वह मकान बिकाऊ नहीं है – के कामेश्वरी
दीनानाथ जी ने अपने चश्मे को कुर्ते के कोने से साफ किया और फिर से नाक पर टिका लिया। सामने गेट पर पेंटर ‘शांति-कुंज’ लिख रहा था। नीले रंग के गेट पर सुनहरे अक्षरों में लिखा जा रहा वह नाम दीनानाथ जी के लिए सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि चालीस साल की तपस्या का फल … Read more