प्यार – खुशी

रागिनी अपने माता पिता की लाडली बेटी थी।शादी के 6 वर्ष बाद होने के कारण माता पिता उस पर जान लुटाते थे।दादा दादी दीवानचंद और करुणा भी उसे प्यार करते थे।मां सीता उसे सही गलत का फर्क बताती पर पिता श्याम का कहना था मै अपनी बेटी के लिए घर दामाद लाऊंगा जो इसके साथ यही रहेगा।

रागिनी पढ़ने लिखने में होशियार थी पहले ही पड़ाव में उसने अपने एंट्रेंस एग्जाम क्लियर कर शहर के प्रतिष्ठित कॉलेज में इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया।वहां उसका क्लास फेलो था सागर हैंडसम खुशमिजाज और पढ़ाकू लड़का।हर कोई उसकी तारीफ करता हर चीज में आगे चाहे वो पढ़ाई हो खेल हो कल्चरल एक्टिविटीज हो कुछ भी हर कोई सागर को पसंद करता था।रागिनी का दिल सागर को देख धड़का था। छुईमुई सी रागिनी और सागर अच्छी जोड़ी थी।परंतु सागर सभी से नेपेतुले अंदाज में बात करता लड़कियों से ।

रागिनी के कॉलेज का 4 दिन का टूर उदयपुर गया।सागर भी गया वहां रागिनी ने सागर से बात करने की कोशिश की सागर को भी रागिनी पसंद थी तो दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई क्योंकि दोनों के शौक एक जैसे थे।सागर अपने करियर को ले पोस्ससिव था वो जीवन में ऊंचाई छूना चाहता था।परिवार में उसकी मां आशा थी जो स्कूल में प्रिंसिपल थी और दादी थी जो घर संभालती थी और गार्डेनिंग का बिजनेस भी जो सागर के पिता का था पर उनकी अकस्मात मौत के कारण दादी मां और सागर की ढाल बनी और उन्होंने अपनी बहु आशा को भी जीवन में आगे बढ़ाया तभी आशा और सागर अपनी दादी को बहुत मानते थे।दादी भी पोते और बहु को बहुत प्यार करती थी।

सागर का कैंपस प्लेसमेंट में ही IBM जैसी कंपनी में सिलेक्शन हो गया और रागिनी का HCL में दोनों खुश थे।रागिनी बोली सागर मै तुमसे प्यार करती हूं और शादी करना चाहती हूं।सागर बोला मुझे भी तुम पसंद हो पर मेरे घर में मां और दादी है यदि उन्हें तुम पसंद आ गई तो मै तुमसे शादी कर लूंगा।ये क्या बात हुई हमे शादी करनी है तो वो क्यों बताएगी क्योंकि वो मेरी बड़ी है और मेरे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।और मैं तुम भी पर उन दोनों का मान पहले मुझे पता है मेरी खुशी में वो खुश होंगी और ना नहीं कहेंगी पर फिर भी पहले उनकी रजामंदी जरूरी है।रागिनी को गुस्सा तो बहुत आया पर वो चुप रही घर आ कर उसने अपने पिता श्याम और दादी करुणा को सारी बात बताई।

श्याम बोला मेरी बेटी को पसंद है तो उसकी शादी वही होगी अगले हफ्ते हम रिश्ता ले कर जाएंगे।अभी नहीं पापा exams के बाद ओके जैसा तुम चाहो ।सागर और रागिनी अपनी पढ़ाई में बिजी हो गए फोन पर बात होती तो सागर की बातों में दादी और मां का जिक्र होता जो रागिनी को पसंद नहीं आता था। एग्जाम्स खत्म हो रिजल्ट आया और दोनों को गुड़गांव प्लेसमेंट मिली दोनो दफ्तर से टाइम मिलता तो मिलते इधर अब दादी चाहती थी कि सागर की दुल्हन ले आए।आशा और दमयंती ने सागर से संडे को पूछा सागर बेटा सोच रही हूं तेरी शादी कर एक प्यारी सी बेटी घर ले आऊं तुझे कोई पसंद हो तो बता।नहीं तो मै देखूं।दादी मुझे मेरे साथ पढ़ने वाली रागिनी पसंद है पर वो यदि आपको पसंद होगी तो ही मैं शादी करूंगा।अरे तुझे पसंद है तो हमे क्या एतराज है चल कब चलना है।

