बशीर मिया 65 के हो चले हैं पर काम करना नहीं छोड़ा सरकारी नौकरी थी 58 मे पटवारी के पद से रिटायर्ड हो गये थे । पर उनका मानना था कि जब तक उपर वाले कि बुलावा न आ जाये तब तक आदमी को हाथ पैर हिलाते रहना चाहिए पैसे की दरकार न हो त भी पारिश्रमिक के साथ कार्य करना चाहिए ।
नाती पोतो से घर आबाद था किसी बात की कोई कमी न थी बशीर मियां पांचों वक्त के नमाजी हैं पर मुहल्ले के गणेश दुर्गा गौरी गौरा का सोटा खाए बिना उनका मन न भरता हैं । 65 के उम्र में भी कापती हाथों के साथ सोटा खाने के लिए हाथ खड़ा कर देते । बच्चे कहते ही रह जाते ते राहन दे ना बड़े ददा मुहल्ले के लोग उसे बड़े ददा (बड़े पापा ) कह कर संबोधित करते हैं ।
रिटायर्ड होने बाद क्या करतें एक बड़े सेठ डागा जी के यहा काम में लग गये बड़े सेठ थे तो जमीन कुछ न कुछ काम लगा रहता हैं बड़े लगन और अनुभव के साथ उनके जमीन संबंधी नापजोख और सरकारी काम को निपटाने में लगे रहते थे । सेठ जी भी उनके उम्र और अनुभव को काफी सम्मान देते हमेशा पटवारी साहब के संबोधन के साथ कहते
जंजगीरी के जमीन के नाप जोख अउ खसरा ला दुरूस्त करा देतेस कह कर सम्मान जनक तरीके से आदेशित करते । हव सेठ जी कहते हुए बशीर मियां भी काम में लगे रहते । बशीर मियां को काम भी क्या समय पास करते हुए करते काम ही इतना न था की हटर हाय करते । एक दिन बशीर मियां आफिस पहुंचे ही थे
कि सेठ जी के पुत्र आफिस पहुंचे और बशीर मियां को जूते की तरफ इशारा करके पालिश करवा लाने को कहा । बशीर मियां भी मिनट भर तो देखते ही रहे उसके बाद पास के मोची के पास से पालिश करवा कर सेठ जी के पुत्र को दे दिए । बशीर मियां के लिए ये आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाली बात थी ।
3-4 दिन जब बशीर मियां आफिस नहीं गये तो सेठ जी ने फोन घुमाया और बशीर मियां से पूछा कइसे आफिस नई आत हस पटवारी साहब तबियत पानी तो ठीक हाबे न,
बशीर मियां अब उमर हो चले हे सेठ जी आत्मसम्मान के घाव जरा गहरा लगथे कहकर थोड़े भारी आवाज में बोले इससे ज्यादा कुछ न कह सके और फोन रख दिया । बाद में सेठ जी कई बार बुलाते रहे पर हर बार यही कहते अब उमर होगे सेठ जी काम नई हो सके ।
आप रिटायर्ड व्यक्ति हैं तो अनुभव का खज़ाना हैं आपके पास प्राईवेट नौकर आपने जिंदगी भर नहीं की हैं प्राईवेट नौकरी कर रहे हैं तो आत्मसम्मान के साथ करे ।
प्रवीण सिन्हा
रामकुण्ड पारा रायपुर