*सबसे गहरा ज़ख्म अपने ही देते है* – तोषिका

आज नियति ने ये साबित कर दिया *सबसे गहरा जख्म अपने ही देते है*। यहाँ इस दुनिया में कोई किसी का अपना नहीं है, रोते हुए पार्क में बैठा रॉबिन बोला, तभी पास से एक आवाज़ ने पूछा “क्या हुआ दोस्त तू रो क्यों रहा है?”

रॉबिन बोला “अब क्या बताऊ मैं तुम्हे, जब उनको मेरी जरूरत थी और उनकी मदद कर पाता था तब तक उन्होंने मुझे घर पर रखा। अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ और इतनी जान नहीं बची तो मुझे घर से निकाल दिया।

मैं तो ये सोच रहा हू कि कभी उन्होंने मुझे अपना समझा भी था?”

तभी एक तीसरी आवाज़ आई ” मैं समझ सकती हूँ, जब आपको घर से निकाल दिया जाता है।”

रॉबिन ने पूछा “तुम्हे क्यों घर से निकाल दिया? आप तो अभी इतनी बूढ़ी भी नहीं हुए है।”

वो बोली “मेरी तबियत खराब रह रही थी, डॉक्टर को दिखाया तो वो बोले कि मुझे लास्ट स्टेज कैंसर है और खर्चा बहुत होगा, इसी के चलते उन्होंने दोखे से मुझे घर से निकल दिया और अब मैं यहाँ एक महीने से ऐसे ही भटक रही हूँ।

रॉबिन और उसके साथ उसका साथी बोला “ये तो बहुत बुरा हुआ, अपने लोग हमेशा ही दोखा दे कर चले जाते है। तुम्हारे साथ क्या हुआ था मित्र? तुम तो एक अच्छे खानदान से लगते हो।

वो रॉबिन के प्रश्न का जवाब दे कि इतनी ही देर में लोग उनको देख कर जा रहे थे, कोई उनकी तरफ आ ही नहीं रहा था।

ये सब देख कर रॉबिन का साथी बोला वो घर से निकाले उससे पहले मैं खुद ही घर से खुद ही निकल गया।

बात बताते बताते वो उस समय में चला गया जब उसके साथ घर में पहली बार दुष्व्यवहार हुआ था। उस ने बताया उस से गलती से महंगा कांच का ग्लास टूट गया था, तो उसको कमरे में बंद कर दिया था। फिर घर पर धीरे धीरे मुझे लेकर झगड़े होने लगे थे, कि मुझे बाहर छोड़ दे या किसी और के घर में। इसी के चलते उनका गुस्सा मेरे ऊपर निकलता था। इतने महीने सहने के बाद उसने सोचा वो खुद ही घर से चला जाएगा क्योंकि वो जहाँ भी जाये फायदा नहीं है, दुनिया अपना ही स्वार्थ देखती है। यह सब बताते बताते वो अपनी दुख भरी यादों से वापिस आया और अपनी नम आँखों से बोला “आज से हम ही एक दूसरे का सहारा है दोस्त, कोई नहीं हम जब तक साथ है ये दिन बहुत आसानी से कटेंगे।

रॉबिन मुस्कुराया और बोला “तुम सही कह रहे हो दोस्त, पर आप दोनों के नाम क्या है?”

पहला बोला मेरा नाम कोको है, फिर दूसरे पर आवाज़ आई “और मेरा नाम लिली है”।

रॉबिन बोला “अरे ये तो बहुत प्यारे नाम है, मेरा नाम रॉबिन है”।

ये सब बातें चल ही रही थी कि एक आदमी अपनी पत्नी को बोलता है “पता नहीं ये कुत्ते इतने देर से वहाँ पार्क में बैठ कर भौंक क्यों रहे है, ज़रा मैं उनको भगा कर आता हू, सारे बच्चे डर रहे है।” 

वहां आकर वो उन तीनों को भगा ही रहा था कि लिली, रॉबिन, कोको ने उसको देख कर गुर्राए और वहां से भौंकते भौंकते भाग गये।

आज कल लोग कुत्तों को घर में रख लेते है और वो हम इंसानों को अपना मान लेते है, पर आखिरी में उनको उन्ही अपनो से ज़ख्म मिलता है, और उन ज़ख्मो को नहीं भर पाता है।

लेखिका

तोषिका

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