“जिंदगी के रण में खुद ही कृष्ण और खुद ही अर्जुन बनना पड़ता है…ये लड़ाई मुझे अकेले लड़़नी है और जीती भी है। मैं ये कर लूंगी,अगर औरत ठान लें तो क्या नहीं कर सकती!!! देविका ने अपने आपको विश्वास दिलाया।
जतिन की घटिया बातें देविका के मन-मस्तिष्क में कौंध रही थी, आज तक वो चुप रही पर अब बहुत हो गया, कोई उसका साथ देने वाला भी नहीं है, ससुराल में बहू की बातों पर विश्वास कौन करता है? बहू सच्ची होकर भी झूठी पड़ जाती है। देविका के पास स्वयं को निर्दोष साबित करने का कोई प्रमाण नहीं था, इस पुरूषवादी समाज में हमेशा औरतों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है।
अपने साथ हो रहे शोषण की दास्तां वो कहें भी तो किससे ? मायके में पापा रिटायर शिक्षक है और मां को दिल की बीमारी है। घर में छोटा भाई है जो पढ़ाई कर रहा है, देविका मायके में किसी को परेशानी और तनाव नहीं देना चाहती थी।
जब से नवीन के साथ शादी हुई है, नवीन ने हर तरह से उसे खुश रखा है पर नवीन की जान अपने छोटे भाई में बसती है। नवीन से शादी हुए अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ है, नवीन और देविका की शादी परिवार वालों की मर्जी से हुई थी। नवीन अपने परिवार से बहुत जुड़े हुए हैं, देविका यही सोचकर झिझक रही थी।
ससुराल में आते ही उस पर परिवार तोड़ने का इल्ज़ाम नहीं लगा दें, वो इस बात से भी सहमी हुई थी।
देविका नवीन से पांच साल उम्र में छोटी है और वही नवीन का छोटा भाई जतिन नवीन से दो साल छोटा है।
दोनों भाई लगभग बराबर के एक जैसे ही लगते हैं, दोनों भाईयों में बड़ा प्यार है।
शुरूआत में वो जतिन की हरकतें को देवर की छेड़खानियां समझकर माफ करती रही पर इन दिनों जतिन आते-जाते वक्त देविका को छूने लगा है, वो छुअन सामान्य नहीं है बल्कि जानबूझकर छूने का प्रयास कर रहा था। हर औरत अच्छी-बुरी छुअन को पहचान जाती है।
घर में किससे कहें, जतिन को सब छोटा मानते हैं और उससे बेहद प्यार करते हैं, नवीन जतिन पर आंखें बंद कर विश्वास करता है और नवीन की बड़ी दीदी की नज़र में जतिन तो लक्ष्मण है जो अपनी भाभी को मां के समान पूजता है और उसकी इज्जत करता है।
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उस दिन देविका को कुछ काम से मायके जाना था, नवीन टूर पर दूसरे शहर गया हुआ था, इसलिए देविका की मम्मी ने उसे मायके बुला लिया, थोड़े दिन देविका मायके में रह लेंगी, तो उसने जतिन को कह दिया था कि तुम देविका को मायके छोड़ आओं।
देविका पीछे बैठना चाह रही थी पर जतिन ने आगे की सीट पर बैठाया और गियर चेंज करने के बहाने देविका को छूता रहा, देविका जोर से चिल्लाई पर जतिन पर उसका कोई असर नहीं हुआ,” भाभी , भैया और मुझमें कोई अंतर नहीं है, आप मुझे कभी खिदमत का मौका तो दें, सच में खुश कर दूंगा।’भैया तो टूर पर बाहर ही रहते हैं।
देवर जी!! रिश्तों की मर्यादा में ही रहो, दुशासन ने भी चीरहरण की कोशिश की थी, उसके उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़े थे!!!! देविका ने चेतावनी दी।
जतिन की यही बातें देविका के कानों में गर्म शीशे की तरह पिघल रही थी, उसे अपनी अस्मिता खतरे में नजर आ रही थी। वह जतिन जैसे दुशासन को चीर हरण का मौका नहीं देना चाहती थी, महाभारत काल में तो द्रौपदी की रक्षा कृष्ण ने की थी पर इस कलयुग में स्त्री को अपनी इज्जत बचाने के लिए खुद ही कृष्ण और अर्जुन बनना है ।
मायके में देविका तीन-चार दिन रही पर किसी से कुछ नहीं कहा, वो जतिन जैसे दुशासन से बचने की रणनीति बनाती रही जब उसके ससुराल जाने के दिन नजदीक आये तो नवीन ने फिर जतिन को भेज दिया।
