सलोनी अगली बार से ऐसा मत बोलना। तुम मेरी दोस्त हो, तुमने ऐसा कैसे सोच लिया कि मैं यह देखूंगी तो हमारी दोस्ती में फरक आ जाएगा। उदास प्राची ने बोला।
सलोनी बोली पर…पर… प्राची उसकी बात को काट कर बोली पर वर कुछ नहीं, इतना मत सोचा कर।
*एक हफ्ते पहले*
प्राची बहुत खुश थी और हो भी क्यों न आखिर उसका जन्मदिन जो आने वाला था।
मां मां कहा हो आप मुझे आपसे बात करनी है। प्राची स्कूल से घर आते ही अपनी मां को ढूंढते हुए बोली। उधर उसकी मां जब आई तो पूछती है “क्या हुआ बेटा? आज स्कूल में कुछ हुआ क्या? उसकी मां ने तोड़ी चिंतित आवाज में पूछा।
नहीं मां ऐसा कुछ भी नहीं है, मैं बहुत खुश हू और मुझे आपसे अपने जन्मदिन की पार्टी के लिए बात करनी थी। प्राची ने उत्सुकता से बोला।
प्राची की खुशी देख उसकी मां के चेहरे में मुस्कान आ गई और पूछती है जैसा तुम चाहती हो वैसे ही हम तुम्हारा जन्मदिन मनाएंगे।
प्राची खुशी खुशी आँखें में एक चमक लिए अपने जन्मदिन का बता रही थी कि उसको चाकलेट केक चाहिए और वो अपने सारे दोस्तों को बुलाएगी साथ ही में उसने डेकोरेशन के बारे में बताया कि वो हर चीज कहा कैसे चाहती है।
दो दिन के बाद…
बेटा ये अपने जन्मदिन के इन्विटेशन कार्ड देख लो आ गए है, कोई कमी हो तो अभी देख लेना। प्राची की मां उसको अपने कमरे से नीचे बुलाते हुए बोली।
नहीं मां सब ठीक है और आप दुनिया की सबसे अच्छी मां हो, मेरा सबसे बड़ा उपहार तो आप ही हो… नीचे आती हुई प्राची हंसते हुए बोली।
शाम हो गई थी और सब के घरों में खत खत करती प्राची अपने हसमुख चेहरे से सबको इन्विटेशन कार्ड दे कर बोल रही थी मेरे पार्टी में जरूर आए… उनमें से एक घर उसकी एक दोस्त सलोनी का भी था। सलोनी बहुत प्यारी और नेक दिल लड़की थी पर उस के पिता के देहांत के बाद उनकी आर्थिक स्थिति इतनी ठीक नहीं थी और उसके बड़े भाई ने सलोनी की पढ़ाई के लिए जॉब ले ली थी।
प्राची उसके घर की घंटी बजाई और सलोनी बाहर आई और उसको हंसके गले लगाकर कहा मेरे जन्मदिन पर जरूर आना। मुझे तुम्हारा इंतजार रहेगा। सलोनी ने जब कार्ड देख तो वो तोड़ा सोच में पढ़ गई और निराश होके बोली… प्राची तुम्हे जन्मदिन की ढेर सारी बधाईयां पर मैं तुम्हारी इस पार्टी में नहीं आ पाऊंगी। प्राची ये सुनते ही चौंक सी गई, उसको समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है… पर क्यों सलोनी क्या तुम उस दिन यहां नहीं जो क्या? सलोनी बोली प्राची मैं यही हू बस बात यह है कि तुम मेरे घर के आर्थिक स्थिति को जानती हो और इन हालातों में मैं तुम्हे कुछ महंगी चीज नहीं दे पाऊंगी। मुझे माफ करना… सलोनी ने निराश होते हुए कहा। सलोनी अगली बार से ऐसा मत बोलना। तुम मेरी दोस्त हो, तुमने ऐसा कैसे सोच लिया कि मैं यह देखूंगी, तो हमारी दोस्ती में फरक आ जाएगा। उदास प्राची ने बोला।
सलोनी बोली पर…पर… प्राची उसकी बात को काट कर बोली पर वर कुछ नहीं, इतना मत सोचा कर।
चल अब मैं चलती हू और मेरे जन्मदिन पर आना जरूर, मुझे अच्छा लगेगा… यह बोलकर प्राची अपने घर खुशी खुशी चली गई।
*जन्मदिन का दिन*
घर पर सारी तैयारियां हो गई है पर अब तू त्यार होना बची है, जा जल्दी जाके त्यार हो जा प्राची की मां ने प्राची को प्यार से बोलते हुए कहा।
धीरे धीरा प्राची के दोस्त आना शुरू हो गए थे, उधर प्राची फूलों जैसे गाउन में आई पर उसके चेहरे में खुशी के साथ तोड़ी बेचैनी भी थी क्योंकि उसको सलोनी कही नहीं दिख रही थी। सब आ गए थे तो उसने केक काटा और सबको खिलाया। पार्टी अच्छी खासी चल रही थी पर प्राची अभी भी सलोनी का सोच रही थी। कुछ घंटे बाद पार्टी खत्म होने को आई और सब जाने लगे थे। तभी उसने देखा सलोनी डरते डरते आ रही है जैसे पता नहीं क्या हो गया हो। एकदम से उसका डर गायब हो गया जैसे ही उसने प्राची को देखा घर के बाहर, उसके पास जाके सलोनी इधर उधर देख के बोली मैं ज्यादा कुछ नहीं ला पाई और अपने स्वेटर में से एक छोटे से लड्डू गोपाल जी निकाले और एक बर्थडे कार्ड निकाल कर उसको हैप्पी बर्थडे विश किया। लड्डू गोपाल जी को देख के प्राची की आँखें नम हो गई और बोली सलोनी तुम्हे लग रहा है कि यह बहुत छोटा उपहार है पर यह दुनिया का सबसे बड़ा उपहार है और *उपहार की कीमत नहीं नियत देखी जाती है*। धन्यवाद इतने खूबसूरत उपहार के लिए।
सलोनी की जान में जान आई जैसे किसी ने उसके गले से अपना हाथ हटा कर उसको आजाद कर दिया हो।
दोनों गले लगे और प्राची ने उसको अपने घर पर बुलाया और अपने जन्मदिन का जश्न मनाया।
लेखिका
तोषिका