पापा मैं छोटी से बड़ी हो गई क्यों? – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

  ” माँ.., , प्लीज जाने दो ना। मेरी सारी फ्रैंड्स जा रही हैं मूवी देखने । ,, 

” नहीं कोई जरूरत नहीं है…. सारा दिन बच्चों की तरह उछलती- कूदती रहती है…. थोड़ी तो बड़ी हो जा अब ।,, 

” क्यूँ सारा दिन मेरी बच्ची को डांटती रहती हो । अभी अपने मन की नहीं करेगी तो कब करेगी …. खबरदार जो मेरी बच्ची को रोका- टोका ….। जा पीहू जहाँ जाना है जा खूब घूम- फिर.. बस समय से घर आ जाना…. ।,, 

पीहू खुशी से चहकते हुए घर से निकल पड़ी…। 

” आपने बहुत सिर चढ़ा रखा है इसे… मेरी तो मानती हीं नहीं है… । इतनी बड़ी हो गई है। अब पढ़ाई भी खत्म होने वाली है । और एक आप हैं कि कोई चिंता हीं नहीं है। ,, श्रद्धा जी ने नाराजगी जताते हुए दिवाकर जी से कहा। 

“अरे हां… तुमने कहा तो याद आया । आज शर्मा जी किसी लड़के के बारे में बता रहे थे। रेडिमेड गारमेंट का काम है उनका । बीच मार्केट में शो रूम है। ….. कह रहे थे कोई अच्छी सी लड़की चाहिए उन्हें… ।,, 

दिवाकर जी की बात सुनकर श्रद्धा जी की आंखों में चमक आ रही थी। उन्होंने अधीर होते हुए कहा, ” जी.. तो फिर आपने क्या कहा !!!! ,, 

” कुछ नहीं… अभी इतनी क्या जल्दी है । आराम से सोचेंगे इस बारे में । ,, 

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श्रद्धा जी फिर तमतमाते हुए बोलीं, ” आप दोनों बाप -बेटी को तो हर चीज जल्दी ही लगती है ।इतना अच्छा रिश्ता हाथ से निकल जाएगा फिर सोंचते रहना। आप मुझे दीजिये शर्मा भाई साहब के नम्बर , मैं खुद ही बात कर लूंगी । ,, 

दूसरे दिन हीं शर्मा जी उनके घर पर थे । 

भाभी जी मैंने तो पहले हीं अपनी पीहू बिटिया का नाम उन्हें सुझा दिया था….. । आप तो बस शादी की  तैयारी में जुट जाओ । ,, 

लड़का काफी होनहार था और परिवार भी काफी सुलझा हुआ था। पीहू को भी अनिकेत भा गया था तभी तो उसने भी अपनी रजामंदी दे दी …. । 

आज शादी के जोड़े में अपनी पीहू को देखकर दिवाकर जी को लग रहा था कि सचमुच उनकी छोटी सी नटखट बिटिया पल भर में बड़ी हो गई ….. 

विदाई के समय सभी की आंखें नम थी । पीहू की नजरें बस अपने पापा को ढूंढ रही थीं….। दिवाकर जी भी अपने मन को कड़ा करके अपनी बिटिया की विदाई की तैयारी कर रहे थे । 

पापा को देखते हीं पीहू उनके सीने से लगकर बिलख उठी… 

दिवाकर जी ने पीहू के सर पर हाथ फेरते हुए कहा, “बेटा अपने ससुराल और मायके का मान बनाए रखना । ,, 

इस पल पीहू को लग रहा था कि वो अपने पापा के लिए भी बड़ी हो गई है। आज तक पापा ने उसे हर चिंता, हर जिम्मेदारी, हर परेशानी से दूर रखा था ।….. लेकिन आज पहली बार पापा ने उसे कोई जिम्मेदारी दी है जिसे निभाने की वो पूरी कोशिश करेगी .. । 

अपने माता – पिता का आशीर्वाद और प्यार अपने आंचल में बांधकर वो चल पड़ी अपने नव जीवन की राह पर….. लेकिन मन में एक सवाल था ” पापा में एक पल में छोटी से बड़ी क्यों हो गई ??? ,,

लेखिका : सविता गोयल 

#पापा मैं छोटी से बड़ी हो गई क्यों?

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