सुमित एक एमएनसी में बी .टेक करके एक बड़े ओहदे पर कार्यरत था ! छह बहनों में एकलौता भाई और सबसे छोटा था सुमित ! सभी उसी से उम्मीद लगाते थे कि अब ये ज़िम्मेदारियां संभालेगा ! और उम्मीद गलत भी नहीं थी ,सुमित था भी ऐसा ! स्वभाव से बहुत ही सरल ,मृदुभाषी और सभी का आदर करने वाला ! अपने माता,पिता और बहनों की हर बात मानता था !
आज तक शायद ही कभी सुमित ने अपने घरवालों की बात को टाला हो ! 25 वर्ष के सुमित के लिए अब जगन्नाथ जी और सुशीला जी लड़की की तलाश कर रहे थे ! सभी बेटियों का विवाह कर दिया था ! अब जगन्नाथ जी और सुशीला जी भी उम्रदराज हो गए थे ! उन्होने पहले सुमित की इच्छा ज़ाननी चाही ,जिस पर सुमित ने साफ कह दिया – आप ज़िसे पसंद करेंगे मेरे लिए उसके साथ जीवन भर रिश्ता निभाऊंगा !
सुमित की ऐसी बातें सुनकर वो भाव विभोर हो गए ! जल्द ही उन्हे बहू के रुप में रीना पसंद आ गयी ,जो की बी.एस.सी ,बी.एड की हुई थी और प्रतियोगी परिक्षा की तैयारी कर रही थी ! पर जगन्नाथ जी ,सुशीला जी और सुमित की बहनों के मन में एक डर था की कहीं उनका श्रवण कुमार सा बेटा य़ा भाई बहू के आने से बदल ना जायें ! वो ये भी सोचते थे कि बहू पढ़ी लिखी ज्यादा हैँ तो उसके नखरे भी बहुत होंगे ,उनके सुमित को जोरू का गुलाम बना देगी ! अभी तक बहनों को ससुराल छोड़कर आना हो य़ा लाना हो ,किसी के यहाँ न्योता हो तो सुमित ही सब ज़िम्मेदारियां निभा रहा था ! सुमित और रीना का विवाह सकुशल सम्पन्न हो गया ! पर सभी के मन में अंजाना डर था !
रीना ने घर में आते ही एलान कर दिया कि मेरे माँ बाप ने मुझे पढ़ा लिखाकर इस काबिल इसलिये नहीं बनाया है कि मैं पूरे दिन घर के काम काज करूँ ! मुझे सरकारी नौकरी हासिल करनी हैँ ,उसके लिए मुझे दिन रात पढ़ना हैँ ! मैं समझौता नहीं करूंगी ! घर क कामों के लिए नौकरानी रख लिजिये ! सुमित ने अपने माता पिता की रजामन्दी जाने बिना ही अगले दिन से नौकरानी का इंतजाम कर दिया !
रीना सुबह उठती ,जगन्नाथ जी और सुशीला जी के पैर छूती,चाय बनाती ,सबको देती ,सुमित अपने ऑफिस चला जाता ,सुमित के जाने के बाद रीना अपने कमरे में बंद हो जाती ! 1 बजे निकलती,, नहाती ,,खाना खाती ,,फिर अपने कमरे में बंद हो जाती! सुशीला जी कहती पूजा करके खाना खाया करो बहू ,रीना आज के ज़माने की बहू ,दो टूक जवाब देती ,भगवान कर्मों से खुश होता हैँ मम्मी जी ,पूजा पाठ य़ा घंटी बजाने से नहीं ,ज़ितनी देर में पूजा करूँगी उतनी देर में तो मैं 10 सवाल हल कर लूँगी ! हंसकर जवाब देकर रीना अपने कमरे में चली जाती ! जगन्नाथ जी और सुशीला जी को रीना का यह व्यवहार कतई अच्छा ना लगता ! सुमित भी शाम को थका हारा आता ,और खाना खाकर सीधा अपने कमरे में चला जाता !
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एक दिन सुमित की बड़ी बहन सविता अपने मायके आयी ! रीना ने अपनी ननद के पैर छूये ! चाय नाश्ते की औपचारिकता निभाने के बाद रीना फिर अपने कमरे में बंद हो गयी ! घर में कोई सामान खत्म होता ,सीधा फ़ोन घुमाती ,सारा सामान अपने आप घर आ जाता ! ना ही सुमित को ,ना जगन्नाथ जी को कहीं जाने की ज़रूरत पड़ती ! सुशीला जी और ननद रानी आपस में चुगली करती रहती की ये नयी बहुरिया तो घर को लुटा देगी ! कोई मोल भाव नहीं सीधा महंगा सामान ओर्डर कर दिया बस हो गया काम ! जितने दिन सविता रही ,रीना उनके पास कम ही बैठती ,हाँ किसी को जवाब नहीं देती ,खुद से मतलब रखती !
