सजना है मुझे सजना के लिए – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“यार, इस कोरोना ने तो त्योहारों का मजा ही किरकिरा कर दिया है।”निधि ने अपनी फ्रेंड नीतू से कहा।

“सही कहा।हफ्ता भर बाद ही तो करवा चौथ है, लेकिन ना पार्लर ना शॉपिंग।हर बार तो कितनी धूमधाम होती थी। नीतू ने हाँ में हाँ मिलाई।

“क्या बातें हो रही है?” तभी मीनल ने उनके पास आकर बैठते हुए कहा।

“कुछ नहीं, वही कोरोना। कोरोना के चक्कर में तो करवा चौथ का मजा ही किरकिरा हो गया है। ना कुछ शॉपिंग हुई है,ना ही पार्लर जा पाएंगे।”नीतू ने चिढ़ते हुए कहा।

“अरे!तो ऑनलाइन कुछ परचेज कर ले और पार्लर वाली को घर बुला ले।उसे सेनेटाइज कराके करा ले तुझे जो कराना है।आखिर यही तो मौका है सजना के लिए सजने का। मैंने तो ऑनलाइन ऑर्डर कर दिया है और परसों पार्लर वाली को भी बुलाया है। तुम लोग बोलो तो तुम्हारे पास भी भेज दूँ।”मिनल ने इतराते हुए कहा।

“यार, यह ऑनलाइन शॉपिंग मुझे तो नहीं जमती।कभी फैब्रिक सही नहीं होता तो कभी फिटिंग।हाँ, पार्लर वाली को जरूर भेज देना।”निधि ने कहा।

“हाँ-हाँ, मेरे यहां भी।” नीतू ने कहा।

“ऐसा कुछ नहीं है देखना ऑनलाइन से मंगाई ड्रेस में सबसे खूबसूरत मैं ही लगूँगी।” मिनल ने कहा।

“क्यों ना लगेगी? आखिर तू है ही हमारी कॉलोनी की फैशन क्वीन। नीतू और निधि ने हँसते हुए कहा।

दूसरे दिन मीनल सुबह से बहुत अधीर हो रही थी। वह बार-बार मेन गेट की ओर ताक रही थी।आज उसकी ड्रेस अमेज़ॉन (amazon) से आने वाली थी।

“दो घड़ी शांति से बैठ जाओ। क्यों बेचैन हो रही हो? पार्सल पर तुम्हारा नाम और एड्रेस लिखा हुआ है तो यहां पहुंच ही जाएगा।” उसके पति समीर ने कहा।

तभी डोर बेल बजी मीनल ने भागकर दरवाजा खोला और पार्सल रिसीव किया लेकिन पार्सल खोलते ही उसके तोते उड़ गए। उसके रेड गाउन की जगह 5 साल की बच्ची की ड्रेस थी। यह देख उसने सिर ही पकड़ लिया। यह क्या करूँ?अब इसे एक्सचेंज करा कर नई ड्रेस आते-आते तो करवा चौथ ही निकल जाएगा।अब मैं करवा चौथ में क्या पहनूँगी।अभी कल ही तो मैं सबके सामने बड़ी-बड़ी डींगे मार रही थी। अब सब मेरा खूब मजाक उड़ायेगी। मीनल को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें।

तभी उसका फोन बजा। सामने उसके दीदी थी।

“हैलो”

“हाँ, दीदी बोलो।” मीनल ने बुझी हुई आवाज में कहा।

“क्या हुआ? तू इतनी उदास क्यों लग रही है।” दीदी ने पूछा।

मीनल ने जब उन्हें सारी बात बताई तो वे हँस पड़ी। “क्या दीदी, आप भी मेरा मजाक उड़ा रही हो। तो वे सब तो मुझे बिल्कुल ही नहीं छोड़ेंगी।कोरोना की वजह से मार्केट भी बंद है।अब मैं करवा चौथ पर क्या पहनूँगी?” मीनल ने रुआँसे शब्दों में कहा।

“मुझे तो इस ऑनलाइन के स्यापे के बारे में सुनकर हंसी आ गई और रही तेरी समस्या कि तू करवा चौथ पर क्या पहनेगी? तो उसके लिए कुछ जुगाड़ लगा।अपना दिमाग दौड़ा।”

“क्या मतलब दीदी?”

“मतलब यह कि आजकल सिल्क के गाउन बहुत ट्रेंड में है।कोई भी पुरानी सिल्क साड़ी उठा और उससे गाउन सील ले। यूट्यूब पर एक से एक आईडियाज है। तेरा हाथ तो सिलाई में यूँ ही बड़ा साफ़ है।”

“पर दीदी, मैंने तो एक अरसे से सिलाई मशीन को छुआ ही नहीं। अब तो सब कुछ रेडीमेड मिलता है।”

“पर-वर कुछ नहीं।अपने हाथों से ड्रेस बनाकर अपने साजन के लिए सजने का मजा ही कुछ और है। ट्राई तो कर। इस बार तो मौका भी है और दस्तूर भी।”

दीदी की बात सुन उसने यूट्यूब पर डिजाइंस सर्च करनी शुरू कर दी। डिजाइंस देख उसका भी मन मचल उठा और एक अर्से बाद उसके हाथों ने सिलाई मशीन पर अपना जादू दिखाया और खूबसूरत रेड गाउन बनकर रेडी हो गया।

जब करवा चौथ वाले दिन वह रेड गाउन, रेड बिंदी, रेड लिपस्टिक,रेड चूडियाँ और भर भर हाथ मेहंदी लगाकर सजी तो हर कोई उसे देखता ही रह गया।समीर तो उसे देख आशिकाना अंदाज में गुनगुना ही पड़ा- “आज उतर आया है, चांद जमीं पर मेरे लिए।”

धन्यवाद

लेखिका -श्वेता अग्रवाल,

        धनबाद, झारखंड

शीर्षक-सजना है सजना के लिए

कैटिगरी-लेखक/लेखिका बोनसप्रोग्राम

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