साड़ी की फाल  – इन्द्रा सभरवाल धवन      

शिल्पा की नई नई शादी हुई थी और चार दिनों बाद उसका पहला करवाचौथ था। इस अवसर पर वह अपनी मम्मी (सास) को बहुत सुंदर साड़ी भेंट करना चाहती थी। वह अपने पति के साथ प्रगति मैदान के व्यापारिक मेले से सिल्क की साड़ी लेकर आई। साड़ी प्लेन थी उसने सोचा क्यों न वह इस पर छोटे छोटे फूलों की कढ़ाई करवा दे तो साड़ी बहुत सुंदर लगेगी।

यह सोचकर उसने घर के पास ही कढ़ाई वाले की दुकान से कढ़ाई करवा ली। दो सो पच्चास रुपये लगे। शिल्पा ने बुर्जुग कढ़ाई वाले से कहा,” अंकल जी इस समय मेरे पास दो सौ रुपये हैं या दो हजार का नोट है , यदि आप कहें तो दो सौ रूपये दे दूं बाकी पच्चास रूपये मैं आपको कल आफिस से आते हुए शाम को दे जाऊँगी।’  कढ़ाई वाले अंकल ने दो सौ रुपये लिए और कहा बेटे ठीक है।

दूसरे दिन शिल्पा सुबह बस में आफिस जाते हुए साड़ी को फाल लगाने के लिए साथ ले गई , सोचा लंच में साड़ी को फाल लगा लुगीं। सुबह जब वह बस में चढ़ी तो बैठने के लिए सीट मिल गई । वह सुबह घर का सारा काम करके आई थी , थक गई थी। सोचा थोड़ा आराम मिलेगा ।

तभी एक बुर्जुग महिला को उसने बस में चढ़ते देखा। सारी सीटें भर गई थीं। वह ठीक ढंग से खड़ी नहीं हो पा २ही थीं । शिल्पा दस मिनट तक सोचती रही कि शायद उस महिला को कोई सीट दे दे पर किसी को उन पर तरस नहीं आया आखिर में शिल्पा ने उस महिला को सीट दे दी।

धीरे धीरे बस में भीड़ बढ़ गई तभी उस महिला ने शिल्पा से साड़ी वाला लिफ़ाफा पकड़ लिया। अब शिल्पा का स्टैंड आ गया था , वह उतर गई। तभी उसे ध्यान आया कि साड़ी का लिफाफा और फाल वाला लिफाफा तो उस बुर्जुग महिला के पास रह गया। पर बस तो जा चुकी थी। वह दुःखी मन से आफिस आ गई ।

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शाम को घर जाने के लिए वह जिस बस में चढ़ी , वही कैंडक्टर था उससे साड़ी के लिफाफे के बारें में पूछा तो उसने इस बारे में अनभिज्ञता प्रकट की।  फिर निराश सी होकर वह बस से उतरी और रास्ते में कढ़ाई वाले अंकल को पच्चास रुपये देने के लिए उनकी दुकान पर गई तो

उसे देखकर उन्होंने वही साड़ी वाला लिफाफा उसे पकड़ाते हुए कहा कि एक बुर्जुग महिला उसे यह साड़ी वाला लिफाफा दे गई थी और आपकी साड़ी की फाल लगाने के पैसे भी दे गई हैं । साड़ी को फाल लगा दी है । उन्होंने कहा क्यों कि लिफाफे पर उनकी  दुकान का पता लिखा था

इसलिए उन्होंने उसे आपको साड़ी देने के लिए कहा और साड़ी पर फाल लगाकर देने के लिए कहा और पच्चास रूपये फाल लगाने के भी दिए। ये बात सुनकर शिल्पा की आंखे नम हो गई।

            इन्द्रा सभरवाल धवन   स्वरचित ।

 

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