“दीदी शादी से थोड़ा पहले आ आ जाइएगा,सब आपको ही बताना है “
“तू परेशान मत हो मै शादी से दो – तीन दिन पहले आ जाऊंगी “ननद शिखा की बात सुन माधवी सोच में पड़ गई ,दो – तीन दिन पहले आने से क्या शादी की सारी तैयारी हो जाएगी ।
बेटी पीहू की शादी तय होते ही माधवी सभी रिश्तेदारों को सूचना दे दी ,तारीख पक्की होने पर आज सबको फोन कर दी ,लेकिन सभी रिश्तेदार अपने हिसाब से आने के लिए बोल रद्द थे ।
माधवी सोच में पड़ गई ,उसके घर में ये पहली शादी है अतः घबराहट स्वाभाविक है ,पहले शादी तय होते ही एक – दो महीने पहले ही नाते – रिश्तेदार आ जाते थे , मुगौड़ी,बड़ी , पापड़ और अचार सब पहले ही बन जाते थे ,यहां तक की बारात के लिए मिठाई,नमकीन भी घर की औरते मिल कर बना लेती थी ।
लेकिन अभी समय बदल गया , जिसको भी कॉल करो सब अपनी व्यस्तता गिना दे रहा था ।
शाम को मिहिर ऑफिस से आए तो माधवी को चिंता ग्रस्त पाया ,
“क्या हुआ माधवी ,घर में इतनी बड़ी खुशी का अवसर आया और तुम तनाव में हो ,सबको कॉल कर दी हो “
“हां लेकिन सब नाते – रिश्तेदार शादी वाले दिन या एक दिन पहले पहुंचेंगे ,सबने हाथ खींच लिया ,जब परिवार के लोग ही हाथ खींच ले रहे तो दूर के रिश्तों को क्या कहें ,फिर शादी की तैयारी कैसे होगी “
माधवी की बात सुन मिहिर हँस पड़े”अब पहले वाला जमाना नहीं रहा ,अब तो पैसे दे कर होटल में हॉल बुक कर लो ,होटल वाला ही सारा इंतजाम कर देगा ,मै आज होटल बुक कर दिया हूं ,शादी के दो दिन पहले हम वहां शिफ्ट हो जाएंगे “
माधवी उदास हो गई ,कहां वो महीने भर पहले देवी गीत के बाद बन्ना – बन्नी के चुहल भरे गीत ,एक दूसरे को छेड़ने की वो मनभावनी बातें ,क्या अब ये सब नहीं होगा …??
पीहू के साथ शादी की शॉपिंग करती माधवी अन्मयस्क थी ,उसकी शादी के समय ,खाना – पीना निपटा कर सब बाजार जाते , ठोक – पीट कर समान आता थे ,महीने पहले रिश्तेदार आ जाते थे यहां तक कि बारात का खाना भी सब औरते ही मिल कर बनाती थी । संयुक्त परिवार का अपना महत्व था ,कम में भी स्नेह और अपनत्व के धन से सब परिपूर्ण होते थे ,अब एकल परिवार में रहने वाले बच्चे ये सब कहां जानते।
यहां तो माधवी के संग होने वाले दामाद ने पीहू का लहंगा पसंद किया ,साथ ही लहंगे से मैच करती अपनी शेरवानी भी दामाद ने लिया ,।
पीहू और दामाद जी एक दूसरे के कपड़े पसंद करा रहे थे ,माधवी को थोड़ा अच्छा भी लगा ,।
शादी की तैयारियां हो गई ,माधवी रिश्तेदारों को बहुत मिस कर रही थी ,उसे तो पता भी नहीं खाने में वहां क्या – क्या बन रहा ।
शादी के दो दिन पहले सारे रिश्तेदार आ गए , चुहलबाज़ी शुरू हो गई अब माधवी को शादी का घर लग रहा , रस्मों – रिवाज जो परिवार में पहले हफ्ता – दस दिन पहले से शुरू हो जाता था ,आज समय के अभाव में दो दिन में सिमट गया ,रात खाने के बाद दूर रिश्ते की बुआ ने ढोलक थाम ली फिर क्या ,फिल्मी गीतों से कब बन्ना – बन्नी के पुराने गीतों पर आ गए पता ही नहीं चला ,इन गीतों को पुराने लोग एक्शन कर गा रहे और नई पीढ़ी सुन सुन कर मजे ले रही थी ।
एक बार फिर वो शादी वाला माहौल लौट आया ,जिसे माधवी मिस कर रही थी ,देर रात तक गाना – बजाना चला , सुबह आंखे खुलने पर पता चला होटल में नाश्ता नहीं बन पाया ,कारण गैस पाइप लाइन में कुछ दिक्कत हो गई ,
माधवी चिंताग्रस्त हो गई ,लड़के वाले भी होटल में आ चुके थे,उनका पहला खाना ही नाश्ता ही होना था …अब क्या होगा ..??बुआ जी ,ननद रानी ,बहन बोली ,”तुम चिन्ता मत करो हमलोग है “
सब होटल के रसोई में पहुंच गए ,पुराने चूल्हे और इलेक्ट्रोनिक हीटर जलवा ,सब जुट गए , हँसी – मजाक करते हुए कोई आटा गूंथने लगा , कोई पकौड़ों की तैयारी कर रहा था ,किसी ने तब तक हलवा बना लिया ,
रसोई में कढ़ाई, चमचे की लय पर फिर गीत मुखरित हो गए ।
एक घंटे में टेबल पर नाश्ता सज गया था पूरी सब्जी ,हलवा ,पकोड़े और खीर देख सारे बाराती खुश हो गए
“समधी जी ,नाश्ता तो बहुत स्वादिष्ट था “लड़के के पिता बोले
स्वादिष्ट कैसे नहीं होगा ,इसमें परिवार के अपनों का प्यार जो शामिल था …माधवी मन ही मन में बोली ।
होटल के रसोइए ने भी कहा ,”जिसके रिश्तेदार मुसीबत में इस तरह साथ खड़े हो ,उसको कभी परेशानी आ ही नहीं सकती ,”
माधवी की सारी शिकायत दूर हो गई ,समझ गई ,भले ही सब कम समय के लिए इकट्ठा हुए लेकिन अपनत्व के डोर का बंधन आज भी अटूट है।
डी . जे.बज रहा था ,नई पीढ़ी वहां वहां बढ़ गई,पुरानी पीढ़ी फिर ढोलक ले कर बैठ गई । विभिन्नता में भी अपनी अपनी मस्ती हो रही थी ।रिश्ते कितना भी इधर – उधर हो लेकिन जरूरत पर साथ दें वही सुंदर परिवार की पहचान है ।
—— संगीता त्रिपाठी
#सबसे बड़ा धन …परिवार