मै उससे पूछ कर बताता हूं।सागर ने शाम को रागिनी फोन कर बताया मां और दादी रिश्ते के लिए तुम्हारे घर आना चाहते हैं तो तुम अपने पेरेंट्स से पूछ कर बता देना।अगले शनिवार सब शाम को रागिनी के घर गए।सबको घर परिवार बहुत पसंद आया और सगाई की रसम कर दी गई।शादी की तारीख 3 महीने बाद की निकली।उधर 5 दिन बाद एक शाम कॉफी शॉप में रागिनी ने सागर को बुलाया बोली पापा तुमसे मिलना चाहते हैं।मुझसे okk कल आता हूं अगले दिन सागर श्याम से मिलने गया।श्याम ने इधर उधर की बात की फिर बोले बेटा रागिनी हमारे जिगर का टुकड़ा है हम उससे एक दिन भी दूर नहीं रहे तो मै चाहता हूं तुम शादी के बाद यही रहना तुम्हारी सारी जिम्मेदारी मेरी।और मेरी मां और दादी का क्या? सागर बोला वो वही रहेंगी तुम उनको पैसा दे सकते हो मिलने जा सकते हो।

सॉरी अंकल मेरी मां और दादी ने बहुत मेहनत और प्यार से मुझे पाला है जैसे आपकी बेटी आपको प्यारी है ऐसे ही मेरी मां और दादी को मै प्यारा हूँ इसलिए ये नहीं हो सकता तो ये शादी भी नहीं हो सकती श्याम गुस्से में बोला ।कोई बात नहीं शादी ना हो तो ना सही पर मै अपना घर परिवार नहीं छोडूंगा और सागर वहां से घर आ गया।श्याम ने रागिनी को बताया कि सागर ने रिश्ते से मना कर दिया वो घर दामाद नहीं बनेगा अपनी मां और दादी को नहीं छोड़ेगा।देख लिया बड़ा सागर सागर करती थी तुम उसने एक मिनट में अपना पल्ला झाड़ लिया।नहीं यह नहीं हो सकता वो मुझे नहीं छोड़ सकता।रागिनी चीखी चिल्लाई फिर थोड़ी देर में चुप हो गई और कुछ सोचने लगी और सो गई अगली सुबह वो उठी और श्याम के पास गई और बोली पापा मै शादी के लिए तैयार हो पागल हो क्या तुम वो मां दादी करता रहता है तुम्हे क्या प्यार करेगा मान देगा।पापा आप मुझे वहां जाने तो दीजिए ना ये प्यार का भूत उतारा तो देखना।

अगले दिन रागिनी ने सागर को फ़ोन किया सागर बोला अब क्या है मै अपना फैसला सुना चुका था । सॉरी सागर तुम्हे पता है कि मैं अपने माता पिता की इकलौती संतान हूं इसलिए वो मुझसे दूर होने की कल्पना से कांप जाते है इसलिए उन्होंने ये बात कही। प्लीज़ मुझे माफ कर दो मै तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। मै भी नहीं रह सकता तुम्हारे बिना पर मां और दादी ने मेरे लिए बहुत sacrifice किए हैं तो मै उन्हें नहीं छोड़ सकता।तय समय पर बड़ी ही धूम धाम से शादी हुई।सारा शहर देखता रहा कि श्याम ने रागिनी की क्या शादी की है।रागिनी घर आ गई शुरू के दिन तो घूमने फिरने सैर सपाटे में बीत गए फिर दोनों का ऑफिस शुरू हो गया।रागिनी का वर्क फ्राम होम ज्यादा रहता वो सारा दिन अपने कमरे में रहती दिन में जब स्कूल आशा वापस आती तो वो उसे लंच के लिए बुलाती शाम की चाय पर बुलाती तो वो मना कर देती इसी बीच दमयंती एक रात सोई तो उठी नहीं पूरा घर बिखर गया रागिनी उकता गई थी।

