स्वार्थी – खुशी

रागिनी अपने चार भाई बहनों में सबसे बड़ी थी।पिता जी बैंक में थे और मां गृहिणी अच्छा परिवार सब को एक दूसरे से प्यार था ।रागिनी बारहवीं में थी।उससे छोटा नवीन दसवीं में उससे छोटी रमा सातवीं में और सबसे छोटा हेमंत 2 में। दादा जी का अपना चार कमरों का मकान था

जो पिताजी के नाम वो कर गए थे रिश्ते में बस एक बुआ और दूर के चाचा थे।मां के मायके में एक मौसी और मामा ,नानी थे।आज रागिनी की परीक्षा का आखिरी पेपर था।उसके साथ पढ़ने वाला अनूप और वो दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे।अनूप हमेशा कहता नौकरी लगते ही तुम्हारा हाथ मांग लूंगा

और शादी कर लेंगे।रागिनी कहती पहले कुछ बने तो सही ।रागिनी घर पहुंची आज वो खुश थी कि चलो परीक्षा खत्म हुई।नवीन के भी इम्तिहान खत्म हो गए थे तो वो भी आजकल अपनी इंजिनियरिंग कॉलेज की एंट्रेंस की तैयारी कर रहा था।एक दिन दफ्तर से आते हुए रागिनी के पिता सारंग का रोड एक्सीडेंट हो गया

15 दिन वो जिंदगी की जंग लड़ते रहे और प्राण त्याग दिए।घर में कोहराम मच गया मां सरस्वती तो टूट गई बच्चे बेहाल थे सभी को संभलने में वक्त लगा फिर सरकारी नौकरी होने की वजह से अनुकंपा पर रागिनी को नौकरी मिल गई उसके अपने सपने चूर हो गए कहा वो मेडिकल पढ़ना चाहती थीं कहा वो बैंक में लग गई

उसने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई पूरी की और आगे बढ़ती गई उधर अपने भाई बहन की पढ़ाई भी पूरी करवाई सारे घर को वही संभाल रही थी।इसी सब में 15, साल गुजर गए आज रागिनी का 33 वा जन्म दिन था और छोटे भाई हेमंत का 12 वीं का रिजल्ट आया था।।

घर में सब सेटल हो गए थे नवीन इंजिनियर बन चुका था और एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी करता था उससे छोटी रमा कॉलेज में प्रोफेसर थी।हेमन्त बारहवीं कर रोबोटिक्स की पढ़ाई करना चाहता था।मां ने नवीन से बात की बेटा बहन 33 साल की हो रही हैं

उसकी शादी करनी है लड़का देखे ।मां अगर दीदी की शादी कर दोगी तो घर का खर्चा कौन चलाएगा और अभी हेमंत पढ़ रहा है उसका इतना सारा खर्चा कौन उठाएगा। सरस्वती चुप हो गई नवीन अपने दफ्तर में काम करने वाली नंदिनी को पसंद करता था

उसने रागिनी से कहा दीदी आप मेरा रिश्ता नंदिनी के घर ले जाइए।रागिनी खुशी खुशी रिश्ता ले गई बड़ी धूम धाम से शादी हुई ।उसी के अगले साल रमा ने भी अपने सहकर्मी रवि से शादी कर ली दोनो सेटल हो गए और रमा की उम्र 40 साल हो गई हेमंत रोबोटिक इंजीनियर बन गया और उसको प्लेसमेंट में भी अमेरिका में मिली थी।

हेमंत अपनी राह बढ़ गया और रागिनी के ऊपर कर्जा छोड़ कर।मां का स्वर्गवास हो गया।नवीन दो बच्चों का पिता बन गया रागिनी घर बाहर सब देखती पूरा खर्चा उठाती कर्जा चुकाती कभी नवीन नहीं पूछता कि दीदी आपको किसी चीज की जरूरत तो नहीं नवीन और नंदिनी शाम को घूमने जाते तो बच्चे उसी के सर पर छोड़ जाते।

नंदिनी हमेशा नवीन को कहती इसका भाई बहन सब चले गए अपना मतलब निकाल कर तुम भी इसे निकालो और घर अपने नाम करवा लो।नवीन बोला तुम पागल हो बच्चों की फीस दीदी भर्ती है इतना महंगा स्कूल है तभी हम सेविंग कर पा रहे हैं घर का खर्चा वो उठाती है राशन,बिल आदि आराम से रहो हा घर मै गाहे बगाहे अपने नाम करवा लूंगा।

एक दिन रागिनी बैंक से निकल रही थी अचानक ही वो किसी से टकराई वो और कोई नहीं अनूप था।अनूप बोला रागिनी तुम ।रागिनी बोली तुम यहां कैसे ।चलो कही बैठ के बात करते हैं दोनों पास की काफी शॉप में आ बैठे।अनूप ने पूछा रागिनी कैसी हो? ठीक हूं और तुम कैसे हो घर परिवार कैसा है? बीवी बच्चे ।

अनूप बोला रागिनी जब तुम्हारे पिताजी का देहांत हुआ याद है मै तुमसे मिलने आया था फिर रिज़ल्ट आया और तुम पिताजी की जगह बैंक में लग गई और मैं मेडिकल की पढ़ाई के लिए दिल्ली चला गया वहां मेरिट के कारण मुझे सरकारी अस्पताल में एडमिशन मिल गया