सविता के ससुराल जाने का समय हुआ तो जगन्नाथ जी ने सुमित से कहा -छुट्टी ले ली हैँ ना तूने ऑफिस से ,सविता को छोड़ने जाना हैँ हर बार की तरह !
इससे पहले सुमित कुछ बोलता ,रीना बोल पड़ी – इन्हे छुट्टी लेने की क्या ज़रूरत ,दीदी पढ़ी लिखी हैँ ,खुद भी जा सकती हैँ ,हम गाड़ी बुक कर देंगे ! अब य़े कोई सरकारी नौकरी में तो हैँ नहीं ,जो छुट्टी लेने पर भी सैलरी मिलती रहे ! एक दिन का कितना नुकसान होता हैँ ,शायद आप लोगों को अन्दाजा नहीं !
सुशीला जी – ये क्या बोल रही हो बहू ,सारी शर्म हया बेच आयी हो क्या !! पता हैँ बेटी खुद से घर जायेगी तो उसकी कितनी नाक कट जायेगी ! सब थू थू करेंगे कि जवान भाई ,बाप होते हुए बहू अकेले आ गयी ! इनकी तबियत लंबे सफर में खराब हो जाती हैँ ,इसलिये हमेशा से सब बहनों को सुमित ही छोड़ने जाता हैँ ! कान खोलकर सुन लो , तुम्हारे मायके में चलता होगा ये सब पर यहाँ नहीं ! समझी !
रीना – ठीक हैँ तो फिर मम्मी जी ,आज से सब दीदियों को मैं छोड़ने जाया करूंगी उनके ससुराल…………
रीना -ठीक हैँ तो फिर मम्मी जी ,आज से सब दीदियों को मैं छोड़ने जाया करूंगी उनके ससुराल ! इसी बहाने घूम आया करूंगी ,सबसे मुलाकात हो जायेगी ! ठीक हैँ मम्मी जी ,पापा जी !
सुशीला जी – हाये रे मेरे कर्म फूटे ! क्या जमाना आ गया हैँ ,घर की औरतें ,बहुएें बेटियों के ससुराल जायेगी वो भी उन्हे विदा करने ! तेरा दिमाग तो ठीक हैँ ! सुमित तू कुछ कहता क्यूँ नहीं ,बूत बनके क्यूँ खड़ा हैँ !
सविता – हाँ भईया ,भाभी को क्या हो गया है ,उन्हे समझाइये ,लगता हैँ पूरा दिन कमरे में घुसे रहने से उनके दिमाग पर भी असर हुआ हैँ ! मेरे ससुराल में मेरी नाक कटाना चाहती हैँ !
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सुमित – माँ ,दीदी ,माफ कीजियेगा पर रीना ने क्या गलत कहा ! आपको वो छोड़ आयेगी तो इसमें गलत क्या हैँ ! मुझे ऑफिस से दो दिन की छुट्टी लेनी पड़ेगी ! आप लोग जानते भी हो ,हर बार आप सबको छोड़ने की वजह से मुझे जॉब में प्रमोशन भी नहीं मिला हैँ ,कई कम्पनियां चेंज करनी पड़ी हैँ ! रीना तो वैसे भी घर पर रहती हैँ ,सब चीज की जानकारी हैँ उसे ! अब वो आ गयी हैँ तो कुछ ज़िम्मेदारियां अपने मन से ले रही हैँ तो इसमें तो आप लोगों को खुश होना चाहिये ना कि विरोध करना चाहिए !
सुशीला जी – वाह बेटा वाह ,,मेरा डर बिल्कुल सही था कि तू शादी के बाद जोरू का गुलाम बन जायेगा ! तू तो बिल्कुल बदल गया रे ,तू हमारा वो सुमित हैँ ही नहीं जो हमारी एक भी बता को कभी नहीं काटता था ! अपनी बहनों पर तो जान छीड़कता की! तुझे पता भी ये हैँ जो तू कह रहा है वो तो रीति रिवाज के विरुद्ध हैँ ! आज तक हमारे कुटुम्ब ,खानदान में कोई बहू ननद को छोड़ने नहीं गयी ! तुम दोनों तो उल्टी गंगा बहाना चाहते हो !
बहुत देर से जगन्नाथ जी सभी बातों को गंभीर होकर सुन रहे थे ! उन्होने दहाड़ती हुई आवाज में बोला – सुशीला ,अभी तक भले ही परिवार में कभी ना बही हो उल्टी गंगा पर अब बहेगी ! किन रीति रिवाजों की बात कर रही हो तुम ,तब कहाँ गए थे रीति रिवाज ,जब तुम्हारा भाई अपनी बीवी बच्चों को लेकर विदेश चला गया और कभी लौटकर नहीं आया ,यहाँ तक कि तुम्हारे पिता जी के अचानक से हुए निधन पर भी वो नहीं आया ,मैने मुखाग्नि दी !
