रेवती एक स्कूल में अध्यापिका थी परिवार में पति महेश जो दफ्तर में क्लर्क थे और उनकी दो संताने राहुल और प्रीति थे।दोनो बच्चें मां के स्कूल में ही पढ़ते थे।जब तक राहुल स्कूल में था कक्षा आठवीं तक वो एक आज्ञाकारी और पढ़ाकू बच्चा था पर जैसे ही वो नवी में आया उसका व्यहवार और आदते बदलने लगी।रेवती बोली एडोलसेंस है इसी लिए बदलाव आ रहे है।
पर ये दिन पर दिन बढ़ रहा था हर चीज़ में ज़िद करना फिर आया करोना जिसने दुनिया ही बदल दी।मोबाइल ने अपनी जगह हर घर में बना ली बच्चे सिर्फ मोबाइल में ही सिमट गए स्कूल और फिर हर चीज के लिए मोबाइल ।रेवती घर से क्लासेज लेती ।
महेश को तो कंप्यूटर की नॉलेज भी कम थी इसलिए उन्हें तो बड़ी ही मुश्किल हो रही थी।राहुल तो और चिड़चिड़ा और बदतमीजी होता जा रहा था। वो कभी उससे मदद मांगते तो वो कहता क्या पापा आपको ये भी नहीं आता।राहुल के नवी में कम नंबर आये। स्कूल शुरू हो गए।
करोना के बाद धीरे धीरे सब खुल रहा था बच्चे स्कूल जाने लगे।महेश और रेवती ने भी स्कूल दफ्तर जाना शुरू कर दिया।दसवीं थी तो राहुल को भी ट्यूशन लगवा दी गई पर वो वहां और लड़को के साथ गेमिंग ऐप में लग गया और घर से छोटी मोटी चोरी करने लगा।
हद तो तब हो गई जब एक दिन महेश ने लोन लेकर 4 लाख रुपए घर में रखे हुए थे अपने पिता की सर्जरी के लिए । राहुल अपने एक दोस्त के साथ गेम खेल रहा था अगले लेवल पर जाने के लिए पेमेंट करनी थी उसके दोस्त ने ऑनलाइन दोनों के 50000 rs भर दिए और राहुल ने जल्दी में अलमारी से l
लाख रुपए निकाल लिए और दोस्त के साथ बाहर चला गया।दिन भर घूमे फिरे खाया पिया मस्ती की।इधर शाम को महेश दफ्तर से आया और रेवती से बोला कि रेवती वो पैसे दे दो मै डॉक्टर को मिल आऊ रेवती पैसे ले आई । महेश ने एक बार पैसे देखे उसका लिफाफा फटा हुआ था
उसे शक हुआ उसने पैसे गिने तो वो कम थे उसने रेवती से पूछा तुमने पैसे निक।ले रेवती बोली नहीं जी आप ने जैसे रखे थे वैसे ही है।महेश बोला इसमें एक लाख कम है अब मै पैसे कैसे भरूंगा । दोनो परेशान थे।फिर ये तय हुआ कि रेवती की चूड़ियां गिरवी रख पैसे लाकर डॉक्टर को चुकाया जाए।
प्रीति अंदर पढ़ रही थी उससे रेवती ने पूछा कोई आया था क्या प्रीति बोली हा मां निखिल आया था राहुल और वो खेल रहे थे फिर राहुल ने अलमारी खोली कुछ निक।ला और चला गया।रेवती और महेश बाजार चले गए चूड़ियां गिरवी रख पैसा लाए और महेश उधार चुका कर आ
गया तब तक राहुल भी आ गया था।महेश ने राहुल से पैसों का पूछा राहुल मुकर गया मुझे क्या पता पैसा होता तो तो ऐसे फटेहाल जीता आप लोग हर चीज़ को मना करते हो महेश ने गुस्से में राहुल की पिटाई कर दी।राहुल अंदर गया और लेट गया वो गुस्से से भरा बैठा था
उसे गलत सही की कोई समझ नहीं आ रही थी उसे सिर्फ पापा ने मारा और गुस्सा किया यह दिख रहा था वो रात को उठा उसे मां के पर्स में जो पैसे मिले वो उसने अपनी पॉकेट में डाले दो चार कपड़े रखे सुबह वाले पैसे तो उसके पास थे ही रात को वो घर से निकल कर रेलवे स्टेशन आ गया और जो ट्रेन सामने खड़ी थी उसमें बैठ गया ।
ट्रेन मुम्बई पहुंची वो बीना में रहते थे अगली सुबह जब आँख खुली तो बम्बई में उधर मां बाप का हाल बेहाल था सब तरफ पूछा कुछ पता नहीं।पुलिस में गये सारी बातें बताई पुलिस वाले बोले हम देखते है क्या कर सकते हैं।राहुल को मुंबई पहुंच बड़ा अच्छा लग रहा था बाहर आ कर पहले उसने कुछ खाया फिर सारा दिन यहाँ वहां घूमता रहा।
