रामस्वरूप रोजाना की तरह मेहनत- मजदूरी करके ,शाम को घर लौटे ।घर पर पत्नी अपने रोजमर्रा कामों में व्यस्त थी ।रामस्वरूप के आने का उसे इल्म हो गया ।दौड़ती दौड़ती रसोई घर से पानी का गिलास भरकर, रामस्वरूप के सामने पेश कर दिया ।रामस्वरूप ने थके हाथों से पानी का गिलास पकड़ कर पी लिया
और लंबी सांस लेकर गिलास वापस पत्नी को दे दिया ।पत्नी चली गई। रामस्वरूप चुपचाप बैठा रहा। कुछ समय थकान कम होने पर, वह उठकर मुंह हाथ धोने लगा और मुंह साफ करके चुपचाप चटाई पर बैठ गया । एकाएक उठकर दूसरे कमरे में गया। जहां उसके दोनों बेटे पढ़ाई कर रहे थे।
रामस्वरूप को देखकर वह प्रसन्न हो गए और रामस्वरूप उनकी तरफ बढ़कर उन्हें गले लगा कर दुलार करने लगा। दोनों बेटों ने अपनी-अपनी रोजाना की स्कूल दिनचर्या के बारे में बताना प्रारंभ किया ।रामस्वरूप धीरे-धीरे करके दोनों की हौसला-अफजाई करने लगा।
इतने में पत्नी ने आवाज लगाई कि खाना तैयार है। रामस्वरूप अपने बेटों के साथ रसोई घर में पहुंच गया ।दोनों बेटे तथा रामस्वरूप जमीन पर बैठ गए और उनकी पत्नी ने उनको खाना पड़ोस दिया और स्वयं भी एक प्लेट में लेकर खाने लगी। सभी खुशनुमा माहौल में खाना खा रहे थे ।
एकाएक पत्नी ने अपने पति से कहा कि हमारे दोनों बेटों की पढ़ाई अब पूरी होने जा रही है ।अब हम इन्हें नौकरी के लिए शहर भेज देंगे ।रामस्वरूप ने उसकी तरफ देखकर सर हिला दिया ।खाना खत्म करने के पश्चात दोनों लड़के अपने-अपने कमरे में सोने के लिए चले गए। रामस्वरूप और उसकी पत्नी आपस में बात करने लगे।
रामस्वरूप ने कहा कि क्या बच्चों को नौकरी के लिए शहर भेजना जरूरी है? क्या वह यहां पर मेहनत मजदूरी करके अपना पेट नहीं भर सकते ?इस पर पत्नी ने कहा ।मेहनत मजदूरी अनपढ़ों का काम है ।हमारे बच्चे पढ़े लिखे हैं। उन्हें शहर में अच्छी नौकरी मिलेगी और वह खूब पैसे कमाएंगे। जिससे उनका भविष्य बहुत अच्छा हो जाएगा।
यह सुनकर रामस्वरूप चुप हो गया और चुपचाप सो गया। समय बीत गया और रामस्वरूप के दोनों बेटे पढ़ाई पूरी करके नौकरी के लिए शहर चले गए तथा वहीं पर अच्छी नौकरी करने लगे ।कुछ समय बाद रामस्वरूप ने दोनों बेटों की बड़ी धूमधाम से शादी कर दी ।
दोनों बेटे अपने-अपनी पत्नियों को लेकर शहर में ही बस गए ।रामस्वरूप और उसकी पत्नी दोनों गांव में ही अपना जीवन यापन करने लगे। समस्याएं बेहद आती है परंतु वह अपने बच्चों को कभी भी परेशान नहीं करते ।बच्चे भी अपने परिवार में पूर्ण रूप से खुश थे। रामस्वरूप का बड़ा बेटा राजीव और उसकी पत्नी उमा दोनों के यहां दो बेटियों और एक बेटे ने जन्म लिया ।उधर रामस्वरूप का छोटा बेटा मनीष और पत्नी सीमा के यहां दो बेटियों का जन्म हुआ।
वह भी अपने परिवार के साथ पूर्ण रूप से खुश थे ।कभी कबार छुट्टियों में एक-दो दिन के लिए वह अपने पिता रामस्वरूप और मां से मिलने चले आते परंतु अधिक समय न काटते ।वह वापस शहर चले जाते ।अभी तक सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। समय बिता गया और एक दिन रामस्वरूप का बड़ा बेटा राजीव हादसे का शिकार हो गया। जिसमें उसकी मृत्यु हो गई ।दुखों का पहाड़ राजीव के परिवार पर गिरा।
राजीव की पत्नी हताश हो गई ।दूसरी तरफ रामस्वरूप का छोटा बेटा मनीष अपने बड़े भाई के दुख में लेश मात्र भी भागीदार नहीं बना ।वह अपने सुख में ही मस्त था ।राजीव की पत्नी दुख कि इस घड़ी में परिवार के हर सदस्य को याद करती और याचना करती ।परंतु सास ससुर के अलावा कोई भी उसकी सहायता के लिए आगे हाथ ना बढ़ाता ।हर कष्ट वह अकेले ही सहन कर रही थी।
अब रामस्वरूप और उसकी पत्नी बूढ़े हो चुके थे। वह स्वयं पराश्रित होने की कगार पर थे और एक समय ऐसा आया । पहले रामस्वरूप और फिर उसकी पत्नी का देहांत हो गया। समय का चक्कर चला और रामस्वरूप के छोटे बेटे की पत्नी का देहांत हो गया। अब वह भी दुखों के पहाड़ के नीचे दब गया ।
भाई की पत्नी से क्या उम्मीद करता? क्योंकि पहले ही वह उसके दुख का भागीदार नहीं बना था ।अब वह पूरी तरह से चिंता में डूब गया था। रामस्वरूप के बड़े बेटे का परिवार और छोटे बेटे का परिवार दोनों धन से परिपूर्ण थे परंतु उन्हें सच्चा सहारा देने वाला अपना कोई नहीं था ।आज दोनों परिवारों के पास जरूर से ज्यादा धन होने पर भी कुछ नहीं था ।
वह जिस सच्चे सहारे की तलाश में थे। वह अब खो चुका था। वह उनसे दूर जा चुका था।आज वह परिवार पूर्ण परिवार होता तो शायद दुखों का पहाड़ जो उन पर टूटा है ।वह उसे आसानी से सहन कर लेते परंतु उन्होंने समय पर उस परिवार रूपी धन की कदर नहीं की।
जिस कारण आज वह पूर्ण रूप से एकांत में थे। दोनों परिवार यही सोचते । सिर्फ पछतावा ही उनके हिस्से आता क्योंकि जिस समय व्यक्ति को मुसीबतें पड़ती है यदि उस समय उसका परिवार इकट्ठा हो। तो वह मुसीबतें बिल्कुल हल्की लगती है अर्थात व्यक्ति उन्हें आराम से सहन कर जाता है परंतु जब व्यक्ति अकेला होता है।
तो वह उन मुसीबतों को सहन नहीं कर पाता और धीरे-धीरे टूट जाता है। अगर इन दोनों परिवारों के पास माता-पिता , भाइयों का साथ होता तो इनके पास एकमात्र सच्चा धन जो परिवार है वह होता। किसी ने सत्य कहा है। *संसार में एक ही सच्चा धन है और वह परिवार*
(लेखक- संजय सिंह)