यह भी तो शहादत ही है!! – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैऔर क्लास में उपस्थिति इतनी कम..!! प्रभास सर आप क्लास टीचर हैं ध्यान क्यों नहीं देते ??प्रिंसिपल शाश्वत जी ने क्लास में घुसते ही टोका।

सर मेरी सुनते ही कहां हैं …दो बारहवी के छात्र हैं सर पूरी क्लास में आतंक मचाए रहते है किसी को पढ़ने नहीं देते ना ही पढ़ाने देते हैं शिक्षकों के डांटने पर मार डालने की धमकी देते हैं प्रभास जी ने धीमे स्वर में बताया।

और आप सब डर जाते हैं कैसे डरपोक शिक्षक हैं अपने विद्यार्थी की गलत हरकतों के विरुद्ध आवाज उठाने …अनुशासन कायम करने के बजाय हथियार डाल देते हैं।हद है पानी सिर से ऊपर बह रहा है और आप हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं उनके अभिभावकों से संपर्क कीजिए बुलाईये उन्हें स्कूल में मै बात करूंगा शाश्वत जी बहुत चिंतित हो उठे थे।

सर फोन कोई उठाता ही नहीं लड़कों ने गलत नबर दे रखा है मै तो पता करके उनके घर भी गया था अभिभावक उल्टे हमीं को भला बुरा कह रहे थे कि स्कूल तो रोज जाता है अब आपही लोगों की जिम्मेदारी है…!!प्रभास जी आक्रोश में थे।

आपने मुझे क्यों नहीं बताया इतना सब कुछ हो गया।

सर ये दोनों लड़के सुधरने वाले नहीं है आपराधिक प्रवृत्ति के हैं क्लास में नहीं रहते स्कूल के बाहर तमाशा करते हैं।कुछ टोकने पर धमकी देते हैं हमारा भी तो घर परिवार है सर।आपके साथ भी कोई अवांछनीय हरकत कर सकते हैं।रहने दीजीये सर कुछ बाते सरकारी नौकरी में अवॉइड कर देना चाहिए हम लोग इन लड़कों को नहीं सुधार सकते प्रभास जी ने समझाते हुए कहा।

वे हमारे विद्यार्थी है प्रभास जी क्या हम उनकी धमकियों से डर जाएंगे मैं अभी पुलिस को सूचित करता हूं।

हेलो जी सर स्कूल में दो छात्र सबको खुलेआम धमकी देते हैं आप लोग स्कूल आ जाइए उन लड़कों पर कार्यवाही कीजिए शाश्वत जी फोन पर कह रहे थे।

सर ये तो आपके स्कूल के अनुशासन का मामला है ।क्या कोई अपराध या वारदात लड़कों ने किया  है ??जब ऐसा कुछ होगा तब बताइएगा तभी कोई कार्यवाही की जाएगी पुलिस थाने का जवाब शाश्वत जी को खौला गया था।

सही तो कहते है ये हमारे स्कूल के अनुशासन पर प्रश्नचिन्ह है।प्रभास जी..आप अभी बुलाइए उन दोनों को… !! शाश्वत जी गुस्से में थे।

प्रभास को खामोश देख घंटी बजा कर चपरासी को बुलाया।

रामसिंह जाओ इन दोनों लड़कों को बुलाकर लाओ।

सर रहने दीजिए प्रभास जी ने फिर आपत्ति की।

बताइए सर हमसे क्यों मुलाकात करना चाह रहे हैं अचानक वे दोनो लड़के बेहयाई से हंसते सामने खड़े हो गए।

ये कौन सा सभ्य तरीका है ये प्रिंसिपल कक्ष है अनुमति लेकर आना चाहिए था जाओ बाहर जाओ और फिर से पूछ कर प्रवेश करो शाश्वत जी ने नाराजगी से कहा।

देखिए जो कहना चाहते है जल्दी से कहिए ये सभ्यता का पाठ पढ़ाने के लिए बुलवाए हैं क्या दोनों  ढीठता से कह उठे।

देखो तुम दोनों की उपस्थिति कम है प्राइवेट हो जाओगे तुम लोग स्कूल आते हो तो क्लास में बैठकर पढ़ते क्यों नहीं बदमाशी क्यों करते हो  दूसरे लड़कों को तंग करते हो शिक्षकों से बदतमीजी करते हो ।कान खोल कर सुन लो अनुशासन में रहना पड़ेगा नहीं तो नाम खारिज कर दूंगा…..समझे..!शाश्वत जी उनके असभ्य आचरण से आगबबूला हो गए।

नाम खारिज करके तो देखिए आपका राज नहीं है कि अपनी मनमानी करेंगे ..!

उद्दंड अभद्र प्रत्युतर शाश्वत जी को तिलमिला गया।

प्रभास जी अभी इन दोनों के अभिभावकों को बुलाइए और इनकी  टीसी काटिए.. गुस्से से कांपतेहुए प्रिंसिपल कुर्सी से खड़े हो गए और अपना मोबाइल निकाल कर पेरेंट्स का नंबर डायल करने लगे।

दोनों लड़के ने एक दूसरे की तरफ इशारा किया और फुर्ती से रिवॉल्वर निकालकर प्रिंसिपल के झुके हुए सिर पर लगा दी और गोलियां दाग दीं जब तक कोई समझ बूझ पाता प्रिंसिपल शाश्वत जी जमीन पर ढेर हो गए थे।

दोनों लड़के खुशी से डांस करने लगे… प्रभास जी को काठ मार गया था।

होश आते ही उन्होंने पुलिस को फोन लगाया स्कूल आने के लिए कहा एंबुलेंस को फोन लगाया।

आज वारदात हो जाने के बाद …पुलिस ने स्कूल आने की उनकी बात मान ली थी ।

यह भी तो शहादत ही है प्रभास जी अस्पताल में कर्मठ कर्तव्य पारायण शाश्वत जी के निष्प्राण शरीर को पथराई आंखों से देख सोच रहे थे।

लतिका श्रीवास्तव

आवाज उठाना#विरोध करना#मुहावरा आधारित कहानी

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