सपने – रेखा जैन

“कुसुम चाय बन गई क्या?” सुबह सुबह में सासु मां की तीखी आवाज आई।

“लाई मां, बस जरा अनु का टिफिन पैक कर लूं फिर मैं आपको आपकी चाय देती हूं!” 

“लो सुबह सुबह में इस लड़की के पढ़ाई के नाटक शुरू हो गए। जाने कौनसी कलेक्टर बनाएगी इसे! इतना ज्यादा लड़कियों को नहीं पढ़ाना चाहिए। ज्यादा पढ़ लिख कर लड़कियां ऊंची उड़ने लग जाती है। अपने आगे किसी को कुछ समझती नहीं है। मैने तो कितनी बार कहा है, जल्दी से अच्छा लड़का देख कर इसकी शादी कर दो, लेकिन कोई सुने तो न!” रोज की तरह कुसुम की सास शांति देवी की बड़बड़ चालु हो गई।

कुसुम उनकी बातों को अनसुना कर अपने काम में लगी रही। बड़ी बेटी अनु जो बारहवीं में कक्षा में है, उसे टिफिन दे कर स्कूल रवाना करने के बाद वो छोटी बेटी बुलबुल जो आठवीं में है उसको स्कूल भेजने की तैयारी करने लगी। उसकी परीक्षाएं चल रही है इसलिए उसकी एक एक चीज संभाल कर उसे देती जा रही थी।

एक नजर में उस घर सब कुछ शांत लगता है। लेकिन फिर भी वहां एक अदृश्य धागा है जो सबको एक डर में बांधे हुए है और वो है शांतिदेवी का “इज्जत” का धागा और उस धागे के बोझ के आगे सबके सपने और इच्छाएं दबी हुई है।

“हम इज्जतदार लोग है” ये वाक्य शांतिदेवी की जुबान पर इतना ज्यादा चढ़ा हुआ है कि सबकी इच्छाएं और सपने उसके बोझ तले दब गए है। शांतिदेवी के आगे कुसुम के पति राजेंद्र जी भी कुछ बोल नहीं पाते है। घर में शांतिदेवी का ही कानून चलता है।

अनु बारहवीं के बाद डॉक्टर बनना चाहती है लेकिन शांतिदेवी का मानना है कि लड़कियों को ज्यादा नहीं पढ़ाना चाहिए। वो लड़कियों की जल्दी शादी करने के पक्ष में है।

एक बार कुसुम ने दबी जुबान से अनु की डॉक्टर बनने की इच्छा घर में बताई तो शांतिदेवी तुरंत उखड़ गई और गुस्से से बोली,

“हम इज्जतदार लोग है। हमारे घरों की बहु बेटियां ना तो बाहर पढ़ने जाती है और ना ही नौकरी करने।ज्यादा पढ़ने वाली लड़कियां बाहर जा कर क्या गुल खिलाती है, जानती हो? बस बहुत पढ़ा लिया अनु को। एक दो साल में अच्छा घर परिवार देख कर उसकी शादी कर दो। लड़की ससुराल में जा कर सबके साथ मिलजुल कर रहे तो ही हमारी इज्जत रहेगी। ज्यादा पढ़ाओगे तो हमारी नाक कटवा देगी! बेटियों की इज्जत उनके संस्कारों से है।”

सास के कटाक्ष सुन कर कुसुम खून के घूंट पी कर रह गई। और अनु का रो रो कर बुरा हाल हो गया।  

 फोन की घंटी बजी तो कुसुम अपने ख्यालों से बाहर आई। उसने फोन उठाया,

“हम अनु की स्कूल से बोल रहे है,,अनु ने बारहवीं में स्कूल टॉप किया है!” सुन कर कुसुम की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। 

घर में बधाई देने के लिए मेहमानों का तांता लग गया। खुशी और गर्व से कुसुम के पैर धरती पर नहीं टिक रहे थे।

सब मेहमानों के जाने के बाद शांतिदेवी बोली,

“हो गया पढ़ने का शौक पूरा!! अब एक दो साल में अच्छा घर वर देख कर इसके हाथ पीले कर दो, इसी में हमारी इज्जत है!”

तब कुसुम पहली बार आंख से आंख मिला कर आत्मविश्वास के साथ बोली,

“मां!! अब तो अनु डॉक्टर बन कर रहेगी। अगर आपको इसकी पढ़ाई से एतराज है तो मैं अपनी दोनों बेटियों को ले कर अलग रह जाऊंगी लेकिन आपकी इज्जत के लिए अपने बच्चों के सपनों को नहीं कुचलने दूंगी!”

कुसुम का टका सा जवाब सुन कर शांतिदेवी सकते में आ गई। 

सच ही है एक मां के आगे कोई कानून नहीं चलता है।

कुसुम ने अपने गहने बेच कर अनु की फीस भरी क्योंकि राजेंद्र जी मैं अपनी मां के खिलाफ जाने का साहस नहीं था।

कुसुम के त्याग और अनु की मेहनत से कुछ सालों बाद अनु ऑर्थोपेडिक सर्जन बन गई।

कई दिनों से शांतिदेवी के घुटनों में बहुत दर्द था। कई बार उनके मन में अनु को बताने का विचार आता लेकिन अपने ईगो के कारण वो उससे बोल नहीं पाती थी।

एक दिन दर्द बहुत ज्यादा बढ़ गया तो वो धीरे धीरे अनु के पास गई।

“अनु बेटा!! कई दिनों से मेरे घुटनों में बहुत दर्द है। तेरे पास कोई दवाई हो तो दे दे!” वो कराहती हुई बोली।

“दादी दवाई तो मैं दे दूंगी लेकिन कल मेरे साथ आप अस्पताल चलना, वहां आपके घुटनों का एक्स रे करवा लुंगी जिससे आगे क्या इलाज करना है ये पता चलेगा!”

दूसरे दिन अनु दादी को अपने साथ अस्पताल ले गई और वहां एक्स रे करवाया जिसमें पता चला कि उम्र की वजह से उनके घुटनों की हड्डियां घिस गई है और उनको घुटनों के ऑपरेशन की जरूरत है।

कुछ दिनों बाद अनु ने ही अपनी दादी के घुटनों का ऑपरेशन किया। अनु की देखरेख में दादी कुछ ही दिनों में तंदुरुस्त हो कर चलने फिरने लगी।

एक दिन दादी ने अनु को अपने पास बुलाया और प्यार से अपनी गोद में उसका सर रख लिया। उसे लाड़ करते हुए बोली,

“लाडो!! इज्जत और इज्जतदार का मतलब तुने बहुत अच्छे से मुझे समझा दिया है। अब तेरी शादी जब तु कहेगी तब करूंगी और जहां कहेगी वहां ही करूंगी,,मुझे इज्जत से ज्यादा तेरी खुशी प्यारी है!”

दादी की बात सुन कर अनु ने सुकून के साथ दादी की गोद में आंखे मूंद ली।

रेखा जैन

#इज्जतदार

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