बहोत गुरुर न कर अपने आप पे ऐ दोस्त
मिट्टी का खिलौना है
टूटकर बिखरता है
वक़्त जैसा भी हो,
एक रोज़ गुज़रता है|
ख़ौफ़ नहीं मुझको दरिया की गहराई से जिसमें डूबने का हुनर हो वो उभरता है|
हालात से लड़ता रहूँगा तब तक ‘तनहा’, जबतक बिगड़ा मुक़द्दर नहीं सँवरता है|
ना ही तुम अपने कंधे पर सर रखकर रो सकते हो
वक़्त उन्हें दो जो तुम्हे चाहते हों दिल से!
तलाश करीये मेरी
कमी को अपने दिल मे
दर्द हो तो समझ लेना, के रिश्ता अभी टूटा नही
जो मिला उसमें ही खुश रहता हूँ…
मेरी उंगलियां ही मुझे सिखाती हैं
दुनियाँ में बराबर कोई नहीं है
कोई मुझे बेवजह,
ऐ खुदा लोग तो बेवजह तुझे भी याद नहीं करते
किताबों में मेरे दोस्त.
सारे Beautiful सबक तो कमबख्त ठोकरों से मिले हैं.।
मौसम बहुत सर्द है
ऐ दिल, चलो कुछ ख़्वाहिशों को आग लगायें..
की कीमत उस से पूछो जो फेल हुआ हो।
1 घंटे..
की कीमत उस से पूछो जिसने किसी का इंतज़ार किया हो।
1 मिनट…..
की कीमत उस से पूछो जिसकी ट्रेन 1 मिनट से मिस हुई हो।
की कीमत उस से पूछो जिसको पिछले महीने तनख्वाह ना मिली हो।
1 सेकंड….
की कीमत उस से पूछो.. जो दुर्घटना से बाल बाल बचा हो।
1 हफ्ते…..
की कीमत उस से पूछो जो पूरा हफ्ते अस्पताल में रहा हो।