इतना बड़ा शहर ना कुछ अता पता क्या करे। शाम को फिर स्टेशन आ गया वहां उसे दो लड़के मिले मोहन और श्याम वो बोले कौन है क्या है राहुल उनके साथ चला गया और एक झोपड़ी में रहने लगा ।कुछ दिनों में पैसा खत्म हो गया खर्चे चलाने के लिए उसने भी उन लड़कों की तरह चोरी चकlरी शुरू कर दी।
उधर मां बाप का रो रो कर बुरा हाल था।महेश बोले हमेशा अपने ही जख्म देते है इतना लाड प्यार दिया इस बच्चे को इनकी जरूरत पहले पूरी की और ये हमारे साथ क्या कर दिया।अपनी मां के बारे में भी नहीं सोचा उधर राहुल को अब असलियत समझ आ रही थी इतनी अच्छी जिंदगी छोड़ कहा दलदल में फंस गया था
पुलिस का अलग डर कभी फुटपाथ पर सो कभी गंदी सी जगह में इस बात को 2 साल हो गए थे।रेवती तो बिल्कुल पागल हो गई थी बस बेटी के लिए दोनों जी रहे थे।तभी उनके पड़ोस में रहने वाले शुक्ला जी का बेटा राजन किसी काम से मुंबई गया।स्टेशन पर उतरा तो उसे एक लड़का दिखा उसे लगा ये राहुल है पर वो कैसे यह सोच वो आगे बढ़ गया।
पर उसका ध्यान वही था अपना काम निपटा कर जिस दिन उसे जाना था वो स्टेशन पर जल्दी आ गया भूख लगी थी तो स्टाल पर कुछ खाने लगा उसे फिर वही लड़का दिखाई दिया वो उसके पीछे गया और उसका हाथ पकड़ बोला तुम राहुल हो ना क्या हाल बना रखा है।
भैया आप तभी वहां कुछ लड़के आ गए और राजन से लड़ने लगे ।राजन ने पुलिस बुला ली और उन्हें सारी बात बताई कि ये लड़का हमारा पड़ोसी है और 2 साल पहले ये घर से भाग गया था।पुलिस वालों ने पूछा तो राहुल रो पड़ा ।राजन ने बीना का एड्रेस और राहुल के पापा का नंबर दिया पहले पुलिस ने बीना पुलिस स्टेशन में कन्फ़र्म किया कि मिसिंग रिपोर्ट है कि नहीं फिर महेश को कॉल किया ।
महेश और रेवती फ्लाइट ले अगले ही दिन पहुंच गए।पुलिस स्टेशन में राहुल के साथ राजन भी था पुष्टि होने पर पुलिसवालों ने फॉर्मेलिटी पूरी कर राहुल को उसके माता पिता को सौंप दिया।महेश और रेवती राजन को धन्यवाद दे रहे थे।राहुल रो रहा था और अपने किये की माफी माँग रहा था।
वो सब अगले दिन की गाड़ी पकड़ घर लौट आये ।राहुल को नॉर्मल होने में टाइम लगा उसने देखा मां पापा कितने कमज़ोर हो गए है। प्रीति ने राहुल को बताया दादा जी की सर्जरी के लिए पापा ने किसी से पैसे लिए थे जो उन्हें चुकाने थे पर तुम्हारे कारण मां की चूड़ियां भी बिक गई देख रहे हो आज वो किस हालत में हैं लोगों के ताने बाते उन्हें अंदर तक तोड़ गई।
मै बहुत बुरा हू मैने सबको जख्म दिया है कभी ना भरने वाला मै बुरा हू।रेवती अंदर आते हुए बोली जो बीत गई सो बात गई इस सबक से तुमने भी कुछ सीखा होगा उम्मीद करती हूं फिर पढ़ाई पूरी करो और गलत संगत में मत जाना ।राहुल जी जान से दसवीं की पढ़ाई करने लगा इस बार उसने जिले में टॉप किया
और घर आकर बोला जो जख्म मैने दिये थे उन पर मरहम भी मै ही लगाऊंगा आप मुझ पर भरोसा करे।और राहुल साथ साथ बच्चों को मोबाइल गेमिंग के नेगेटिव इफेक्ट्स भी बताता और अपने एग्जाम्पल से समझाता कि क्या बुरे परिणाम हो सकते है।दोस्तो ये कहानी एक सबक है राहुल भाग्यशाली था
कि परिवार में लौट आया हर किसी को यह मौका नहीं मिलता।बच्चों को इस जंजाल से दूर रखने की जरूरत है उन्हें समय देकर उनकी संगत और दोस्तों के बारे में जानना जरूरी है।बच्चों को समय दीजिए और उन्हें इस दलदल में फंसने से रोकिए।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी