परिवार – खुशी

रामनाथ जी अपने परिवार से बहुत प्यार करते थे।उनके परिवार में तीन भाई 2 बहने  और उनकी पत्नियां बच्चे रहते।रामनाथ सबसे बड़े थे।उनकी पत्नी दमयंती 2 बच्चे वृंदा और कुशल उनसे छोटे ज्ञान उनकी पत्नी रागिनी और दो बच्चे अर्पिता और अर्पण और सबसे छोटा हेमंत जो इंजीनियरिंग के आखिरी वर्ष में था।

एक खुशहाल और आदर्श परिवार माता पिता का देहांत हो चुका था इसलिए रामनाथ ने हीं पिता बन छोटी बहन रमा की शादी की और हेमंत तब पांचवी में था तो दमयंती ने ही अपने बच्चों की तरह उनकी देखभाल की।इसलिए सारे भाई बहन रामनाथ का और दमयंती का सम्मान करते थे

दोनो बहने उमा और रमा कहती भैया भाभी से ही हमारा मायका है।इसलिए ज्ञान  और रागिनी भी भाई भाभी का बहुत सम्मान करते पूरे घर को उन्होंने जोड़ रखा था बच्चे बड़े सब की एक दूसरे में जान बसती थी।समय बीत रहा था।हेमंत की इंजीनियरिंग खत्म हो गई प्लेसमेंट बैंगलोर आई ।

बैंगलोर जैसे बड़े शहर में जिंदगी में पहली बार हेमंत को अकेले भेजना था।रागिनी और दमयंती ने कहा अकेले कैसे रहेगा।यही कही नौकरी देख लो इसके लिए पर रामनाथ बोले जब तक सीखेगा नहीं तब तक आगे बढ़ेगा कैसे वो खुद बैंगलोर गए हेमंत को एक फ्लैट किराए पर ले कर दिया।पैसे दिए उसका ऑफिस देख कर आए।रामनाथ वापस आ गए।

हेमंत का काम शुरू हो गया कुछ ही दिनों में वो बैंगलोर की फास्ट लाइफ में ढल गया।ऑफिस वीकेंड में पार्टी पैसा घर भेजना नहीं होता था जो कमाता वो उड़ाता । ऐसे ही 6 महीने बीत गए हेमंत वहां सेटल हो गया धीरे धीरे उसके फोन भी आने कम हो गए कभी बात होती तो कहता व्यस्त है बहुत इसरार पर वो दिवाली पर घर आया।

उसकी तबियत ठीक नहीं लग रही थी तब भी वो फोन पर ही होता।भाभियों ने पूछा बेटा तबीयत को क्या हुआ घर का खाना नहीं मिलता इसलिए देखो क्या हालत हो गई है ।रामनाथ और ज्ञान ने अपने अपने तरीके से भी पूछा पर वो यही बोला सब ठीक है।

रामनाथ को  उसकी बातों से इत्मीनान नहीं आया 10 दिन बात हेमंत चला गया।फिर फोन पर कम बात होती इधर रामनाथ ने अपने एक मित्र जो बैंगलोर में ही था उससे संपर्क किया और अपनी परेशानी बताई।वो बोला चिंता मत करो मेरा बेटा विशाल पुलिस में है वो सब पता कर लेगा।

विशाल ने अपने तरीके से तहकीकात की हेमंत की दोस्ती ऑफिस में काम करने वाली नताशा से हो गई थी जो अच्छी लड़की नहीं थी उसका काम ही भोले भाले लड़कों को फसाना था।हेमन्त नशे का आदि हो चुका था उस पर कर्जा भी बहुत हो गया था।

हेमंत का परफॉर्मेंस भी डाउन हो गया था ऑफिस से दो नोटिस मिल चुके थे।हेमंत सारा दिन नशे में रहता सारा हाल विशाल ने रामनाथ को सुनाया अगले दिन ज्ञान और रामनाथ फ्लाइट ले कर विशाल के पास पहुंचे फिर वो सब हेमंत के फ्लैट पहुंचे सबको देख नताशा चिल्लाने लगी कौन है ये सब यहां क्या कर रहे हैं भगाओ इन्हें विशाल बोला मैडम आप का खेल खत्म पुलिस हुं मै चलो विशाल की मदद से सब पकड़े गए।

हेमंत को ले कर रामनाथ वापस अपने शहर आ गए उसका इलाज हुआ बहुत दिन वो नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती रहा ठीक हो कर आया तो बहुत रोया भैया मुझे माफ करदो मैने आपका मान तोड़ा पैसा भी बर्बाद किया।रामनाथ बोले मेरा धन तो मेरा परिवार है

इससे ज्यादा जरूरी और कुछ नहीं है।तुम ठीक हो तुम्हे कुछ नहीं हुआ हमे और क्या चाहिए बेटा अपना ध्यान रखो और यही नौकरी ढूंढो।हेमन्त को कुछ महीनों बाद नौकरी मिल गई एक दिन उसके दोस्त अविनाश का फोन आया जो उसके साथ बैंगलोर ऑफ़िस में काम करता था

उसने बताया नताशा और उसके ग्रुप को पुलिस ने पकड़ लिया और तुम्हारा जितना कर्जा था तुम्हारे बड़े भैया ने सब चुका दिया उन्होंने आस पास वालों की कितनी बाते सुनी तुम्हारे लिए पर वो तुम्हे उस दलदल से निकाल लाए।

हेमंत बोला सच में मैं तो जीने और नशे के चंगुल से निकलने की उम्मीद छोड़ चुका था वो तो सिर्फ भैया का ही हौसला और हिम्मत थी भाई और भाभियों ने मुझे संभाला और नई जिंदगी दी आज मै एक अच्छी कंपनी में नौकरी कर रहा हूं मेरा परिवार मेरी दौलत है और अब मैं इनके पास ही रहूंगा।

दोस्तो अच्छा परिवार हमारा सहारा होता है यदि हेमन्त को परिवार का साथ ना होता तो शायद वो उसकी नरक में रहता और अपनी जान से भी हाथ धो बैठता।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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