साजिश – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

 निधि और पवन शादी के बाद मनाली घूमने चले गए थे और पिछली रात ही वापस घर लौटे थे। पवन की तीनों बहनें और उनके बच्चे अभी घर में ही थे। शायद शादी के बाद तीनों बहनें अभी विदा नहीं हुई थी। पवन परिवार में सबसे छोटा तीन विवाहित बहनों का लाडला भाई था और उसकी तीनो बहनें भी दिल्ली में ही रहती थी। वह दोनों शुक्रवार को आए थे और शायद बहनों की इतवार के बाद अपने घर लौटने की योजना होगी। 

          दूसरे दिन सासू मां ने नाश्ता ऊपर ही पवन के कमरे में भिजवा दिया था और साथ ही यह हिदायत भी दी थी कि हो सकता है आज घर की बहू को देखने के लिए भी कोई लोग आने लगे इसलिए अच्छी तरह से तैयार होकर ही अपने कमरे से नीचे आए। निधि और पवन का कमरा ऊपर था। नीचे बहनों और उनके बच्चों का शोर था। 

        पवन तो चाय नाश्ता करके नीचे चला गया था और थोड़ी देर में बहनों के बच्चे ऊपर खेलते खेलते उसके कमरे में भी आ गए थे। निधि ने अपनी नई साड़ी निकाली और वह अपने कमरे के साथ लगे बाथरूम में नहाने के लिए चली गई।

        कमरे से बाहर आई तो वह एकदम हैरान हो गई। बड़ी दीदी की बेटी उसका बाहर रखा हुआ शादी का लहंगा पहन कर देख रही थी और छोटी दीदी के बच्चे बेड पर ड्रेसिंग टेबल में से निकालकर सिंदूर बिखेर चुके थे और उसके ऊपर नेल पॉलिश और लिपस्टिक से नई चद्दर पर पेंटिंग बना रहे थे।  यह सब देखकर निधि समझ नहीं पा रही थी कि वह कैसे प्रतिक्रिया दे। 

         उसकी आंखों के सामने अब उसकी पिछली जिंदगी घूमने लगी थी। निधि की मम्मी नौकरी करती थी और वह अपनी बेटी को अपनी मम्मी के पास छोड़कर दफ्तर जाती थी। नानी के घर उसकी दो मामियां थी। नानी निधि को बहुत प्यार करती थी बस इसी बात का फायदा उठाकर वह हमेशा

अपनी दोनों मामियों के खिलाफ साजिश करती रहती थी। नानी के पूछने पर मामियां भले ही कोई भी काम करती हो परंतु वह तो यही कहती थी कि मामी तो आराम कर रही है। बड़ी मामी ने जब अपनी बेटी की गुड़िया उसे नहीं दी तो निधि ने चुप करके रसोई में जाकर उनकी बनाई सब्जी में नमक मिर्च

  और भी ज्यादा डाल दिए थे। खाना खाते ही नानी ने बड़ी मामी को बहुत डांटा, क्योंकि नाना और नानी के स्वास्थ्य कारणों की वजह से सब्जी में नमक कम ही डाला जाता था। छोटी मामी की तो वह कानों की बाली चुप कर के उठा कर अपने साथ ही ले गई थी और कई बार वह स्कूल में वह वाली

बाली पहन लिया करती थी, यह तो एक बार मम्मी को जब निधि के बस्ते में से वह वाली बाली मिली तो उन्होंने अपनी भाभी को वह वाली वापस करी। हालांकि निधि तो रोज ही देखती थी कि बाली खोने के बाद मामी नानी से तो डांट खा ही रही थी इसके अतिरिक्त वह सारा दिन उस बाली को ही ढूंढती रहती थी। इस तरह बाली मिलने के बाद भी मामी निधि को कुछ भी नहीं कह सकती थी।

        नानी के घर से ही निधि की ट्यूशन लगी हुई थी और उसे 5:00 बजे ट्यूशन पर जाना होता था। कई बार नानी जब कीर्तन में जाती थी तो मामियां भले ही लाख उठा लें निधि सोकर ही नहीं उठाती थी और उसके बाद नानी के सामने मासूम सी बनकर यही कहती थी कि मुझे तो मामियों ने उठाया ही

नहीं, मैं ट्यूशन कैसे जाती? बस फिर जब नानी ने डांटना शुरू करती कि तुम सब सोती ही रहती हो तुम्हें यह ख्याल नहीं था कि बच्ची ने ट्यूशन जाना था। हालांकि मम्मी हमेशा मामियों का ही पक्ष लेती थी परंतु फिर भी निधि उनके प्रति साजिश करने में कोई कसर नहीं रखती थी और जब निधि का

विवाह हुआ और वह विदा हो रही थी तो रोती रोती जब मामियों के गले लगी तो दोनों मामियों ने एक ही बात कही, देख बेटा जहां तू जा रही है ना वहां तुझे सिर्फ मामी ही बनना है, तब तो वह इस बात को समझी नहीं थी परंतु अब अपनी एक-एक करनी उसके सामने आ रही थी और मामियों ने क्या कहा था वह शब्द भी उसके कान में ही गूंज रहे थे।

        उसके साथ भी ऐसा ही होगा, कमरे और अपने लहंगे का हाल देखकर गुस्से के अतिरेक में उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।  अपने माता-पिता की इकलौती बेटी होने के कारण उसे कोई भी चीज किसी के साथ शेयर करने की भी आदत नहीं थी। बड़ी ननद की बेटी लहंगे के साथ की चुन्नी

ओढ़ कर सबको दिख रही थी और बाकि बच्चे उधम मचाते हुए कमरे का सामान सिर्फ फैला रहे थे। इतने में ही उसे सासू मां और ननद के सीढ़ी से ऊपर आने की आवाज सुनी, उसे लगा कि अब वह अगर उनसे शिकायत भी करें तो भी उसे ही सुनाया जाएगा, वह ऐसा सोच ही रही थी कि तभी सासू

मां ने ऊपर यह हाल देखकर लहंगा पहनी हुई मिनी को देखकर उन बच्चों को ही डांटते हुए पूछा यह क्या कर रहे हो? और ननद रानी ने तो सारे बच्चों को डांटते हुए कमरे से निकाल दिया और फिर बड़े प्यार से दोनों ने निधि को कहा बेटा आप तैयार होकर नीचे आ जाओ मैं अभी शांताबाई को भेजती हूं

वह चादर बदल देगी और यह वाली धो देगी। आज के बाद यह बच्चे ऐसी शैतानी नहीं करेंगे और कभी करें  भी तो संकोच मत करना मुझे बताना। ननद जी की भी नीचे से बच्चों को डांटने की आवाज़ें आ रही थी। अब यह सब देखकर निधि को उन बच्चों के नहीं अपने व्यवहार पर शर्म आ रही थी।

उसने भी मन ही मन सोच लिया था कि अब के जब वह नानी के घर जाएगी तो वह मामियों से बिना वजह साजिश वाली शैतानियां करने के लिए उनसे क्षमा मांगेगी। यह तो शुक्र है कि उसके ससुराल में उसकी सासू मां और ननदें बहुत अच्छी है। 

       पाठकगण आपका क्या ख्याल है, कई बार नानी या दादी का प्यार बच्चों को बिगाड़ देता है ना? कॉमेंट्स द्वारा सूचित करें।

साजिश विषय के अन्तर्गत लिखी गई कहानी।

मधु वशिष्ठ

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