वो आखिर सागर से बोल पड़ी ये ड्रामा कब खत्म होगा तुम्हारी दादी को मरे महीना हो गया तुम ऑफिस से आते ही अपनी मां के खूंटे से लग जाते हो ना मुझे घुमाने फिराने ले जाते हो ये क्या तरीका है।सागर बोला क्या कह रही हो दादी का दुख हमारे लिए बहुत बड़ा है तुम तो मेरी मां से प्यार के दो बोल भी नहीं बोलती सारा दिन कमरे में बंद रहती हो या मायके में होती हो अच्छा उस बुढ़िया ने मेरी शिकायत की है तुमसे शी इस अ बिच।रागिनी सागर ने एक चाट। रागिनी को लगा दिया। सागर तुमने मुझे मारा मै पुलिस बुलाऊंगी तुम्हारे खिलाफ कंप्लेंट करूंगी।

आवाज सुन आशा जी भी आ गई क्या हो गया इतनी आवाज क्यों आ रही है।बुढ़िया तू चुप कर सब तेरे कारण ही हुआ है तेरे लिए इसने मुझे मारा तुम दोनों मनहूसों के लिए इसने रिश्ता तोड़ा था अब तुम दोनों को मैं मजा चखाऊंगी और उसने अपने घर वालो को बुला लिया और पुलिस को भी सागर और आशा की एक बात नहीं सुनी पुलिस वालों ने उन्हें ले गए ।रागिनी ने दहेज मांगने मारने पीटने यौन प्रताड़ना देने के आरोप सागर पर लगाए ।

तलाक और कोर्ट कचहरी करते करते 1. 5 साल निकल गया सागर की जॉब चली गई।आशा जी को स्कूल से निकाल दिया गया।दादी का जो बिज़नेस था उसी को सागर ने आगे बढ़ाया और उस शहर से दूसरे शहर चला गया।जिस दिन कोर्ट का फैसला आया और तलाक हो गया उस दिन रागिनी सागर के सामने आई और बोली आज तेरी मां और दादी की बदनामी कर मुझे सकून मिला है पहले दिन से ही तूने इन्हें ऊपर और मुझे नीचे रखा था आज इतनी बेइज्जती हुई है ना तुम्हारी मजा आ गया।आशा बोली

बेटा हमें तो प्यार के दो बोल चाहिए थे और अपने बच्चे की खुशियां तुम्हारा बर्ताव तो मै और मां एक बार मॉल में देख चुके थे जब तुमने उस गरीब आदमी को चाटा मारा था हमने सिर्फ अपने बच्चे की खुशी में खुशी चाही और एक बात मेरा बेटा और मैं तो जीवन में आगे बढ़ जाएंगे पर ईश्वर की लाठी  बे आवाज होती हैं वो जब पड़ती हैं ना तो अच्छे अच्छों का हिसाब होता है।हा देखेंगे किसका हिसाब होगा श्याम आया और रागिनी को ले गया ।आशा और सागर नैनीताल बस गए वही उसने एक कैफे खोला और गार्डेनिंग का बिजनेस जो आशा देखती थी।सागर को लड़कियों से नफरत हो गई थी पर उसके जीवन में उन्हीं के पड़ोसी शर्मा जी की बेटी आईं अंजू जो नैनीताल हाई कॉलेज में प्रोफेसर थी वो आशा को बहुत मान देती थी बिन माँ की बच्ची थी इसलिए आशा जी से उसे लगाव था 2 साल बाद आशा जी के समझाने पर और खुद अंजू के और उसके पिता के असलियत जानने के बाद भी विवाह पर राजी होने पर सागर और अंजू की शादी हो गई और उधर पैसे के दम पर रागिनी की दूसरी शादी हुई पर मुंहफट और हठधर्मी के कारण कुछ दिन में वहां से भी वापस आ गई। दादा दादी की मृत्यु हो गई श्याम को फ्लाइज अब बिजनेस रागिनी देखती थी जिसमें घाटा ही घाटा था अकेली तनहा बहुत याद करती थी सागर को पर अब क्या किसी को प्यार दिया नहीं तो कहा से मिले अकेला पन ना कोई प्यार करने वाला नहीं कोई दो बोल बोलने वाला।मां हमेशा कहती समझाती थी खुद परस्त मत बनो अब भुगतो।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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