“ यूं रूठो न हसीना, मेरी जान पे बन जाएगी”
पार्क के एक कोने में पेड़ों की ओट में बैठे आर्यन ने एकता के आने पर जब हौले से ये गीत गुनगुनाया तो वो धीमे से मुस्करा दी। सच में ही वो पिछले हफ्ते से आर्यन से नाराज चल रही थी। दोनों एक ही आफिस में काम करते थे। आर्यन और एकता की आपस में गहरी दोस्ती थी या उससे कुछ आगे , अभी वो दोनों ही ये समझ नहीं पाए थे। दोनों ने आपस में कभी भी प्यार का ईजहार नहीं किया था, लेकिन न जाने क्यों एकता का आफिस की हर लड़की से आर्यन का हँस हँस कर बोलना पंसद नहीं था।
आर्यन ने कई बार अपनी सफाई देते हुए कहा भी कि यह उसकी आदत है, उसका मजाकिया स्वभाव है, वो सिरफ लड़कियों से ही नहीं , हर मर्द औरत से ही खुशी से मिलता है। हंसते रहो हंसाते रहो तो जीना आसान हो जाता है, वरना तो समय किस के पास है, हर कोई अपना काम करने आता है।
अब धीरे धीरे एकता भी समझने लगी कि ये आर्यन की आदत है, और सच पूछो तो वो उसकी इसी आदत पर फिदा थी। वैसे एकता आर्यन से सीनीयर थी, परंतु इससे क्या फर्क पड़ता है, आजकल तो शादी के मामले में लड़कियां कई बार उम्र में भी बड़ी होती है, लेकिन अपनी अपनी सोच है।
जितनी दोस्ती आर्यन की एकता से थी, वैसे बाकी किसी से तो नहीं लेकिन एकता को कई बार लगता कि वो सिया के काफी करीब है। दरअसल एक तो ये उम्र और फिर आजकल का माहौल, अब वो जमाना तो रहा नहीं कि लड़का लड़की आपस में बात भी कर ले तो कई बार तो गल्त मतलब निकाल लिया जाता।
वैसे तो आजकल कई बड़े बड़े कारपोरेट आफिसों में लंच की फरी में या बहुत कम रेट पर सुविधा है, लेकिन कई लोग घर का खाना ही पंसद करते हैं।आर्यन तो हमेशा लंच वहीं पर करता क्यूकिं उसका घर दूसरे शहर में था। यहां पर शायद तीन चार लड़कों ने मिल कर फ्लैट किराए पर लिया हुआ था। सब लड़के अलग अलग जगहों पर काम करते थे
एकता घर से खाना लाती तो कुछ ज्यादा ही ले आती तो कई बार आर्यन भी शेयर कर लेता। सिया, नीलू, रीना, तेजस्वी के इलावा और भी ये आठ दस लोग एक ही प्रौजक्ट पर काम कर रहे थे। एकता हैड थी और बाकी सब बाद में ब्लकि आर्यन से तो दो लोग और भी सीनियर थे। सब अठाईस तीस के उम्र के रहे होगें और सब कुवारें थे।
एकता , आर्यन को काफी पंसद करती थी, वैसे तो सब ठीक था लेकिन दो बाते थी जिनसे एकता के मन में सशंय रहता, एक तो वो उसकी बिरादरी का नहीं था और दूसरा वो सीनीयर थी तो उसे लगता था कि पुरूषों के अहंम को कई बार ये बात हजम करनी भी मुशकिल होती है।
वो कई बार आफिस के बाद चाय काफी पीने या मूवी देखने भी चले जाते थे लेकिन पिछले हफ्ते एकता ने आर्यन से कुछ दूरी बनाए रखी। दरअसल उसने सिया को उसके साथ रात को आठ बजे बाईक पर बैठे देखा, बाईक पर बैठना कोई बुरी बात नहीं थी, लेकिन हर बात सांझा करने वाले आर्यन ने उसे दो दिन तक नहीं बताया कि वो सिया के साथ कहां जा रहा था, जब कि सिया अपनी स्कूटी पर आती थी। जब एकता ने पूछा तो हड़बड़ाते हुए से उसने कहा कि वो उसकी स्कूटी खराब थी, जबकि अगले दिन सुबह वो स्कूटी पर आई थी, तो क्या स्कूटी रात को ठीक करवा ली गई थी।
आफिस टाईम तो सुबह नौ से छः का था परतुं आजकल प्राईवेट दफ्तरों में समय सीमा का सिस्टम और है, कभी पूरी रात भी बैठे रहते है तो कई बार आन लाईन काम भी होता है। प्रौजैक्ट पूरा होना चाहिए।
