सही की कीमत अक्सर देर से समझ आती हैं – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

कर्मजलि , कलंकिनी , दोनों मां बेटी ने मिलकर जीना हराम कर दिया हैं , मन तो करता हैं दोनों को इस घर से बाहर निकाल फेंकूं , एक इसकी मां हैं जो दिनभर घर से बाहर रहती हैं और एक दूसरी यह इसकी बेटी जो पूरे दिन घर में रहकर मेरी छाती पर बैठकर मूंग दलती हैं , शोभना जी जोर जोर से अपनी पोती रानी पर चिल्ला रही थी !!

सांची ऑफिस से घर के दरवाजे पर ही पहुंची थी कि सास शोभना जी की आवाज से उसके कदम रुक से गए !!

सांची की आंखों से टपटप आंसू बह निकले , अपनी चार साल की बेटी रानी के लिए इतने बुरे शब्द उसे सहन नहीं हो पा रहे थे !!

सांची के लिए उसकी सास शोभना जी का व्यवहार कभी अच्छा नहीं था मगर अपनी पोती को भी वह इतना कड़वा बोलती होगी उसकी भनक सांची को नहीं थी वह भी सिर्फ चार साल की बच्ची के लिए जिसे अभी समझ ही क्या थी ??

सांची जब दीपक से शादी करके इस घर में पहली बार आई थी , तभी से ही सास शोभना जी के कड़वे बोल , ताने , हर बात पर सांची का अपमान करना जारी था , जिसकी शिकायत सांची अपने पति दीपक से भी करती मगर दीपक भी  सांची की बात पर विश्वास नहीं करता क्योंकि शोभना जी दीपक के सामने कभी अपना सास वाला रूप नहीं दिखाती थी !!

सांची जब तीन साल तक मां नहीं बन पाई और उसकी देवरानी गीता उससे पहले मां बन गई तब शोभना जी के मुंह से दीपक ने अपनी पत्नी सांची के लिए बांझ , कुलक्षिणी ऐसे शब्द सुने और दीपक को यह पता चला कि सांची हमेशा सच कहती थी मगर वो ही उसकी बात पर विश्वास नहीं करता था !!

अब तो शोभना जी छोटी बहु गीता और उसके बेटे आरव पर अपना सारा प्यार लुटाती क्योंकि गीता ने उन्हें इस घर का वारिस हाथ में दे दिया था !! सांची का तो अब ओर ज्यादा अपमान होता यह देखकर दीपक ने शहर में अपनी नौकरी का ट्रांसफर ले लिया और वह सांची को भी अपने साथ शहर ले आया !!

शहर आने के बाद सांची की जिंदगी में थोड़ा बदलाव था ,कम से कम वह सुकुन से जी पा रही थी मगर जब जब शोभना जी शहर उनके घर रहने आती तब तब वह फिर कलह , अशांती का वातावरण घर में फैला देती !! सांची भी यह सोचकर चुप ही रहती कि थोड़े दिनों की बात हैं फिर तो सास शोभना जी वापस चली जाएगी !! शोभना जी जब भी यहां आती छोटे बेटे और उसकी पत्नी गीता के ही गुण गाती , खैर सांची के लिए इसमें कोई नई बात नहीं थी और अब तो दीपक भी सारी सच्चाई जानता था !!

एक रोज दीपक जब ऑफिस से घर आ रहा था उसकी कार का भयंकर एक्सीडेंट हो गया जिसमें दीपक की अकस्मात मृत्यु हो गई और दीपक की मृत्यु के पश्चात सांची को पता चला कि वह दो महिने की गर्भवती हैं !! सांची पर तो जैसे दुःखों का पहाड़ घिर गया था , इतने सालो से बच्चे की बहुत चाहत थी मगर खुशखबरी मिली तो भी ऐसे वक्त मिली जब दीपक इस दुनिया से जा चुका था !!