और मैने पढ़ाई पूरी की और दिल्ली में ही डॉक्टर लग गया इतने सालों बाद कैसे यहां आना हुआ।पिताजी का देहांत हो गया बहन की शादी हो गई अब यहां का घर बंद पड़ा है बस उसे ही बेचने आया था।अच्छा तुम्हारे परिवार में कौन कौन है? परिवार बहन मंजू के दो बच्चे है

वो दिल्ली में है जीजाजी रोहित डिफेंस में है वही मेरा परिवार है क्यों तुमने शादी नहीं की नहीं तुम जो नहीं मिली मैने तुम्हे कितने खत भेजे तुमने एक का जवाब नहीं दिया।तुम्हारा ३३ वा जन्म दिन था मै तब यही था तुम्हारे घर आया था तो तुम्हारे भाई और मां की बात सुनी थी कि तुम कमाने की मशीन हो इसलिए तुम्हारा भाई तुम्हारी शादी नहीं करना चाहता था।

अनूप क्या कह रहे हो मेरे भाई ऐसे नहीं हैं।तुम्हे मेरी बात का यकीन नहीं है तो तुम आजमा लो करो घर में शादी की बात करके तो देखो।रागिनी ये सब सुनकर बहुत उदास हो गई और उसे कही ना कही अनूप की बाते झूठी लग रही थी।रागिनी घर आई तो बाहर तेज तेज बोलने की आवाज आ रही थी वो दबे पांव अंदर आई और उनकी बाते सुनने लगी ।

हेमंत वीडियो कॉल पर था रमा और नवीन बैठे थे नंदिनी के बोलने की आवाज आ रही थी हेमन्त तेरा तो इस घर में कोई हिस्सा नहीं है तू पढ़ी पूरी करके दीदी पर सारा बोझ डाल कर चला गया क्या कहता था तू पढ़ कर मै लोन चुका दूंगा

अब क्या ।भाभी आप तो बोलो मत तुमने थोड़ी पैसा दिया है दी ने दिया है और रमा दी कि शादी का खर्चा आपकी शादी का खर्चा आपके बच्चों की पढ़ाई घर का खर्चा वही तो उठाती हैं तो तुम तो फायदे में ही हो।अरे चुप रहो हम सबने अपने मतलब निकाल लिया है।

अब ये घर मै अपने नाम पर करवा लेता हूं इसे बेच मै अपने फ्लैट में शिफ्ट हो जाऊंगा।तुम दोनों के अकाउंट में तुम्हारा हिस्सा डाल दूंगा अब सुनो मैं दीदी को कहूंगा कि मुझे पैसों की जरूरत है इस लिए हम ये घर बेच देते है।हेमन्त बोला अरे दी कहा रहेंगी  तुम्हारे साथ अरे नहीं वो कही भी रह लेगी गर्ल्स हॉस्टल या पीजी कमाती तो है

और उसकी सैलरी अरे बच्चों की फीस और उनके छोटे मोटे खर्चों में ले लूंगा।नंदिनी बोली हा भाई मैं भी आजाद हो कर रहना चाहती हूं।रागिनी गिरते गिरते बची और वो अपने कमरे में आ गई खुद से ही कुछ फैसला करके उसने वकील को मैसेज कर अगले दिन का टाइम लिया।

अगले दिन वो बैंक पहुंची तो अनूप वही मिला क्या हुआ रागिनी ने अनूप को सारी बात बताई और बोली मैने घर बेचने का फैसला कर लिया है अब मै किसी को भी अपने स्वार्थ के लिए इस्तिमाल नहीं करने दूंगी। शाम को रागिनी घर पहुंची तो रमा निकलने वाली थी

बोली रुक और जरा हेमंत को भी लाइन पर ले ले।नवीन बोला क्या हुआ दीदी मै यह घर बेच रही हूं और शादी कर रही हूं।क्या पागल हो गई हो इस उम्र में शादी बुढ़िया को जवानी सूझ रही है नंदिनी बोली ।नवीन बोला दीदी आप इतना स्वार्थी कैसे हो सकती है आप तो अकेली हो हमारा तो परिवार है हमे सड़क पर क्यों ला रही है।

हा हो गई हूँ मै स्वार्थी तुम्हारा परिवार है तुम्हारी जरूरत है तुम्हारे खर्चे है तुम्हारे बच्चे है तुम लोगों के लिए ही तो मै जी रही थी पर अब मै अपने लिए जी ऊंगी।और मै तुम्हारी तरह स्वार्थी नहीं हूं तुम तीनों के अकाउंट में तुम्हारा हिस्सा पहुंच जाएगा दो दिन के अंदर ये घर खाली कर देना वो अपने कमरे में आई अगले 15 दिन घर बिक गया और प्रमोशन ले कर रागिनी दिल्ली आ गई वहां अनूप की बहन के इसरार पर दोनों विवाह बंधन में बंध गए।

भाई बहनों ने संबंध खत्म कर दिए क्योंकि अब उन्हें कुछ मिलना नहीं था एक महीने बाद तीनों के अकाउंट में 10 लाख रुपए डाल दिए गए और नवीन को 10 लाख और मिले बच्चों की पढ़ाई के लिए और 5 लाख रमा को उसकी बेटी के लिए दिए।आखिर तक सब की जरूरत पूरी करते हुए वो अपने कर्तव्य से मुक्त हो गई अपनी जिंदगी जीने के लिए।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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