पहला प्रेम पत्र – एम. पी. सिंह

बात बहुत पुरानी हैं लेकिन यादें एकदम ताज़ा. ये बात हैं जब में कॉलेज के तीसरे साल में था. एक दिन मैंने लाइब्रेरी से एक रेफरेंस बुक इशू करवाई, तभी एक खूबसूरत सी लड़की सरिता मेरे पास आकर बोली, मुझे ये बुक चाहिए, मुझे कल ऐसाइनमेंट जमा करना हैं, बोलते हुए उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं थे.

सरिता क़ो मैं पहचानता था, वो किसी से ज्यादा बात नहीं करती थीं, इसलिए दोस्ती भी नहीं थीं. ऐसाइनमेंट मुझे भी करना था, पर शिस्टाचार के नाते बुक उसे देते हुए बोला, की कल हर हाल में बुक लेकर आना, मुझे भी काम करना हैं. वो बुक लेकर बिना कुछ बोले चली गई. मेरे साथ खड़ा अशोक ये

सब देख सुन रहा था, बोला, बड़ी घमंडी लड़की है, थैंक्यू तक नहीं बोला. मैंने बोला, जाने दे, वो ऐसी ही है. अगले दिन हम लोग कैंटीन में चाय पी रहे थे कि सरिता वहाँ आ गई और मुझे किताब देते हुए बोली, थैंक्स. मैंने स्माइल पास कि और चाय के लिए पूछा.

उसने हाँ में सिर हिला दिया. हम सब चाय पी रहे थे कि सरिता कि दोस्त शिखा आ गई और सबके साथ पटर पटर करने लगी. शिखा ने मेरे हाथ में किताब देखी और मांगने लगी. मैंने बोला, आराम से चाय पीलो, बाद में देख लेना. चाय पीने कि बाद हम चलने लगे तो शिखा ने फिर किताब मांगी तो में उसे किताब देने लगा तभी सरिता ने मेरे हाथ से किताब छीनतें हुए

बोली, मैंने अपना अधूरा काम छोड़कर तुम्हारे लिए किताब वापस कि और तुम शिखा क़ो दे रहे हो. अगर तुम्हे किताब नहीं चाहिए तो में इसे वापस ले जाती हूँ और कल तुन्हे दे दूंगी. फिर तुम जिसे मर्ज़ी दे देना. सरिता का ऐसा बर्ताव देख कर सब हैरान हो गए क्यूंकि इससे पहले किसी ने सरिता क़ो ऐसे बर्ताव करते हुए नहीं देखा था.

मैंने बात सम्भलते हुऐ बोला, ओके, मैं किसी क़ो किताब नहीं दूंगा. घर जाते हुऐ मैं यही सोचता रहा कि आखिर सरिता क़ो क्या हुआ जो ऐसा बिहेव कर रही थीं. रात क़ो जब पड़ने के लिए किताब खोली तो उसमे एक लेटर था. ज्यादा तो कुछ नहीं लिखा था, बस अपने प्यार का इजहार किया था. साथ मैं लिखा था कि अगर तुम्हे मेरा प्यार कबूल है तो कल कॉलेज मैं काली पैंट और पीली शर्ट पहन कर आ जाना और मुझे पता है कि तुम्हारे पास  ये दोनों कपड़े है. 

खत पढ़कर मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई. जो लड़की मेरा क्रश थीं, इतनी आसानी से मेरी जिंदगी में आ जाएगी, किसी सपने से कम नहीं लग रहा था. अगले दिन मैं कॉलेज मैं ब्लैक येल्लो कॉम्बिनेशन में गया तो सरिता भी उसी कलर कॉम्बिनेशन में थीं.

आज पिछले 35 साल से सरिता मेरे साथ है और ज़ब कभी भी मैं काली पैंट पहनता हूँ तो मुझे पुराने दिन याद आ जाते है.

धन्यवाद 

एम. पी. सिंह

(Mohindra Singh ) 

स्वरचित,

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