जतिन ने फिर उसे कार की आगे की सीट पर बिठाया और अनर्गल बातें करनी शुरू कर दी। देविका ने बैठने से पहले ही मोबाइल में वॉइस रिकार्डिंग का बटन दबा दिया था।
भाभी, आपकी रातें कैसे कटी ? नींद नहीं आई होगी, भैया तो टूर पर गये है,वो तो कल सुबह ही आयेंगे, आज आपकी तन्हाई में ही दूर कर दूंगा, जतिन ने हंसते हुए कहा।
जतिन,” मैं आपको अपना भाई समझती हूं और आप इस तरह की बातें कर रहे हो, भाभी मां के समान होती है, आज मैं आपके भैया को सब बता दूंगी कि आप किस तरह मेरा मानसिक शोषण कर रहे हो, देविका गुस्से में झल्लाती हुई बोली।
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“कोई फायदा नहीं है!!!आपकी बातों पर कोई विश्वास नहीं करेगा, आप अभी-अभी इस घर में आई हो, और मैं इस घर का बेटा हूं, भैया तो मुझे जान से ज्यादा चाहते हैं, जतिन कुटिलता से बोला।
उन्हीं भैया की पत्नी के साथ इस तरह की हरकतें करते हुए, आपको शर्म नहीं आती!!! आपके कलेजे ने आपको नहीं धिक्कारा!!!! आप नवीन के भाई हैं वरना मैं आपकी कम्पलेन कर देती। देविका ने चिल्ला कर कहा।
इतने में घर आ गया, देविका गुस्से में तमतमाई हुई थी।
रात को सोते वक्त उसने जानबूझकर कमरे में चिटकनी नहीं लगाई, थोड़ी देर बाद जतिन कमरे में आया और प्रणय निवेदन करने लगा, उसने जैसे ही देविका को छुआ।
जतिन!!! नवीन की तेज आवाज कौंधी पर कमरे में तो कोई नहीं था, नवीन सामने वीडियो कॉल पर था जो जतिन की हरकतें अपनी आंखों से देख रहा था। मोबाइल पर नवीन को देखते ही जतिन के होश उड़ गए, तभी कमरे में देविका के सास-ससुर भी आ गएं। देविका ने घर आते ही मोबाइल की रिकार्डिंग नवीन को भेज दी थी और नवीन ने जतिन और देविका की रिकॉर्डिंग की बातें अपने मम्मी-पापा को फॉरवर्ड कर दी थी।
देविका ने पहले वॉइस रिकार्डिंग भेजी और फिर कहा आप अपने चहेते भाई की हरकतें अपनी आंखों से देख लेना, जैसे ही जतिन आया उसके थोड़ी देर पहले नवीन को वीडियो कॉल लगाकर मोबाइल पलंग के सामने सेट कर दिया।
अपने बेटे की बातें सुनकर और हरकतें देखकर जतिन के मम्मी-पापा भी शर्मिंदा हो गएं।
आज देविका ने अपनी कुशल रणनीति से अपनी रक्षा कर ली,और चीरहरण से पहले ही दुशासन के हाथ कटवा दियें। इस कलयुग में मोबाइल ने देविका की अस्मत की रक्षा की।
अगले दिन नवीन टूर से आया तो जतिन ने माफी मांगी पर नवीन उसे माफ नहीं कर पाया।
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मम्मी-पापा के समझाने से नवीन ने जतिन को पुलिस को नहीं सौंपा, पारिवारिक प्रतिष्ठा और इज्जत का सवाल था पर नवीन ने घर छोड़कर जाने का निर्णय लिया।
मेरी पत्नी मेरी गैर मौजूदगी में आप लोगों के पास सुरक्षित नहीं है, मैं टूर पर रहता हूं, यहां घर में सबके साथ रहने से अच्छा है, वो दूसरे शहर में रहें ये कहकर नवीन ने अपना ट्रांसफर नये शहर में करवा लिया और वो देविका को लेकर उस घर से चला गया। देविका ने मोबाइल के सहारे विजय हासिल कर ली।
पाठकों,” यही सच्चाई है ,औरत की कही बात पर कोई विश्वास नहीं करता बल्कि उसके चरित्र पर ही लांछन लगाया जाता है, ससुराल में उसका शोषण हो रहा हो तो उसकी भी गलती बताई जाती है।
आजकल के कलयुग में तो मोबाइल भी सुरक्षा कवच के समान है, इसमें हर सुविधा है, महिला हेल्पलाइन नंबर है, एप्स है । हर महिला को अपनी रक्षा खुद ही करनी होगी। विपरीत परिस्थितियों में धैर्य के साथ रणनीति बनाकर हर विपदा का मुकाबला करना चाहिए।
#मर्यादा
धन्यवाद
अर्चना खंडेलवाल