मालती.. पूरे 6 महीने हो गए हैं गुड़िया की शादी को ,इन 6 महीनो में तीन चार बार वह यहां आ भी गई किंतु इस बार तो पूरा एक महीना हो गया जब वह आई थी, बड़ा मन कर रहा है उसे देखने का वैसे तो हर समय अपने ससुराल की प्रशंसा करती है किंतु जब तक अपनी आंखों से ना देख लूं मेरे दिल को चैन नहीं आएगा,
उसकी हर हरकतें मुझे याद आती है हर छोटी-छोटी बात पर कैसे मेरी गले में लटक जाती थी और जब तक उसकी जिद पूरी नहीं होती वह मुझे नही छोड़ती थी, पता नहीं ससुराल में उसकी ज़िद कौन पूरी करता होगा, क्या पता अपने मन की बात वह किसी को बता पाती भी होगी या नहीं,
क्यों ना परसों उससे मिलने चलें क्या और हां उसे बताएंगे नहीं वह अचानक हमें देखकर वहां खुशी से चौक पड़ेगी और हम भी जाकर देख लेंगे उसकी ससुराल की असलियत क्या है! देखिए जी.. इस तरह बेटी के ससुराल में बिना बताए जाना अच्छा नहीं होगा, अरे मालती.. छोड़ो आजकल वह पुराना वाला जमाना नहीं रहा
अब तो दोनों परिवार एक हो जाते हैं और हां तुम भी अपनी बेटी से फोन पर मत कह देना की मम्मी पापा मिलने आ रहे हैं! दो दिन बाद निशांत और मालती अपनी बेटी गुड़िया के ससुराल पहुंच गए जहां उन्होंने देखा गुड़िया की सासू मां गुड़िया के बालों में तेल की मालिश कर रही है और किसी बात पर जोर-जोर से हंस रही हैं
यह देखकर दोनों खुश हो गए किंतु उन्हें अभी भी विश्वास नहीं था, गुड़िया और उसकी सास निशांत और मालती को देखकर खुशी से चौंक पड़े! चाय नाश्ते के बाद मालती और निशांत अपनी बेटी के कमरे में चले गए, गुड़िया वहां पर जूस लेकर आई तब निशांत और मालती ने उससे पूछा… बेटा तू यहां खुश तो है
ससुराल वाले किसी तरह से परेशान तो नहीं करते या तुझे यहां कोई तकलीफ तो नहीं है, देख बेटा कुछ भी मत छुपाना, हमें सब बता देना! अरे मम्मी पापा आप कैसी बातें कर रहे हैं, सच बताऊं मुझे इतना अच्छा ससुराल मिला है कि मुझे तो मायके की याद भी जल्दी से नहीं आती, अमित को तो आप जानते ही हैं
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कितने सीधे-साधे हैं और पापा मम्मी भी बस पूछो मत, मेरी सासू मां सास जैसी नहीं है बल्कि मेरी मां जैसी है, पापा… शुरू शुरू में ससुराल के नाम से डरती थी किंतु मेरी सासू मां कहती बेटा… तू मुझे अपनी मां बनने का सौभाग्य दे, तू देर से उठना सोकर और चाय के लिए चिल्लाना, फिर मैं चाय लेकर तेरे पास आऊंगी
और तुझे प्यार से उठाऊंगी तब तू उठना, हर चीज के लिए तू आवाज लगाना और मेरे आगे पीछे घूमती रहना, जैसे मेरी बेटी घूमती थी, किसी दिन में जल्दी जाकर काम में लग जाती हूं तो कहती है …तूने बेटी वाले नियम तोड़ दिए अरे बेटियां तो देर तक सोती है मायके में, अपनी मां के ऊपर चिल्लाती है कि उनका यह काम नहीं हुआ वह काम नहीं हुआ,
उनकी पसंद का खाना क्यों नहीं बनाया और मेरी सासू मां हंसते-हंसते मेरी हर फरमाइश पूरी करती है, आपको पता है पापा.. कुछ दिनों पहले रिंकी दीदी यहां आई थी और वह मुझसे नाराज होती हुई बोली… भाभी आपने तो मेरी जगह पर कब्जा कर लिया, अब तो मेरी अपनी मम्मी मुझे कम आपको ज्यादा प्यार करती है और हम सब खूब हंसते हैं!
अभी तीन-चार दिन पहले मुझे बहुत तेज बुखार था मम्मी ने मुझे बिल्कुल सगी मां की तरह प्यार दिया मुझे बिस्तर पर से नीचे पैर नहीं रखने दिया, यहां तक की तीन-चार दिन तक मेरे पैरों में भी सरसों के तेल की मालिश की, दिन रात मेरी सेवा में लगी रही, पापा मैं तो भूल ही गई कि यह मेरी अपनी मां नहीं सासु मां है,
मम्मी अगर ऐसी ससुराल हर लड़की को मिल जाए तो उसके मन से तो ससुराल का खौफ ही खत्म हो जाए ना, मैं भी तो ससुराल आने से पहले कितना डरती थी किंतु जब मेरे सास ससुर मेरे माता-पिता बन गए तो फिर डर की क्या बात, मां कोई भी लड़की बेटी तभी तो बन पाएगी जब सास मां बनेगी,
मां चाहे मेरा उनसे खून का रिश्ता नहीं है किंतु मन का रिश्ता बहुत गहरा हो गया है, अब तो मैं उनके बिना रहने की या जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती! आई लव माय सासू मां पापा….! अपनी बेटी के मुंह से ऐसी बातें सुनकर निशांत और मालती जी दोनों खुशी से अभी भूत हो गए, हर माता पिता यही चाहते हैं
कि उनकी बेटी को अपने मायके से भी ज्यादा अच्छा ससुराल मिले और यहां तो उससे ज्यादा अच्छा मिला! दरवाजे के बाहर खाने के लिए बुलाने आने वाली गुड़िया की सास की आंखों से अपनी बहू की बातें सुनकर झर झर आंसू बहने लगे जिसे उसके ससुर जी चुप करा रहे थे! अंदर जाकर गुड़िया की सास बोली…
समधी जी खूबी मुझ में नहीं आपकी बेटी में है जिसने मुझे अपनी मां समझा, एक सास भी तभी मां बन पाती है जब उसकी बहू उसे मां का स्थान दे, और आपकी बेटी ने वही सब किया, हम सास बहू का मन का रिश्ता इतना गहरा है कि हम कब सास बहू से मां बेटी बन गए हमें पता ही ना चला और ऐसा सुनकर पूरा परिवार खुशी से गदगद हो गया!
हेमलता गुप्ता स्वरचित
कहानी प्रतियोगिता
#मन का रिश्ता