प्यार के दो मीठे बोल – संजय सिंह

 शाम का समय सूरज की किरणें दिन की भांति आग ना बरसा कर थोड़ी ठंडक के एहसास को हल्का-हल्का गर्म कर रही थी। सूरज की रोशनी बरामदे में गिर रही थी। कुछ पक्षी अपने पूरे दिन का परिश्रम करके अंतिम परिश्रम करके कुछ दाने चुग कर घरों की तरफ पलायन करने को तैयार थे ।चारों तरफ धीरे-धीरे शांति का आगमन होने वाला था ।

इस  माहौल में डॉक्टर मीरा अपने बरामदे में चुपचाप बैठी थी ।कभी वह सूरज को निहारती, कभी उन पक्षियों को देखती और कभी अपने अतीत में खो जाती ।उसका दिल करता कि वह घर के अंदर ना जाए क्योंकि घर का सूनापन उसे डरता था। मन करता था कि शाम का कभी अंत न हो।

इसी सोच में डॉ मीरा  अपने अतीत के सुनहरे दिनों के बारे में सोचने लगी ।उसे अपने पति का चेहरा उसकी आंखों के सामने दिखाई दिया ।

डॉ रजत इलाके के जाने वाले डॉक्टर थे। डॉक्टर मीरा के साथ उनकी शादी बहुत ही धूमधाम से हुई थी। दोनों अपनी इस जिंदगी में काफी खुश थे। रोज अपने-अपने निर्धारित कार्यस्थलों की ओर चले जाते और शाम को घर पर आकर पूरे दिन की कार्य विधि एक दूसरे को सुनाकर अपनी थकान को दूर करते और खुशी-खुशी जीवन को काटते ।

फिर शीघ्र ही अब वह समय आया जब डॉक्टर रजत के घर पर एक पुत्र ने जन्म लिया। डॉ रजत अपने बेटे को जान से भी प्यार ज्यादा प्यार करते थे। डॉक्टर मीरा और डॉक्टर रजत दोनों काम पर चले जाते और पीछे बेटे को उनकी उसकी आया संभालती। दोनों पति-पत्नी दिन में बहुत बार आया को फोन करते और बेटे के बारे में पूछते।

सारा काम समेटकर जल्दी से जल्दी घर पहुंचने की कोशिश करते । समय बीतता  गया और अब वह समय आ गया ।जब बेटा स्कूल भी जाने लगा ।डॉ रजत और डॉक्टर मीरा दोनों उसको स्कूल छोड़कर अपने-अपने काम में चले जाते ।दोनों में से कोई एक काम से जल्दी निकल कर उसे स्कूल से घर पर लेकर आता।

धीरे-धीरे यह सिलसिला जिंदगी का हिस्सा बन चुका था। एक दिन रोजमर्रा की तरह डॉक्टर डॉ रजत काम को जल्दी निपटाकर बेटे को स्कूल से लाने के लिए निकल पड़े। जैसे ही स्कूल में छुट्टी हुई उन्होंने अपने बेटे को कार में बिठाकर अपने साथ घर ले जाने के लिए चल पड़े ।

बेटे के जिद करने पर रास्ते में एक जगह बच्चों को कुछ खिलाने के लिए गाड़ी रोककर नीचे उतरे।बेटे को भी साथ ले लिया। वह बच्चे को प्यार से कुछ खिला रहे थे कि एकाएक दो-चार व्यक्ति उनकी तरफ बढ़े और उन्होंने उनके  बेटे को बाजू से पड़कर अपनी तरफ खींचने का प्रयास  करना शुरू किया।

यह देखकर बच्चा बेटा जोर-जोर से रोने लगा। पास खड़े डॉक्टर रजत ने जब इसका विरोध किया और  उन व्यक्तियों से अपने बेटे को छुड़ाने का प्रयास किया तो एकाएक एक व्यक्ति ने छुरा निकालकर डॉक्टर रजत के पेट में घुसा दिया ।डॉक्टर रजत वहीं पर गिर गए और कुछ समय बाद उनका देहांत हो गया ।

उन लोगों ने बेटे को अगवा  कर  गाड़ी में बिठाया और अज्ञात स्थान की तरफ बढ़ने लगे। यह सब देखकर वहां के लोग भी  उनका पीछा करने लगे ।

पकड़े जाने के डर से उन अज्ञात लोगों ने अपनी गाड़ी को बहुत ही तेज गति से चलना प्रारंभ किया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था ।कुछ दूर जाकर गाड़ी अनियंत्रित होकर एक अज्ञात वाहन से टकरा गई। उन अज्ञात व्यक्तियों के साथ डॉ रजत का बेटा भी इस दुर्घटना में मृत्यु को प्राप्त हो गया। यह समाचार डॉक्टर मीरा तक पहुंचा ।

वह एक जीती -जाती मूर्ति में तब्दील हो गई ।उसने जीवन में कभी सोचा नहीं था कि इस तरह उसके जीवन की हर एक खुशी मिट्टी में मिल जाएगी ।यह सब सोकर सोचते डॉक्टर मीरा की आंखें एकाएक आंसुओं से भर गई और तीव्र सांस के साथ वह रोने लगी। वह ईश्वर से प्रार्थना कर रही थी

कि ईश्वर यदि इस संसार में  है तो वह भी उसे उसके पति और उसके बेटे के पास पहुंचा दे क्योंकि वह अभी संसार में जीना नहीं चाहती ।इसी निराशा में वह लगातार डूब रही थी। उसके रोने की आवाज बरामदे की शांति को भंग कर रही थी। तभी पास में बैठा उसका कुत्ता टॉमी उसकी सिसकियां सुनकर उसके पास आया और उसके हाथों को चाटने लगा

यह सब देखकर डॉक्टर मीरा ने कुत्ते को अपने से दूर करने का प्रयास किया परंतु कुत्ते ने डॉक्टर मीरा के दोनों पांव पर अपना मुंह टिका दिया और चुपचाप बैठ गया। मीरा ने जब उसको देखा तो कहीं ना कहीं यह सोचने लगी कि कौन कहता है ?कि उसका कोई नहीं है। यह बेजुबान मुझे इस दुख में देखकर हौसला देने की कोशिश कर रहा है।

इसका यह दो पल का प्यार भले ही आवाज में परिवर्तित नहीं है परंतु कहीं ना कहीं यह आज भी मुझे अपना मानता है तथा मेरा सहारा बनकर मेरे साथ रहता है। एकाएक उसे कुत्ते का यह व्यवहार मीरा के उसे दुखदाई पलों को दूर करने में पूर्ण रूप से सहायक सिद्ध हुआ । मीरा हौसला बांधकर अपने घर के अंदर चली गई। 

धन्यवाद।

लेखक: संजय सिंह।

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