सच्चा प्यार – एम. पी. सिंह

अशोक ओर अलका कॉलेज से ही एक दूसरे क़ो चाहने लगे थे. पहले दोस्त हुआ करते थे, फिर प्रेमी और अब साथ जीने मरने क़ी कसमें खाने लगे. पढ़ाई पूरी होते ही अशोक क़ो नौकरी मिल गई. दोनों ने अपने अपने पेरेंट्स से अपनी अपनी पसंद बता दी. थोड़ी ना नुकुर के बाद, अलका के पेरेंट्स तो मान गये,

पर अशोक की माँ जात पात ओर ऊच नीच का रोना लेकर बैठ गई. अशोक ने अपना फैसला सुना दिया की शादी होंगी तो अलका से वरना कुआरा ही भला. अशोक के घर मेँ शीत युद्ध शुरू हों गया. समय के साथ साथ अशोक की ज़िद के आगे अशोक के माँ पिताजी ने हथियार डाल दिये और दोनों की शादी हों गई.

अलका पड़ी लिखी, समझदार ओर बहुत सुशील थीं, दहेज भी काफ़ी ज्यादा लाई थीं, लेकिन उसकी सासुमा के दिल से दूसरी जाति का दंश नहीं निकाल पाई. समय बीतता गया और सासू माँ की दादी बनने की फर्रमाइश शुरू हों गई. जब शादी क़ो 3-4 साल बीत गये ओर अलका माँ न बन सकी तो सासू माँ के ताने शुरु हों गये.

बहु अगर बच्चा नहीं दे सकती तो तू दूसरी शादी करले. अशोक अपनी माँ की बातें सुनकर परेशान होता परन्तु कुछ बोलता नहीं. अलका भी अंदर ही अंदर घुटती रहती. 

फिर अलका और अशोक ने डॉक्टर की राय लेने का फैसला किया. डाक्टर ने काफ़ी सारे टेस्ट कराये ओर निष्कर्ष निकाला की उनको ओलाद नहीं हों सकती. अशोक ने आकर माँ क़ो बताया की वो पिता नहीं बन सकता. ये सुनकर अशोक की माँ बीमार रहने लगी की बंश आगे कैसे बढ़ेगा ओर कुछ ही महीनों बाद दुनिया से चल बसी. कुछ समय बाद अशोक के पिताजी भी चल बसे 

सूना घर देखकर अब अलका भी खोई खोई सी रहने लगी थीं. अशोक ने अलका के मन क़ो टटोला ओर बच्चा गोद लेने की सलाह दी. अलका ने अपनी बहन की छोटी बेटी मुस्कान क़ो गोद ले लिया. मुस्कान की मुस्कान बहुत प्यारी थीं, उसे देख देख कर अलका भी खुश रहने लगी. मुस्कान बड़ी हों रही थी ओर कॉलेज पहुंच गई. 

अशोक ऑफिस जाने के लिए सफ़ेद कमीज़ ढूंढ रहा था, नहीं मिलने पर अलका तो बुलाया. अलका ने दूसरी कमीज प्रेस करके देदी और घर काम मैं लग गई.

किचन से फ्री होने के बाद अलका ने सोचा की अशोक की अलमारी ठीक से जमा दे. इसी दौरान अलका क़ो कपड़ो मैं दबी हुई एक पुरानी से फाइल मिली, जब उसे खोला तो अंदर पडी एक रिपोर्ट क़ो पढ़कर उसके होश उड़ गये. अशोक ने इतना बड़ा सच आज तक छुपा पर रखा, अलका की आँखों से आँसू रुक नहीं रहे थे, वो घर में अकेली रोये जा रही थीं तभी दरवाजे पर घंटी बजी, देखा तो सामने अशोक था. दरवाजा खोलते ही अलका अशोक के गले लगकर जोर जोर से रोने लगी. ये देख अशोक भी घबरा गया, बोला क्या हुआ. अलका रोते रोते बोली, आपने मुझसे इतना बड़ा झूठ बोला और इतनी इम्पोर्टेन्ट बात छुपाई. अलका उसे उसकी अलमारी तक ले गई और फाइल से लेटर निकाल कर दिखाया. वो लेटर उन दोनों के बच्चा न होने की समय कराये हुए टेस्ट की मेडिकल रेपोर्ट थीं और उसमे साफ साफ लिखा था की अलका कभी माँ नहीं बन सकती.

लेटर देखकर अशोक हसने लगा, अच्छा तो तुम्हे पता चल गया. फिर बोला, मैं तुम्हे अगर सच बताता, तो तुम दुःखी होती, माँ दूसरी शादी या तलाक का दबाव बनाती. मेरे एक झूठ ने तुम्हे सारी परेशनीयों से बचा लिया और घर की शन्ति भी बनी रही. अलका मैंने तुमसे प्यार किया था और सारी उम्र साथ निभाने का वादा किया था, तुन्हे ऐसे कैसे दुःखी होते देख सकता था. इतना कहकर अशोक ने अलका क़ो सीने से लगा लिया. अलका के आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, वो इस रेपोर्ट के मिलने से जितना दुःखी थीं, उससे कहीं ज्यादा ख़ुश थीं, की उसने अर्जुन से प्यार करके कोई गलती नहीं की.

लेखक 

एम. पी. सिंह, कोटा 

स्वरचित, अप्रकाशित 

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