दोस्तों प्यार एक ऐसा शब्द है जो किसी के जीवन में आये तो उसकी दुनिया बदल देता है सच्चा हो तो जीवन को स्वर्ग बनाता है और झूठा हो तो नर्क पर ये प्यार का मौसम है तो कहानी भी रूमानी सी होनी चाहिए। राज का बचपन का सपना था कि मैं आर्मी ऑफिसर बनूंगा।वो अपनी मां को हमेशा कहता मै देशं की सेवा करूंगा।
आपका ,पापा और दादाजी का नाम रोशन करूंगा।उसके दादा जी उमाकांत जी उसे बचपन से ही वीर योद्धाओं की कहानी सुनाया करते थे वो भी रेलवे से रिटायर हुए थे।और राज के पापा रवि भी रेलवे में टीटी थे तो वो घर में कम ही होते।राज अपनी मां और दादा जी के सानिध्य में बड़ा हो रहा था।
जब राज 15 साल का था तो दादा जी ने कहा रवि सुन अभी तो हम दोनों रेलवे में है तो घर हमे मिल गया बेटा पर अब अपना घर बना लो कल को अपना घर अपना होता है ये घर तो हमे छोड़ना पड़ेगा। पिता की बात मान पास ही काॅलोनी में प्लॉट कटे थे रवि ने प्लॉट ले घर बनवाना शुरू कर दिया बहुत सुंदर हरा भरा एरिया था।
gated सोसायटी थीं सुरक्षा की दृष्टि से भी ठीक था।1.5 साल में घर बन गया घर बनते हुए दादा जी और मां के साथ राज भी आता था उनके पड़ोस के घर में एक परिवार पहले से रहता था।रजनीश जी का उनके परिवार में दादा दादी मोहन कुमार और राधा जी उनका बेटा महेश बहु बेला 2, बच्चे पलाश और प्रिया बड़े प्यारे बच्चे थे।
पलाश 11 वी में था और प्रिया 9 में।जब ये अपने घर जाते तो बेला और राधा जी कभी उन्हें चाय पानी दे देते। मोहन जी और उमाकांत की तो अच्छी दोस्ती हो गई।एक दिन राज भी दादा जी के साथ आया और प्रिया के घर गया उसने पहली बार प्रिया को देखा और उसका दिल धड़का गुलाबी सी प्रिया उसे बड़ी अच्छी लगी।
फिर तो दोनों की पहचान हो गई साथ खेलते इतना अच्छा माहौल होने के कारण रवि वही शिफ्ट हो गए दोनो घर बिल्कुल ऐसे हो गये जैसे एक परिवार साल बीते बच्चों की पढ़ाई पूरी हो गई राज अपनी ट्रैनिंग पर चला गया।ट्रेनिंग पूरी कर वो 2 साल में लौटा उसकी पोस्टिंग कश्मीर हुई।वापस आने पर प्रिया और वो दोनों बहुत खुश थे
और उसने घर में बता दिया था कि वो प्रिया से शादी करना चाहता है।सबको एक दूसरे का पता था तो किसी को इस बात से कोई परेशानी नहीं थी।बात पक्की हुई और एक सादा सी घर घर में सगाई की रसम हो गई। प्रिया का बीएड का आखिरी साल था।
उसे समझा कर और जल्दी आने का वादा कर राज कश्मीर चला गया।उधर प्रिया और उसकी रोज़ बात होती दोनो एक दूसरे को याद करते दोनो का प्यार अटूट था जिसे कोई नहीं तोड़ सकता था।आज प्रिया बड़ी उदास थी उसका दिल आज कही नहीं लग रहा था बहुत परेशान थी घर आई तो भी बेचैन थी वो शाम को राज की मां रति आई
तो बोली बेटा चेहरा क्यों उतरा है पता नहीं माँ कुछ अच्छा नहीं लग रहा है।हा आज मेरा मन भी बड़ा बेचैन है अरे तुम दोनों भी ना आओ थोड़ा टीवी देखते है।पलाश अंदर आते हुए बोला टीवी पर न्यूज लग गई तो उसमें कश्मीर में आतंकी हमले की खबर आ रही थी।
प्रिया रोने लगी मां मै इसलिए ही बेचैन थी देखा आपने पलाश ने राज को फोन लगाया ।फोन बड़ी मुश्किल लगा राज़ बस यही बोला मै जा रहा हूं मेरी प्रिया का ध्यान रखना मै कब तक आऊ पता नहीं पर आऊंगा। 15 दिन होंगे 20 दिन गुज़र गये राज की कोई खबर नहीं थी।