सांची की सात महिनों बाद डिलीवरी हुई और वह अकेले ही अपनी बच्ची को बड़ा करने लगी !! जिस घर को लेने में दीपक ने जी जान एक कर दी थी अब इसी घर का लोन , घर के खर्चे , बच्ची के खर्चे पुरे करने के लिए सांची को नौकरी करने की आवश्यकता लगने लगी और उसने अपनी सास शोभना जी से अपने साथ आकर रहने कहा ताकि वे उसकी बच्ची को घर में देख सके और वह नौकरी पर जा सके !!

सांची ने देखा था कि शोभना जी उसके देवर के बेटे पर अपनी जान लुटाती थी इसलिए उसे विश्वास था कि भले मेरे साथ उनके रिश्ते अच्छे नहीं मगर अपनी पोती का वे जरूर ख्याल रखेंगी !!

 आज सांची का यह भ्रम भी टूट गया था जब उन्होंने चार साल की बच्ची पर अपनी सास को चिल्लाते देखा !!

सांची ने जब शोभना जी को अपने घर आकर रहने का आग्रह किया था तब भी शोभना जी उसके पास काफी समय तक नहीं रहने आई थी और फिर एक रोज अचानक आकर बोली थी कि तु बहुत तकलीफ में हैं इसलिए सोचा आ जाऊं तेरे घर , जबकि बात कुछ ओर थी , सांची को गांव से फोन पर खबर मिली थी कि शोभना जी की हरकतो से तंग आकर देवर देवरानी ने उन्हें घर से निकाल दिया है तब जाकर वह यहां सांची के पास रहने आई थी !!

मगर आज शोभना जी के अपनी बेटी को बोले गए शब्द सांची की भी सहनशक्ति की सीमा पार कर गए थे !! सांची बोली मम्मी , आपको यह हक किसने दिया कि आप मुझे और मेरी बेटी को घर से निकाल देंगी , यह घर मेरे पति ने मेरे नाम पर लिया था और इस घर की मालकिन मैं हूं इसलिए आज मैं ही आपको इस घर से निकल जाने का फरमान सुनाती हुं , आज मैंने सुन लिया है कि किस तरह आप मेरी अनुपस्थिति में मेरी बेटी को इतना सुनाती हैं ,बस अब ओर नहीं !!

शोभना जी भी देखती रह गई क्योंकि आठ साल तक जिस बहू ने उनके सामने कभी अपनी जबान नहीं खोली थी वह आज सास को सीधे घर से निकल जाने का फरमान सुना रही हैं !!

शोभना जी अब ना घर की रही थी ना घाट की !! छोटा बेटा और बहू तो घर से पहले ही निकाल चुके थे अब सांची ने भी घर से निकल जाने कहा था !!

शोभना जी की आंखो से आंसू बह निकले और वह सांची से माफी मांगते हुए बोली सांची बस इस बार माफ कर दे , आगे से कभी शिकायत का मौका नहीं दूंगी , मुझे कम से कम तेरी कीमत तो समझनी चाहिए थी !!

मैंने तुझसे झूठ कहा था कि मैं यहां तेरी मदद के लिए आई हूं , सच तो यह है कि निखिल और गीता ने मुझे घर से निकाल दिया हैं !!

सांची बोली – मम्मी , मैं यह बात उसी दिन से जानती हुं जो आप आज बता रही हैं , आपने भले मुझे कितने भी ताने मारे गगर मैंने आपकी बेजजती नहीं की मगर मेरी चार साल की बेटी ने आपका क्या बिगाड़ा हैं !!

शोभना जी फुट फुटकर रो पड़ी और उनके यह आंसू सच्चे थे , उन्होंने सांची से अपने किए पर माफी मांगी !!

और अब शोभना जी का एक नया रूप सांची के सामने था जो शोभना जी सही लोगो की कीमत पहचानती थी !!

दोस्तों , अक्सर लोगों के साथ बुरा होने पर ही उन्हें सही की कीमत समझ आती हैं !!

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आपकी सहेली

स्वाती जैंन

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