिए क्योंकि मैंने उनके एक बिजनेस पार्टनर से दो मिनट ज्यादा बात कर ली थी, उन्होंने मुझे कमरे में ले जाकर बेल्ट से मारा। और फिर सुबह उठकर मुझे ये नौ लाख का हीरों का हार पहना दिया, ताकि मैं रात की बात भूल जाऊं और उनके साथ मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवा सकूं।”
कमरे में एक भारी सन्नाटा छा गया। सिर्फ बाहर गिरती बारिश की आवाज़ आ रही थी। रिया ने अपनी बहन को कसकर गले लगा लिया और फूट-फूट कर रोने लगी।
नंदिनी ने रिया के आंसू पोंछते हुए कहा, “तुझे याद है रिया, जब तूने समीर से शादी करने का फैसला किया था? पापा कितने नाराज़ हुए थे। भैया ने तो यहाँ तक कह दिया था कि समीर एक मामूली सी सरकारी नौकरी करता है, वो तुझे क्या खुश रखेगा। मैंने भी तुझे बहुत समझाया था कि प्यार-व्यार से पेट नहीं भरता, इंसान का रुतबा और बैंक बैलेंस देखा कर। लेकिन आज मुझे समझ आ रहा है कि तूने कितना सही फैसला लिया था और हम सब कितने गलत थे।”
नंदिनी की आँखों में अब एक पछतावा था। “समीर के पास शायद तुझे पहनाने के लिए हीरे नहीं हैं, तुम लोग शायद हर महीने विदेश घूमने नहीं जाते, लेकिन मैंने देखा है कि समीर तेरी कितनी इज्जत करता है। वो तेरी आँखों में आंसू नहीं देख सकता। जब तुम दोनों उस छोटे से टू-बीएचके फ्लैट में एक साथ चाय बनाते हो, तो जो सुकून तुम्हारे चेहरों पर होता है, वो इस करोड़ों के बंगले में मुझे एक पल के लिए भी नसीब नहीं हुआ। मुझे खुशी है रिया कि तूने हमारी बात नहीं मानी। तूने अपनी पसंद से शादी की। समीर और उसके परिवार वाले तुझे एक बेटी की तरह प्यार देते हैं, तेरा सम्मान करते हैं। एक औरत को जिंदगी जीने के लिए महलों की नहीं, बल्कि इसी प्यार और सम्मान की जरूरत होती है।”
रिया सुबकते हुए बोली, “दीदी, तो फिर आप ये सब क्यों सह रही हैं? आप क्यों नहीं छोड़ देतीं ये खोखली जिंदगी? आप पढ़े-लिखे हो, पापा के पास वापस आ जाओ। हम सब आपके साथ हैं।”
नंदिनी ने एक सर्द आह भरी। “इतनी आसान नहीं होती चीजें। पापा का समाज में इतना नाम है, मेरी इस शादी से उनके बिजनेस को कितना फायदा हुआ है, ये बात तू नहीं जानती। जब मैं पिछली बार घर आई थी रोते हुए, तो पापा ने ही कहा था कि ‘बेटा, बड़े घरों में थोड़ा बहुत एडजेस्ट करना पड़ता है। घर की बात बाहर जाएगी तो समाज क्या कहेगा?’ समाज का ये डर और इस झूठी शान का पर्दा ही मेरी सबसे बड़ी बेड़ियां हैं। सोशल मीडिया पर जो तू ये हंसती-मुस्कुराती तस्वीरें देखती है न, ये मेरी खुशी का सबूत नहीं हैं, ये मेरे जिंदा होने का झूठा प्रमाण पत्र हैं। इन तस्वीरों के पीछे का घुटन भरा दर्द किसी को नहीं दिखता, कोई देखना भी नहीं चाहता।”
रिया ने उस दिन अपनी बहन को एक नई नज़र से देखा। उसने महसूस किया कि असली गरीबी पैसों की नहीं, बल्कि प्यार और सम्मान की होती है। और असली अमीरी वो है जब आप रात को बिना किसी डर के, एक सुकून की नींद सो सकें। दोनों बहनें देर तक एक-दूसरे के गले लगकर रोती रहीं। उस आलीशान विला की दीवारें आज उनके आंसुओं की मूक गवाह बन रही थीं, और बाहर की बारिश शायद नंदिनी के दिल में लगी आग को बुझाने की एक नाकाम कोशिश कर रही थी।
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दोस्तों, हमारे समाज में आज भी बेटियों की शादी करते वक्त लड़के का बैंक बैलेंस और घर का आकार पहले देखा जाता है, और उसका चरित्र बाद में। क्या आपको नहीं लगता कि एक सफल शादी की बुनियाद पैसे पर नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और प्यार पर टिकनी चाहिए? इस कहानी के बारे में आपके क्या विचार हैं?
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