बहुत मनाने के बाद आज एक हफ्ते बाद जब एकता उससे मिलने आई तो आर्यन के मुँह से गाना सुनकर वो मुस्करा दी थी।जब आर्यन ने ये कहा कि वो उस समय प्रौजेक्ट के सिलसिले में ही सिया के साथ गया था, वापसी पर सिया ने अपनी स्कूटी ले ली थी।पार्क से वापसी पर जब वे बाहर निकले तो बाते बाते करते करते एकता का पल्लू वहीं गुलाब की टहनी में फंस गया। आर्यन पल्लू निकालते हुए बड़ी अदा से बोला, कहो तो ये पल्लू जिंदगी भर के लिए थाम लूं,
चलो हटो, शैतान कहीं के, बातें बनाना तो कोई तुमसे सीखे।दोनों और से प्यार का इजहार शुरू हो चुका था, उधर प्रौजैक्ट पर जोरो शोरों से काम चल रहा था। अगले हफ्ते विदेश के क्लाईंट के सामने प्रैजनटैंशन थी। आठ दस लोगों में जिसकी प्रैजैनटैंशन पंसद आ गई उसकी बहुत बड़ी प्रमोशन होने वाली थी और उसे कंपनी की तरफ से शायद बाहर भी जाने का मौका मिलता।यानि की अपनी प्रतिभा दिखाने का सही मौका था।
टीम लीडर एकता के इलावा सिया, आर्यन , तेजस्वी वगैरह दस लोगों में अंदर ही अंदर होड़ लगी हुई थी। सब अपनी तैयारी गुप्त रूप से कर रहे थे, लेकिन आर्यन की चालों से अनजान एकता उसकी मीठी मीठी बातों और साजिशों में फंसती जा रही थी। दोपहर के बाद एकता को बास के साथ कहीं मीटिंग पर जाना था तो उसने अपना सामान वगैरह अल्मारी में रख दिया, तभी आर्यन वहां आया और पूछा कि क्या वो कहीं जा रही है। उसने हां कहा तो वो बोला, मैं तो कुछ देर के लिए तुम्हारा लैपटाप लेना चाहता था, मेरा शायद हैंग हो गया है, पर चलो कोई बात नहीं, किसी और से बात करता हूं।
अरे नहीं, तुम ले लो, मेरा काम तो फोन से चल जाएगा।लेकिन तुम्हारी अनुपस्थिति में और फिर पासवर्ड —अपनी बात बीच में ही छोड़ते हुए आर्यन बोला। कोई बात नहीं, पासवर्ड मैसेज कर दूगीं, कुछ दिनों में मेरा, तुम्हारा सब हमारा हो जाएगा।और हां काम करके इसे अल्मारी में रख कर ताला बंद कर देना। कल चाबी ले लूंगी। यह कह कर एकता तेजी से बाहर निकली क्यूंकि बास नीचे वेट कर रहे थे।
आर्यन की साजिश काम कर गई। जल्दी से उसने एकता की तैयार गई प्रैजनटेंशन कापी कर ली, और सब वैसे ही रख दिया। दो दिनों बाद विदेशी क्लाईंस से मीटिंग के बाद एकता को ही सफलता और प्रमोशन मिली, क्यूंकि उसका आईडिया ही सलैक्ट हुआ।
आर्यन को काटो तो खून नहीं, पर क्या करता। बुझे मन से सबके साथ उसने भी एकता को बधाई दी। शाम को सब जा चुके तो आर्यन भी जाने के लिए बाईक के पास आया तो एकता वहीं खड़ी थी।मुस्कराते हुए बोली , कैसे हो आर्यन , आज कोई गीत नहीं गाओगे, चलो मैं गाती हूं” मेरे दुश्मन, तूं मेरी दोस्ती को तरसे”, तुम्हें शर्म नहीं आई मेरे लैपटाप से डाटा चुराते हुए। तुम क्यों भूल गए कि मेरे केबिन में हाईटैक कैमरा लगा हुआ है, और मेरे फोन से अटैच है।
टैक्नोलोजी कितनी आगे जा चुकी है, क्या तुम्हें नहीं पता। तुम सेर तो मैं सवा सेर, मैनें सारी प्रैजनटैशनं बदल दी। चलो दफा हो जाओ, रहो सिया के साथ।मुझे तुम्हारे सिया के साथ दोस्ती पर शक था लेकिन विशवास नहीं था। ये तो वक्त रहते मुझे तुम्हारी साजिश और शातिर दिमाग का पता चल गया, वरना शादी हो जाती तो ऐसे आदमी के साथ तो मेरी जिंदगी तबाह हो जाती। यह कह कर वह अपनी स्कूटी की और बढ़ चली।
विमला गुगलानी
चंडीगढ़
विषय- साजिश