सोहम अपने दोस्तों के साथ गली के मोड़ पर खड़े होकर लगातार बाइक का हॉर्न बजाता रहा, “नव्या
अपने छोटे भाई का हाथ कसकर पकड़ते हुए बिना इधरउधर देखे, तेज कदमों से घर की ओर जाने
लगी।”
क्या यार, इतनी मेहनत करने का… आधा घंटे तक तो इस चिलचिलाती धूप में खड़े, इंतजार करते रहे और
इन मोहतरमा ने तुझे एक नजर भर कर भी नहीं देखा।
देखेगी, देखेगी एक दिन ये भी अपनी बाहों में आयेगी, इंतजार का मजा कुछ और ही होता हैं। अभी ये
मुझे जानती नहीं हैं, जिस दिन इसे पता चलेगा कि मैं कितने धनवान बाप की औलाद हूं, तू देखना, पैसों
की डोर से ये मेरी ओर खिंची चली आएगी। सोहम,अपने हाथों से पतंग के मांझे को खींचने की एक्टिंग
करने लगा, जिसे देखकर उसके दोस्त जोर-जोर से हंसने लगे।
सोहम के पिता उस शहर के बहुत प्रतिष्ठित बिजनेसमैन थे और सोहम उनका इकलौता लड़का…उसे
बिगाड़ने में उन्होंने कोई कसर छोड़ नहीं रखी थी। शहर में उनका इतना दबदबा था कि कोई सोहम की
तरफ उंगली भी नहीं उठा सकता था।
दीदी, आप कहो तो मैं पुलिस से इनकी शिकायत कर दूं। जब वे आपको परेशान करते हैं, तो मुझे अच्छा
नहीं लगता।
अपने छोटे भाई आर्यन की अपने प्रति “ चिंता देखकर नव्या को हंसी आ गई।
अभी रुक जा…बस दो दिन की बात हैं, इसके बाद…
तीन चार दिन, सोहम रोज उस गली के मोड़ पर अपने दोस्तों के साथ आता, पर नव्या घर से बाहर नहीं
निकली।
क्या यार, उस दिन इतना डर गई कि अभी तक घर में ही छिपी हुई है।
अरे कभी तो बाहर आएगी, बस इस बार हाथ पकड़कर अपने दिल की बात कह दूंगा।, “सोहम अकड़कर
बोला”
फिर से सारे दोस्त जोर-जोर से हंसने लगे।
एकाएक, सोहम का दोस्त बोला, वो देख, तेरी महबूबा का सिपहसालार आ रहा हैं। इसी से पूछते हैं।
और भई, छुटकुराम, तुम्हारी दीदी कहां हैं? बहुत दिन हो गए, दिखाई नहीं दे रही।
मेरा नाम छुटकुराम नहीं आर्यन हैं। मेरी दीदी का आई. पी. एस. में सिलेक्शन हो गया है, और वे अपनी
ट्रेनिंग पर गई हैं। और कुछ पूछना हैं, या मैं जाऊं…
आर्यन का जवाब सुनकर सोहम टका सा मुंह लेकर रह गया, साथ ही उसके दोस्तों के चेहरे भी उतर गए।
स्वरचित एवं मौलिक भाव
अपर्णा गर्ग
(नोएडा)
दिनांक 25-03- 2025