किसकी बदौलत – अर्चना सिंह

मन से # असमर्थ तो थी दिशा लेकिन तन से नहीं । एक छोटी सी कम्पनी में रिसेप्शनिस्ट का जॉब करके अपना और अपनी तीन बहनों का गुजारा करती थी । माँ – बाप एक सड़क दुर्घटना में मारे गए । सारी जिम्मेदारी दिशा पर थी । परिवार के नाम पर बस एक बुजुर्ग मौसी … Read more

एक बार टूटा भरोसा फिर नहीं जुड़ता – विधि जैन

शांति  की शादी को लगभग 10 साल हो चुके थे और घर भी बहुत अच्छे संभाल रही थी वह इतनी शिद्दत से अपने घर को संभालती थी कि उसे भी कोई तोड़ नहीं सकता था कितनी भी मुश्किल आ जाती थी वह आसानी से उनका सॉल्यूशन निकाल लेती थी।  बच्चों की पढ़ाई चल रही थी … Read more

बँटवारा – बीना शर्मा 

कौशल्या देवी एक कोने में बैठी हुई यही सोच रही थी कि अभी 13 दिन ही तो हुए थे उसके पति रमेश को इस संसार से विदा हुए परंतु, उनके जाने के बाद इतनी जल्दी उनके बच्चों मैं कितना बदलाव आ गया था जो  भाई एक दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे आज वो एक … Read more

सामर्थ्य वान – शुभ्रा बैनर्जी

सुमित्रा जी की छोटी बेटी की बेटी का विवाह तय हो गया है।बेटी के मुंह से अपनी नवासी की शादी पक्की होने की खुशी उनके बूढ़े चेहरे पर साफ झलक रही थी। नीरा(इकलौती बहू)भी भांजी को बहुत प्यार करती थी।जब -जब आती ,एक ही बात कहती”मामी,मामा तो नहीं रहे।तुम्हें आना ही होगा मेरी शादी में।नहीं … Read more

अधिकार – लतिका पल्लवी

बहू यह क्या सुन रही हूँ ?चिंटू कह रहा है कि मेरी माँ मैडम बनेगी। मै समझी नहीं वह क्या कहना चाहता है। क्या तुम नौकरी करने की सोच रही हो? तुम्हे पता नहीं है कि हमारे घर की बहूऐं नौकरी नहीं करती है?तुम्हारे नौकरी करने से समाज मे हमारी कितनी बेइज्जती होंगी तुमने सोचा … Read more

“असमर्थ” – सरोजनी सक्सेना

मीता एक साधारण परिवार की बेटी है । उसकी रुचि पढ़ाई में अधिक है । वैसे तो वह प्रत्येक कार्य में पूर्ण रूप से निपुण है । घर के कार्यों में, संगीत कला के साथ पढ़ाई आदि में उसकी विशेष रूप से रुचि है । परिस्थितियों ने उसको मजबूर कर दिया । जिसके कारण पढ़ाई … Read more

एक नया सबक – डा० विजय लक्ष्मी

शर्मा परिवार की कोठी हर त्यौहार पर रौनक से भर जाती थी। इस बार सावन का महीना था, आँगन में झूले पड़े थे, घर में हरियाली तीज की तैयारियाँ चल रही थीं। जेठानी रीमा और देवरानी सुषमा, दोनों की उम्र में ज़्यादा फर्क नहीं था। रीमा के पति, राजेश जी, बैंक में अधिकारी थे, जबकि … Read more

भरोसा – खुशी

विश्वास और उन्नति दोनो एक ही कॉलेज में पढ़ते थे।दोनो का फाइनल ईयर था।लास्ट ईयर कॉलेज में कल्चर एक्टिविटीज में उनकी मुलाक़ात हुई और वो प्यार में बदल गई।उन्नति मल्टीमीडिया में जाना चाहती थी और विश्वास आर्किटेक्ट बनना चाहता था ।दोनो की अपने विषयों पर पकड़ अच्छी थी और जीवन को वो जीना भी चाहते … Read more

असमर्थ – मधु वशिष्ठ

बेटा शादी अगर दो आत्माओं का मिलन है, तो 2 परिवारों का भी मिलन है। तुम दोनों हमारे बच्चे हो, अगर हमारी जिम्मेदारी तुम्हारी है तो तुम्हारी जिम्मेदारियां हमारी क्यों ना हुई?” कहकर सासु मां ने मुस्कुराकर प्रिया को आशीर्वाद दिया। सासु मां के पैर छूते हुए प्रिया का रोम रोम उनको धन्यवाद कर रहा … Read more

असमर्थ – डोली पाठक

अपनी बनाई हुई पेंटिंग पर नजरें टिकाए हुए उमा जी शून्य में कहीं खोई हुई थीं। फिजियोथैरेपिस्ट उन्हें कह रहा था,मैम जरा अपने हाथों और पैरों को हरकत किया किजिए… मेरे चले जाने के बाद आप बिल्कुल भी हाथ पांव नहीं हिलाती हैं… ऐसे तो आपको सुधरने में बरसों लग जाएंगे.. उमा जी उसकी बातों … Read more

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