पहला प्यार – विनीता सिंह 

पहला प्यार सुबह की ओस की तरह होता है, उसका एहसास ज़िन्दगी भर मन में एक उत्साह और उमंग भर देता है।अमर गांव में रहता है वह आगे पढ़ाई के लिए शहर के एक कॉलेज में एडमिशन लेता है बहुत ही सीधा और बहुत ही अपने आप में चुप रहने वाला लड़का है केवल अपनी पढ़ाई से मतलब है इस कॉलेज में आराधना नाम की एक लड़की पड़ती है

जो बहुत ही चुलबुली और हर समय हंसी मजाक करती है एक दिन सीडीओ से अमर गुजर रहा होता है उसने देखा कि एक किताब एक पेंटिंग जमीन पर गिरी है बेहोश उठना है लेकिन आराधना अपनी सहेलियों से बातों में भूल चुकी थी कि उसकी फाइल में से उसकी पेंटिंग निकाल कर गिर गई है

अमरजीत से जाता है सीढ़ी पर खड़े होकर उसे उसकी पेंटिंग देता है जैसे इसकी नजर आराधना के चेहरे पर पड़ती है उसे देखा ही रह जाता है आराधना पेंटिंग लेने के बाद उसे धन्यवाद बोलती है और दोनों अपने रास्ते अलग-अलग चलने लगते हैं धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हो जाती है एक साथ पढ़ाई करते हैं एक साथ कैंटीन में खाना खाते हैं

उन्हें पता नहीं चलता कि उनकी जिंदगी में प्यार ने कब दस्तक दे दी। पढ़ाई खत्म करते-करते नौकरी की तलाश में अमर करने लगता है प्यार एक एहसास है उसे पाना या खोना नहीं दूर रहकर भी उसके पास होने का एहसास हमेशा रहता है प्यार का मतलब पर नहीं कभी-कभी प्यार का मतलब त्याग भी होता है सच्चा प्यार साथ नहीं त्याग मांगता है

और दूसरी ओर आराधना के मां-बाप ने उसकी शादी कहीं और कर दी थी। पहले आज की तरह फोन या फिर वीडियो कॉल नहीं थी ।आराधना कुछ नहीं रहती है अपने मन की बात को अपने दिल में दवा कर अपने मां-बाप की बात मान शादी कर लेती है ।लेकिन अमर जो था,

मैं शादी नहीं करता है वह अपने लेखन की दुनिया में और एक बड़े कॉलेज में प्रोफेसर बन जाता है। कई साल बीत जाने के बाद अब अमर बहुत ही स्मार्ट हो गया आंखों पर चश्मा लग गया एक आर्ट गैलरी से गुजर रहा था उसने देखा कि एक पेंटिंग थी।

जिसमें एक लड़की ऊपर खड़ी है एक लड़का नीचे खड़ा उसे उसकी पेंटिंग दे रहा है उसे देखकर एकदम उसे किसी की याद आ गई तभी उसने पीछे मुड़कर देखा अरे यह तो आराधना खड़ी थी। अमर कहता है यह पेंटिंग मुझे चाहिए आराधना ने अमर को पहचान लिया फिर आराधना कहती है।

चलिए काफी पीने चलते हैं कभी पीते पीते अमर कर पूछता है अब तुम ठीक हो , तुम अपनी जिंदगी में खुश होना अपने पति परिवार के साथ आराधना ने कहा है वह जिंदगी तो मैं कई साल पहले पीछे छोड़ चुकी हूं ।मेरे पापा ने जिससे मेरी शादी की थी वह मुझे धोखा देकर चला गया।

और उसने किसी और से शादी कर अपनी दुनिया बसा ली अमर ने पूछा फिर तुमने शादी क्यों नहीं की आराधना बोली मैंने अपनी कला को ही सब कुछ समझ लिया। जिससे मैं प्यार करती थी वह मिला नहीं आराधना बोली मेरी छोड़ो आप अपनी बताओ आप ।

कैसे हो अमर ने कहा जैसा आप छोड़ गई थी अमर ने कहा कि जैसा-जैसे पहले था वैसा ही हूं अब आराधना नहीं पूछा तुमने अपनी दुनिया नहीं बसाई अमर ने कहा नहीं मैं अपनी कविताओं में को ही अपना समय देने लगा मेरे पास इतना समय नहीं था कि मैं किसी और के बारे में सोचूं। 

आराधना रहती है ईश्वर की मर्जी है पहले हम बच्चे थे उसे समय हमारे अल्हड़ का प्यार था अब हम मेच्योर समझदार हैं अपने हिसाब से फैसला लेंगे अगर तुम चाहो तो हम दोबारा शुरुआत कर सकते हैं अमर को शायद बरसों से इसी बात को सुनने का इंतजार था अमर ने तुरंत हां कर दी

क्योंकि उसका पहला प्यार उसे मिल गया इस प्रकार अमर और आराधना एक दूसरे के साथ रहने लगे अमर आराधना की पेंटिंग पर अपनी कविताएं एकता अराधना अमर के कविताओं के हिसाब से पेंटिंग बनाते इस प्रकार दोनों का प्यार सफल हो गया।

सही पहला प्यार इंसान को उम्र भर याद रहता है एक प्यारे से एहसास की तरह।

विनीता सिंह 

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