डॉक्टर साहब जल्दी आएं यहाँ पर, इनका हादसा होगया है और इनको इलाज की सख्त जरूरत है। परेशान रामू ने बोला।
*आज का दिन*
मैं कहा हू? कोई मुझे बताएगा कि मैं यहाँ कैसे आया? सर पकड़ते हुए एक आदमी ने दर्द भरी आवाज में पूछा।
आस पास के सब लोग उसको देख रहे थे जैसे कुछ अजूबा सा उन्होंने देख लिया हो।
तभी वहां रामू आया और आदमी को होश में देखते ही वो फूले नहीं समा रहा था, और उत्सुकता से बोला आप यहाँ आराम से बैठिए, मैं डॉक्टर को ले कर आता हू।
वो आदमी बोला आप मुझे जानते है क्या? मैं कौन हू? मुझे कुछ भी याद नहीं आ रहा है।
रामू एक पल के लिए हक्का बक्का हुआ, फिर बात को संभालते हुए बोला आप अभी दिमाग पर जोर ना डाले मैं डॉक्टर को बस अभी आया लेकर।
रामू ने सारी बात विस्तार से डॉक्टर को बताई।
डॉक्टर ने सारी बात ध्यान से सुनी और उस आदमी से मिलने चले गए।बहुत ध्यानपूर्वक उन्होंने उस आदमी को चेक किया और फिर रामू को अपने कैबिन बुलाया।
कैबिन में डॉक्टर ने लंबी और गहरी साँस ली फिर गंभीर स्वर में बोले,सर पर चोट लगने की वजह से और सदमा लगने की वजह से इनकी याददाश चली गई है।
रामू ये सुन कर चौंक सा गया, फिर उसने धीमे स्वर में पूछा अब क्या करे डाक्टर साहब?
देखो रामू मैं जानता हू, अपने न होते हुए भी तुमने उनके लिए बहुत कुछ किया है इन ६ महीनों में पर…
पर क्या डॉक्टर साहब? रामू एक दम से घबराहट से बोला।
डॉक्टर बोले “पर इनकी याददाश लाना आसान नहीं होगा, और इनको स्ट्रेस भी नहीं होना चाहिए, वरना इनकी जान को खतरा हो सकता है।
रामू बोला मैं इनका पूरा ध्यान रखूंगा, इनको हल्का सा भी स्ट्रेस नहीं आया।
डॉक्टर कुछ बोलना चाह रहे थे पर बोल नहीं पा रहे थे, पर हिम्मत करके उन्होंने पूछा “रामू तुम एक अंजान आदमी के लिए इतना क्यों कर रहे हो? इतना तो कोई अपना भी नहीं करता किसी के लिए।”
रामू ने सर झुकाया और उदास होके बोला “डॉक्टर साहब बस आप इतना समझ ली जिये एक कर्ज़ा उतार रहा हू।
वहां जब रामू उस आदमी से मिलने आया तो वो बोला “अरे काका अच्छा हुआ आपको होश आ गया, मैं कितना परेशान था।”
आदमी अचंभित होके बोला “आप कौन?” क्या आप मुझे बता सकते है, मैं कौन हू? और मुझे क्या हुआ है? मैं यहाँ कैसे आया?”
रामू फट से बोला “आराम से काका स्ट्रेस आपके लिए अच्छा नहीं है, मैं आपके सारे सवालों के जवाब दूंगा पहले आप कुछ खा कर आराम कर लीजिए।
*एक हफ्ते बाद*
अब काका की तबियत में काफी सुधार था उनको डिस्चार्ज भी मिल गया था। रामू उनको अपने घर ले गया। धीरे धीरे वक्त बढ़ता चला गया और काका का लगाव रामू की तरफ बढ़ने लगा था और वो भी अब रामू को अपना बेटा मानने लगे थे।
पर एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसकी उमीद ना रामू को थी न काका को।
रामू के छोटे से किराए के मकान के आगे एक बड़ी सी गाड़ी रुकी और उसमें से एक सूट में आदमी निकला।
उसने एक आदमी को एक तस्वीर दिखाते हुए बोला “मेरा नाम रेहान है, क्या तुमने इनको कही देखा है?”