लड़ाई रुकने की खबर आ रही थी। सबने चैन की सांस ली कि चलो अब राज वापिस आएगा।पर राज़ की कोई खबर पता नहीं चल रही थीं और एक महीने बाद खबर आई कि राज गुमशुदा है या नहीं रहा किसी को कुछ नहीं पता है।ऑफिसर ने घर आ कर बताया कि हम उनकी बॉडी ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रिया सुन बेहोश हो गई रति रवि बेला सब टूट गए। प्रिया तो सुध बुध सब खो बैठी थी ना खाती पीती शून्य में ताकती रहती।सब राज की आने की उम्मीद छोड़ चुके थे सिवाय प्रिया के प्रिया बोली तुम मेरे पहले प्यार हो तुम्हे कुछ नहीं हो सकता राज़ तुम जरूर आओगे मुझे पूरा विश्वास है दो साल बीत गए सब कहने लगे अब प्रिया का घर बसा देना चाहिए
प्रिया की नौकरी भी लग गई थी वो स्कूल में बिजी होती फिर घर आ कर ट्यूशन पढ़ाती ।उसने सिरे से इनकार कर दिया कि वो शादी करेगी उसने कहा राज़ जरूर आयेगा।बेटा आना होता तो अब तक आ जाता तुम कब तक बैठी रहोगी।रति और रवि ने भी यही कहा सब लोग बोल रहे थे प्रिया आज स्कूल से निकल वही चली गई जहां वो और राज मिलते थे।
राज़ कहा हो मुझे यू क्यों छोड़ा तुम्हारे बिना मेरी दुनिया वीरान है मैं तुम्हारे अलावा किसी को नहीं अपनाऊंगी प्लीज़ मेरे पास आ जाओ कोई कुछ भी कहे मुझे पता है तुम मेरे पास हो आजाओ प्लीज़।अगले दिन सुबह प्रिया को बहुत तेज़ बुखार था तो स्कूल नहीं गई।वो सो रही थी अचानक उसे लगा जैसे राज उसके पास है वो चिल्लाई राज़ राज ।बेला आई बेटा क्या हुआ मां राज यही है।
चुप हो जाओ बेटा राज नहीं है उसकी तबियत बहुत खराब थी। बेला बोली हमे अब सख्त कदम उठाना होगा नहीं तो मेरी बेटी पागल हो जाएगी।रवि और रति ने भी सहमति दिखाई और अगले इतवार को।लड़के वालों को बुला लिया लड़के का नाम विवान था जो it कंपनी में था और पलाश का दोस्त था।
उसे प्रिया के अतीत के बारे में जानता था।रति और बेला दोनों ने प्रिया को बहुत समझा कर तैयार किया और ले कर आये।सबको प्रिया पसंद आई।विवान की मां लता बोली एक छोटी सी रस्म कर लेते है फिर अगले महीने शादी । प्रिया चुप थी उसने हाथ आगे बढ़ाया तभी आवाज आई वादा तोड़ किसी और को अपना लोगी।
नहीं राज़ नहीं तुम्हारे अलावा कोई नहीं क्या हुआ कुछ नहीं मा राज़ यही है मै उसे धोखा नहीं दूंगी।तुम पागल हो गई हो क्या कोई नहीं है।मां प्लीज़ चुप रहो चलिए रस्म करे।तभी दरवाजे की घंटी बजी दरवाजा खोला तो सामने राज़ खड़ा था पलाश बोला राज ।राज सुन प्रिय भागते हुए आई मैने कहा था ना राज़ जिंदा है वो मुझे नहीं छोड़ सकता।सब राज को देख रो पड़े।राज़ बहुत कमजोर लग रहा था उसने बताया उसे और उसके दोस्त को दुश्मनों ने पकड़ लिया था बहुत मुश्किल से उनका
सामना कर अपने देश के सीक्रेट्स बचा कर हम वापस वहां से भाग कर आ पाए पर मुझे गर्व है कि हमने दुश्मन का सफाया कर दिया।राज़ के आने से सब खुश थे। प्रिया का दिल भर आया उसके पास अल्फाज ही नहीं थे।2-3 महीने में राज़ रिकवर हो गया और आज प्रिया राज़ की शादी थी दोनो खुश थे प्रिया बोली मेरा प्यार तुम्हे खींच लाया तुम मेरी धड़कन हो
तुम्हारे बिना तो मै धड़कना ही भूल गई थी।जी मैडम आपका प्यार ही तो था जिसने हमें जिंदा रखा। माय लव i love you. तुम मेरी जिंदगी हो मेरा प्यार हो तुम्हारे बिना मै कैसे रहता ना जी सकता हूं ना ही मर सकता हूं।जानेमन दोनो एक दूसरे के आगोश में खो गये दूर कही गाना बज रहा था पहला पहला प्यार है पहली पहली बार है।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी