जब तुम मां बनोगी तब जानोगी – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

आज जैसे ही काव्या ने घर में कदम रखा करूणा जोर से चिल्ला पड़ी काव्या इतनी देर से कहां थी तुम, पता है ना देर से घर आने पर पापा गुस्सा होने लगते हैं। और मुझे भी चिंता होने लगती है तुम्हारे देर से घर आने पर। कबसे परेशान हूं मैं । जाने कैसे कैसे … Read more

ताजा खाना – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

मां आज लंच बहुत स्वादिष्ट बना था ।मेरे सहकर्मी पूरा खा गए मुझे थोड़ा सा चखने को ही मिल पाया बचा कर रखना मै शाम को खाऊंगी नीति ने ऑफिस से फोन कर मां को बताया। ये क्या मां ये तो तुमने अभी बनाया है।सुबह वाला कहां है नीति ने ऑफिस से आते ही मां … Read more

सेवा

“अब तो यही दिन देखना बाकी रह गया था!” — बड़ी बहू रागिनी घर में घुसते ही जोर से बोली। रविवार की शाम थी, सभी लोग घर पर ही थे। “अब क्या हो गया? क्यों सबकी शाम खराब कर रही हो?” — गुस्से से अंकित ने रागिनी से पूछा। “इतने दिन तक तो मैंने मुंह … Read more

आँखें नीची होना – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

वह एक संयुक्त परिवार है । जहाँ सास नीरजा , ससुर दशरथ जी दो देवर , एक छोटी ननंद थी । ऐसे घर में विशाल की पत्नी और घर की बड़ी बहू बनकर सुहानी ने कदम रखा था । वह धीरे-धीरे अपने आपको इस माहौल में ढालने की कोशिश कर रही थी । उस घर … Read more

झूठे दिखावे से जिंदगी नहीं चलती – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

संजना को बहुत सारी शापिंग करनी थी इसलिए वह बिना समय गँवाए फटाफट ख़रीददारी कर रही थी सोचती जा रही थी कि घर जाकर भी बहुत सारे काम करने हैं क्योंकि कल ननंद पुष्पा को देखने के लिए लड़के वाले आने वाले हैं । वह सब्ज़ियों की ख़रीददारी कर रही थी कि पीछे से उसे … Read more

साजिश – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

 निधि और पवन शादी के बाद मनाली घूमने चले गए थे और पिछली रात ही वापस घर लौटे थे। पवन की तीनों बहनें और उनके बच्चे अभी घर में ही थे। शायद शादी के बाद तीनों बहनें अभी विदा नहीं हुई थी। पवन परिवार में सबसे छोटा तीन विवाहित बहनों का लाडला भाई था और … Read more

सजना है मुझे सजना के लिए – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“यार, इस कोरोना ने तो त्योहारों का मजा ही किरकिरा कर दिया है।”निधि ने अपनी फ्रेंड नीतू से कहा। “सही कहा।हफ्ता भर बाद ही तो करवा चौथ है, लेकिन ना पार्लर ना शॉपिंग।हर बार तो कितनी धूमधाम होती थी। नीतू ने हाँ में हाँ मिलाई। “क्या बातें हो रही है?” तभी मीनल ने उनके पास … Read more

शशि बेडरूम में पहुँचते ही बड़बड़ाते हुए बोली – करुणा मालिक : Moral Stories in Hindi

शशि बेडरूम में पहुँचते ही बड़बड़ाते हुए बोली  घर में दो-दो बहुएँ है पर मजाल है कि कोई काम बिना कहे कर लें । अगर मैं ना हूँ तो इस घर में तीज- त्योहार भी मनने बंद हो जाएँगे । क्या अनाप-शनाप बोलती रहती हो तुम भी, त्योहार मनने बंद क्यों हो जाएँगे?  एक की … Read more

पता नहीं तुम लोगों को कैसे संस्कार मिले हैं – सिन्नी पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

वैसे तो मंजूजी अपने पोतों, पारस और मानस से बड़ा लगाव रखती थीं पर जब भी उनसे नाराज़ होतीं,तो अपनी बहू आभा को ज़रूर लपेट लेती थीं। आभा चाहे उस जगह पर मौजूद हो या न हो,अगर बच्चे कुछ भी शैतानी करते,तो बच्चों को डांटने के साथ साथ उनसे कहतीं,”पता नहीं तुम लोग कैसे हो,हमारे … Read more

आत्मनिर्भर – अंजना शर्मा : Moral Stories in Hindi

श्रीमती शुक्ला अभी कुछ माह पहले ही केन्द्रीय विद्यालय से सेवानिवृत्त हुई है। शुरू से ही क्योंकि मायके में भी पिताजी हेडमास्टर थे मिडिल स्कूल के तो घर का वातावरण बहुत अनुशासित था, तो सुनीता शुक्ला जी को भी आदत थी अपने सभी काम समय पर और ख़ुद से ही करने की । अब बेटा … Read more

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