वो आदमी उसको घूरते हुए बोला “वहाँ रहता है ये।”
जैसे जैसे रेहान के कदम मकान की तरफ बढ़ रहे थे वैसे ही हवाएं तेज़ हो रही थी जैसे कोई रामू की जिंदगी में तूफान ले कर आ रहा हो।
दरवाजे पर एक जोर की खत खत हुई, जैसे कही पहाड़ गिर गया हो।
रामू ने दरवाजा खोला और बस पूछ ही रहा था कि रेहान उसको धक्का देते हुए घर में घुसा और काका को देखते ही मुस्कुराया और बोला “आखिरकार आप मिल ही गये मुझे पापा। कहा कहा नहीं ढूंढा आपको मैने इतने महीनों से।”
काका ने ऊपर देखा और कांपते हुए बोले “आप कौन है?” मैं नहीं जानता आपको।”
रेहान खीजते हुए बोला “बस पापा बस, मुझे पता है आप नाटक कर रहे है, अगर आप अभी नहीं चले तो मैं पुलिस को बुलाकर इस आदमी को किडनैपिंग के केस में अरेस्ट करवा दूंगा।”
रामू जो उनके सगे बेटे से भी बढ़कर हो गया था, ये शब्द रेहान के मुंह से सुनकर वो और उसका गुस्सा फूट गया और बोला “खबरदार जो रामू के साथ कुछ गलत किया, वो मेरा बेटा है और तू क्या पुलिस को बुलाएगा, मैं ही बुला देता हू, उनको भी तो पता चले कि आज कल औलाद अपने बूढ़े बाप की खून पसीने की मेहनत कैसे छीन ने में लगी हुई है।”
रामू ये सब सुनकर सन्न पढ़ गया और बोला “काका आपकी याददाश कब वापिस आई?”
रामू की आँखों में अश्रु थे और वो हल्का सा मुस्कुराया और बोला “बेटा मेरी यादाश कुछ समय ही वापिस आ गई थी, मुझे तुमसे इतना अपना पन मिला जितना मुझे मेरे परिवार से नहीं मिला, कि मेरा मन ही नहीं किया कि मैं तुम्हे सच बताऊ।
काका ने उसको का कर गले लगा लिया और बोला रामू बेटा तुमने साबित कर दिया कि *रिश्ते अधिकार से नहीं, करुणा से निभते है* और ये चीज़ मैं आज तक अपने बेटे को नहीं समझा पाया।
रामू की आँखों में आंसू थे, वो उससे पहले कुछ बोले काका एक दिन से बोले “और हा, तुम्हे किसी भी चीज की प्रायश्चित करने की जरूरत नहीं है, तुम्हारे बाबा के साथ जो हादसा हुआ उसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं थी।
रामू एक दम से बोल पड़ा “आपको कैसे पता चला?”
काका बोले एक रात तुम हल्के नशे में थे तब तुमने ये बात बोली थी।
रेहान ये सब देख कर पक गया था और बोला “ये भरत मिलाप हो गया हो तो चले यहाँ से?”
काका बोले “अभी इतनी जल्दी कहा, तुम्हारा भी भरत मिलाप कराना है मुझे।”
पीछे से पुलिस आई और काका ने सारे सबूत उनके सामने पेश कर दिये और तभी के तभी रेहान को अरेस्ट कर लिया और ले कर चले गये।
अब बाहर का मौसम शांत सा हो गया था, ऐसा लग रहा था जैसे काका का मन शांत हो गया हो। साथ ही में रामू की तरफ देख कर बोले “मुझे आज अपने बेटे की वजह से एक नया बेटा मिल गया है, और रामू ने ये सुनते ही उसको गले लगा लिया जैसे किसी बच्चे को उसका खोया हुआ बचपन और खिलौना मिल गया हो।
*एक महीने बाद*
दोनों साथ में उसी छोटे से मकान में रहते है, और काका ने अपनी आधी जायदाद गरीबों में बाट दी और आधी रामू के नाम कर दी है, और दोनों अपने खुशी से भरे उस छोटे मकान में अपने नए सपने साथ में भुन रहे है।
लेखिका
तोषिका