तब कहाँ चले गए रीति रिवाज जब मंजूषा ( जगन्नाथ,सुशीला जी की दूसरे नंबर की बेटी ) के पति विनोद रात में शराब पीकर हमारे घर के सामने गाली गलौज कर रहे थे ,हम सबको गाली दे रहे थे !
तब कहाँ चले गए रीति रिवाज जब सुमित को ड़ेंगू हुआ कोई घर परिवार का देखने भी नहीं आया ! मेरी और तुम्हारी क्या हालत हो गयी थी उस समय ! कहने को हमारी 6 बेटी पर सबने पल्ला झाड़ लिया था अपनी कुछ ना कुछ पारिवारिक समस्या य़ा व्यस्तता बताकर ! तुम्हारी बातों में आकर मैने हमेशा से रीना बहू को ही गलत समझा ! क्या हुआ वो कमरे में बंद रहती हैँ ,जीवन में कुछ बन जायेगी तो हमें ही फक्र होगा ! अपने परिवार और बच्चों की ज़िम्मेदारी इस महंगाई के ज़माने में अच्छे से संभाल लेगी ! हम भी निश्चिंत होकर इस दुनिया से विदा हो सकेंगे कि हमारे बाद हमारे बच्चों को किसी चीज की कमी नहीं होगी !
सुशीला ,,सुमित बिल्कुल नहीं बदला है ,हर लड़का शादी के बाद नहीं बदलता ,वो पहले जैसा ही हैँ ! बस अपनी कुछ ज़िम्मेदारियां अपनी समझदार बीवी को दे रहा हैँ तो इसमें बुराई क्या है ?? आज से सभी बेटियों को हमारी रीना ही छोड़ने जायेगी !! तुम भी चली जाया करना उसके साथ ,मैं तो वैसे भी लम्बा सफर नहीं कर पाता ! तुम्हारी शिकायत भी दूर हो जायेगी कि तुम्हे कहीं घुमाया नहीं ! अब घूम लो !
सविता – पर पापा ….
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जगन्नाथ जी – पर वर कुछ नहीं सविता ,अगर मेरा फैसला मंजूर ना हो तो तुम दामाद जी को बुला लो य़ा खुद चली जाओ ! रीना बहू भी तो जब से ब्याह के आयी हैँ अपने आप जाती आती हैँ ,किसी का समय खराब नहीं करती !
सुशीला जी ने ऐसे जवाब की कल्पना कभी नहीं की थी जगन्नाथ जी से ! पर उन्हे जगन्नाथ जी का फैसला स्वीकार करना पड़ा ! रीना अपनी ननद को बड़े सम्मान के साथ खूब विदा देकर उसके ससुराल छोड़कर आयी ! शुरू में तो सभी बेटियों के ससुराल वालों ने विरोध किया ! पर कहते हैँ ना परिवर्तन कभी ना कभी स्वीकार करना ही पड़ता हैँ ! अब तो अपनी बहुरिया के साथ सुशीला जी भी सफर का आनन्द लेते हुए जाती हैँ !
रीना ने भी दिन रात मेहनत की ! ससुराल वालों ने भी खूब संग दिया ! आखिरकार रीना सरकारी अध्यापिका बन गयी ! उसे दूर का विद्यालय मिला ! पर एकलौता बेटा होने के नाते सुमित अपने माता पिता के पास ही रहता था ! कुछ सालों में रीना का तबादला उसके ससुराल वाली जगह पर हो गया ! जगन्नाथ जी सुशीला जी रीना रीना करते थकते नहीं थे ! सुमित भी अपने माँ बाप की खूब सेवा कर रहा था ! दो बच्चें हो गए थे सुमित और रीना के ! जो अपने दादा दादी के आगे पीछे घूमते रहते थे ! कौन कहता हैँ शादी के बाद हर बेटा बदल जाता हैँ ,सुमित जैसे बेटें भी हैँ इस दुनिया में ! और लोग यह भी कहते हैँ पढ़ी लिखी बहुएें सास ससुर को लेकर नहीं चलती ,अगर सास ससुर भी साथ दे तो कोई बहू अपने सास ससुर को छोड़कर ना जायें ! हमारी रीना भी तो उन्ही में से एक हैँ !
आज रीना की सेवानिवृत्ति की पार्टी हैँ ! जगन्नाथ जी और सुशीला जी इस दुनिया में नहीं हैँ ,रीना अपने भाषण में सिर्फ जगन्नाथ जी और सुशीला जी की बातें कर रही हैँ ! बीच बीच में गालों पर आ गए आंसूओं को अपने रूमाल से पोंछ लेती हैँ ! सुमित और रीना इस गानें की कुछ पंक्तियां मिलकर गाते हैँ –
ये तो सच हैँ कि भगवान हैँ .
हैँ मगर फिर भी अंजान हैँ
धरती पे रुप माँ बाप का
उस विधाता की पहचान हैँ
मौलिक अप्रकाशित
मीनाक्षी सिंह
आगरा
Very nice story 👌 👍 👏