मन मौजी – खुशी : Moral Stories in Hindi

नीति एक मस्त मौला लड़की थी। हंसती गुनाती मुस्कुराती घर में सबकी लाडली।दो भाई सुमित और अमित मां बाबा , चाचा चाची, ताई ताऊ,बुआ दादा दादी भरा पूरा परिवार ।नीति को जब जॉब लगी तो उसके लिए लड़का देखना शुरू किया गया।नीति के ऑफिस में जतिन उसके साथ काम करता था

जिसे वो पसंद करती थीं।नीति ने घर में बात की पहले तो सबने ना की पर जतिन के परिवार से मिलकर सब संतुष्ट हुए और उसकी शादी हो गई।फिर दो साल बाद नीति के भाई सुमित के लिए लड़की देखना शुरू हुआ तो उसने बताया अपने ऑफिस की कुलीग ज्योति को वो पसंद करता है

और उससे ही शादी करेगा। ज्योति के पिता नहीं थे।सिर्फ मां थी जो स्कूल में अध्यापिका थीं।नीति की मां को इस शादी से इनकार था क्योंकि ज्योति के पिता और भाई नहीं थे।घर में सब तैयार थे।

सुमित की जिद के कारण यह शादी हुई।नीति ने भी अपनी मां को बहुत समझाया कि मां उसे बेटी की तरह स्वीकार करो।पर  नीति की मां सुशीला जी ज्योति को ना अपना पाई।वो पहले दिन से ही यह चाहती थीं कि ज्योति नौकरी छोड़ दे। ज्योति ने दो महीने की छूट्टी ले ली थी। वो घर में सब काम करती सब उससे खुश थे ।

परंतु सुशीला जी  ज्योति को सिर्फ उठते बैठते ताने सुनातो ।सुशीला जी  की बातों से ज्योति बहुत आहत होती। सुमित ने ज्योति को कहा तुम ऑफिस ज्वाइन कर लो। ताकि आधा दिन तो तुम बाहर निकलोगी। ज्योति ने ऑफिस ज्वाइन कर लिया वो सुबह सब काम करके जाती  पर सुशीला जी अपनी आदत से  बाज ना आती।

एक दिन ज्योति की मां बहुत बीमार थी ज्योति सुमित को बता अपनी मां के यहां चली गई।सुशीला जी ने इतना तमाशा किया।फोन पर ज्योति को खरी खोटी सुनाई और अगले दिन जब वो घर आई तो उसे घर में न घुसने दिया और घर से निकाल दिया।सुमित बोला अब मैं यहां नहीं रहूंगा।तभी नीति उनके घर आई वो अमेरिका गई हुई

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तो उसे इन सब बातों का पता ही ना चला। सुमित रोते हुए उसे बाहर ही मिला ।सुमित ने उसे सारी बात बताई।उसने ज्योति को फोन किया भाभी तुम यह सब कैसे सहती हो तुम देखो मैं कैसे सब ठीक करती हूं। नीति ने अपने पापा को फोन लगाया और उनके साथ एक प्लान बनाया।जिसका सबको पता था केवल सुशीला जी को नहीं।

अगली सुबह नीति के पापा मदन जी उठे नहीं।सुशीला जी चिल्लाई देखो इन्हें क्या हुआ।जल्दी से उन्हें नर्सिंग होम ले जाया गया।जो नीति के ताऊजी का था।ताऊजी ने बताया दिल का दौरा पड़ा है सबको बुला लो। सुशीला जी ने नीति को फोन किया और रोते रोते बोली कि तुम्हारे पापा को दिल का दौरा पड़ा है तुम आजlओ।

नीति बोली मां में नहीं आ सकती क्योंकि जतिन ने मना किया है कि जहां पर तुम्हारी भाभी की कदर नहीं उस घर नहीं जाना।वो कहते है ऐसी दुष्ट औरत से दूर रहो नहीं तो तुम भी ऐसी हो जाओगी।सुशीला जी बोली मै दुष्ट हु ।वो बोली मम्मी तो आप भाभी के साथ ऐसा व्यवहार कर लेती है।भाभी की मां बीमार थी आपने उन्हें घर से निकाल दिया।

अगर मेरे साथ ऐसा हो तो आप क्या करेगी।अब या तो आप सुधरे नहीं तो अपने बेटे ,बहु और बेटी को खोने के लिए तैयार रहे।सुशीला जी बोली  बेटा तू आजा मै सबको बुला लूंगी।नीति बोली पहले भाभी फिर मैं ।सुशीला जी बोली सुमित जा बेटा बहु को ले आ। सुमित बोला अब वो नहीं आएगी और मैं भी जा रहा हूं। सुशीला जी ने ज्योति को फोन लगाया

रोते रोते बोली बेटी मुझे माफ कर दें अपने घर आजा।ज्योति फोन सुनकर हॉस्पिटल पहुंची।उसने पूछा पापा को क्या हुआ  तब तक मदन जी को होश आ गया था उन्होंने सुशीला जी को बुलाया और बोले तुम अब भी ना सुधारी तो मै चला।सुशीला जी बोली मुझे माफ कर दो मैने बहु को अपना लिया है।

सब मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।और ज्योति नीति को धन्यवाद दे रही थीं दीदी आज आपकी वजह से मुझे मेरा घर मिल गया।नीति बोली भाभी धीरे पापा का ड्रामा खुल जाएगा।आप खुश रहो मै यही चाहती हूं कल मिलते है।

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स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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