सबसे बड़ा धन परिवार – तोषिका

कुछ दिनों में धनतेरस था प्रिया भागी भागी अपनी मां के पास जाके पूछती है “मां इस बार धनतेरस के लिए हम क्या धन लेने चले सुनार के पास?”

तभी उसकी मां प्यार से समझती हुई बोली “प्रिया बेटा! धनतेरस का मतलब यह नहीं होता कि घर में धन ही आना चाहिए, कुछ लोग नए बर्तन खरीदते है तो कुछ झाड़ू पर मेरा मान ना है *”सबसे बड़ा धन : परिवार”* ही होता है। इससे बड़ा कुछ नहीं।

प्रिया ये सब सुनके निराश हो गई और अपनी मां से गुस्सा होके बोली ” मां साफ साफ क्यों नहीं कह देती कि हमारी इतनी हैसियत ही नहीं है सोना चांदी खरीदने की”। उसकी मां को उसके इन शब्दों से बहुत ठेस पहुंच ही और वो बस इतना ही कह पाई कि बेटा तुम अभी समझ नहीं रही हो वक्त ही तुम्हे समझाएगा, पर तब तक ऐसा न हो कि बहुत देर हो जाए। यह सुनते ही प्रिया भागती हुई अपने रूम में चली गई। तभी वहां पर प्रिया के पिता श्याम आए और उन्होंने अपनी पत्नी से पूछा “क्या हुआ? हमारी लाडली बेटी ऐसे गुस्से में क्यों गई”?

श्याम की पत्नी ने सारी बात बताई और सोचते हुए बोला, मैं जानता हू कि तुम अपनी जगह सही हो और *”सबसे बड़ा धन : परिवार”* ही होता है लेकिन अभी प्रिया बच्ची है उसको यह बात धीरे धीरे समझ आ जाएगी। 

ऐसा नहीं था कि वो सोना चांदी खरीद नहीं सकते थे। बात बस इतनी सी थी कि कंपनी ले ऑफ के बाद श्याम की नौकरी चली गई थी तो वो प्रिया की पढ़ाई के लिए पाई पाई बचा रहे थे और करे भी क्यों ना आज कल इतने खर्चे होते है और वो थे भी मिडिल क्लास फैमिली से।

उधर श्याम का कोमल सा दिल पिघल गया और उसने अपनी पत्नी को बोला हम प्रिया के लिए कुछ लेकर आते है, पैसे हम फिर से जोड़ लेंगे। चलो अब मैं फ्रेश होके आता हू।

*धनतेरस का दिन*

उस दिन प्रिया बिल्कुल बेमन से त्यार हुई थी और इसका कारण दोनों जानते थे। तभी श्याम ने उसको बड़े प्यार से बुलाया “अरे मेरा राजा बेटा, क्या हुआ? इतनी उदास क्यों है आज मेरी राजकुमारी?” इतनी गुस्सा है कि वो अब अपने पापा से भी बात नहीं करेगी? प्रिया अपने पापा की तरफ देख कर बोलती है “पापा! मम्मी को देखो ना हर चीज के लिए मना करते रहते है। कभी हां नहीं बोलती है। श्याम बोला अच्छा ऐसा है, बेटा मैं तुम्हारी बात अच्छे से समझ रहा हू पर इसमें मम्मा की गलती भी नहीं है, उनको आपकी पढ़ाई की फीस की चिंता रहती है और घर खर्च भी निकलना होता है ना इसीलिए बोलती है। पर अभी के लिए यह मुंह फुलाना छोड़ो आज धनतेरस है।

प्रिया कुछ बोले उससे पहले ही श्याम एक गिफ्ट बॉक्स देकर बोला, मेरी सुंदर सी प्यारी सी राजकुमारी के लिए गिफ्ट। प्रिया के चेहरे पे अलग ही खुशी थी, उसने जैसे ही गिफ्ट खोला उसने देखा उसके माता पिता ने उसको चन चन वाली पायल दी है।

श्याम बोला ये पायल तुम्हे इसीलिए दी है ताकि उसकी आवाज पूरे घर में गूंज ती रहेगी और हमारी गुड़िया हमेशा चहैकती रहे।

प्रिया ने अपने पापा को गले लगा कर दिल से धन्यवाद किया, और कहा पापा इसको मैं बहुत संभाल कर रखूंगी।

प्रिया की खुशी देख कर उसके पिता श्याम की आंखों में खुशी के आंसू थे और उधर उसकी मां श्याम को देख कर खुश हो रही थी और मन में सोचती है कितने खुश आज मेरे दो कीमती धन।

अगले ही दिन श्याम नौकरी की तलाश में फिर निकल गया। उसको गए हुए मात्र 2 घंटे ही हुए थे कि अचानक से घर का फोन बजा। फोन श्याम की पत्नी ने उठाया था। जैसे ही उसने हेलो बोला ही था वो अचानक से रोने लगी थी और उसके हाथों से फोन गिर गया था। प्रिया ने जैसे ही अपनी मां को ऐसे जमीन पर बैठके रोते देखा, वो भागी भागी गई और पूछती है “मां क्या हुआ? किसका फोन था? आप रो क्यों रही हो? पापा का फोन है क्या? उनको नौकरी आज भी नहीं मिली इसीलिए आप रो रही है?” 

प्रिया के मन में कई सवाल चल रहे थे। तभी हिम्मत कर के उसकी मां बोली तुम्हारे पापा को हार्ट अटैक आया है और उनको हॉस्पिटल में भर्ती करा गया है। प्रिया यह सुनते ही एक दम से चुप हो गई और उसकी आँखें भर आई। पर अपने आप को संभालते हुए बोली “चलिए मां हॉस्पिटल चलते है, पापा का ध्यान भी तो रखना है।

वो जैसे ही हॉस्पिटल आए उन्होंने रिसेप्शन पर पूछा और उनको पता चला कि डॉक्टर ने उनका ऑपरेशन कर दिया है बस अब पेमेंट करना बाकी है और वो भी आज शाम तक।

प्रिया और उसकी मां को कुछ समझ नहीं आ रहा था तो प्रिया की मां ने बोला कि प्रिया तू टेंशन मत ले, तू यही रुक कर पापा का ध्यान रख, मैं पैसे लेकर आती हू। प्रिया  पूछती है कि इतनी पैसों का इंतजाम कैसे करोगी मां?

उसकी मां ने कहा अपने गहने बेचकर, मेरे लिए तेरे पापा से बढ़ कर कोई और धन माईने नहीं रखता है। यह सुनते ही प्रिया के आंसू निकल गए और उसने सोचा कि मैं इतनी स्वार्थी कब से हो गई थी कि मुझे मेरे माता पिता के प्यार से ज्यादा सोना चांदी से प्यार हो गया? उसकी मां बस जा ही रही थी कि प्रिया ने अपनी  मां को रोका और कहा “मेरे लिए भी कोई और धन माईने नहीं रखता पापा के सामने”। यह बोलते ही उसने अपनी पायल उतार दी और अपनी मां को दे दी और रोते हुए कहा कि तुम सही कहती हो मां *”सबसे बड़ा धन : परिवार”* ही होता है, और यह बात मुझे अब अच्छी तरह समझ आ गई है। ये बात सुनते ही उसकी अपनी बेटी पर बहुत गर्व हुआ।

*कुछ समय बाद*

श्याम अब घर आ गया था और जब उसे पता चला जो प्रिया ने किया। उस बात का उसे बहुत बुरा लगा पर एक तरफ वो गर्व भी महसूस कर रहा था कि उनकी बेटी धीरे धीरे समझदार हो रही है ।

लेखिका तोषिका 

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