रोशनी का कर्ज

“रिश्तेदारों ने ताना मारा कि ‘निकम्मा बेटा बुढ़ापे में क्या सहारा बनेगा, इसे तो खुद पालना पड़ रहा है’। लेकिन जब पिता की आँखों की रोशनी छिनने लगी और अपनों ने ही घर गिरवी रखने की शर्त रख दी, तब उस ‘निकम्मे’ बेटे ने जो किया, उसे देखकर पूरे खानदान की आँखें फटी रह गईं… … Read more

 वजूद की तलाश

“कहते हैं बुढ़ापे में इंसान को सिर्फ आराम चाहिए होता है, लेकिन जब आराम की कीमत आपका आत्मसम्मान हो, तो मखमल का बिस्तर भी कांटों जैसा चुभने लगता है। क्या एक माँ अपने ही बनाए घोंसले में सिर्फ एक ‘फालतू सामान’ बनकर रह सकती है, जिसे हर कोई अपनी सहूलियत के हिसाब से इस्तेमाल करे?” … Read more

दौलत की चाबी

“जिस इंसान ने अपनी पूरी ज़िंदगी एक-एक पैसा जोड़ने में लगा दी, उसने अपने बुढ़ापे का इकलौता सहारा अपनी बहू के नाम क्यों कर दिया? यह कहानी उस ‘खाली हाथ’ की है, जिसने पूरी दुनिया की खुशियां समेट लीं।” लेकिन जब वकील ने कागज़ात पढ़े, तो पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया। कैलाशनाथ जी ने … Read more

शक का कोहरा

 “एक छोटी सी गलतफहमी और पल भर का क्रोध कैसे सालों के विश्वास को राख कर देता है, और जब सच सामने आता है, तो इंसान अपनी ही नज़रों में कैसे गिर जाता है… यह कहानी उसी खौफनाक सच का आईना है।” “तुम मुझसे अब और झूठ मत बोलो समीर! मेरे पास सारे सबूत हैं। … Read more

ऐसी किस्मत कहॉ – संजय सिंह

राजीव घर पर अकेला था। रात के तकरीबन 10:00 बज रहे थे। नींद का नामों निशान नहीं था। चारों तरफ सन्नाटा था। कोई भी काम करने का राजीव का मन नहीं हो रहा था। आज वह बहुत ही परेशान था। राजीव का भला पूरा  परिवार था। जिसमें एक बेटा और एक बेटी थी। जिनका पालन … Read more

**मायके की वो “बेगानी” अलमारी और भाभी का प्रेम** – हर्षिता सिंह

*शादी के पांच साल बाद जब वह टूटे हुए स्वाभिमान के साथ भाई के चौखट पर लौटी, तो उसे लगा कि वह अब इस घर में सिर्फ एक ‘बोझ’ है। लेकिन एक दिन भाभी ने उसे घर की तिजोरी की चाबी थमाकर कुछ ऐसा कहा कि उसकी रूह तक कांप गई और आँखों से वर्षों … Read more

**वो दाग नहीं, ममता के हस्ताक्षर हैं** – मोहिनी मिश्रा

*किटी पार्टी की चकाचौंध में जब एक बुजुर्ग माँ से गलती हुई, तो मेहमानों ने नाक-भौं सिकोड़ ली। लेकिन 15 साल के पोते ने उस ‘गंदगी’ को जिस तरह अपनाया, उसने वहाँ मौजूद हर औरत के मेकअप के पीछे छिपे असली चेहरे को बेनकाब कर दिया।* आरव रुका नहीं। उसने अपनी दादी का गीला हाथ … Read more

कमरा नंबर 3 और पिता की वसीयत – शारदा सक्सेना

*बेटे ने “गाँव की धूल” कहकर पिता के बुलावे को ठुकरा दिया, लेकिन पिता की मौत के बाद जब उसने उस घर के बंद कमरे का दरवाज़ा खोला, तो वहां मिली एक ऐसी चीज़ जिसने उसके शहर के अहंकार को चकनाचूर कर दिया।* हरिशंकर जी का गला रुंध गया था। “बेटा, यह घर मैंने अपने … Read more

स्वाभिमान का मोल और खाकी की चमक – प्रियंका नाथ

*जिसने कभी दौलत के नशे में चूर होकर एक पिता की गरीबी का मजाक उड़ाया था, आज उसी पिता की बेटी ने अपनी कलम की ताकत से उस दौलत के साम्राज्य को हिला कर रख दिया। पढ़िए एक ऐसी बेटी की कहानी जिसने सोने के पिंजरे को ठुकरा कर आसमान चुना।* विक्रांत हंसा। “अरे, बुरा … Read more

**घरेलू औरत की अदृश्य कमाई** – विनीता सिंह

*”जिस पत्नी को वो ‘अनपढ़’ और ‘बोझ’ समझकर घर से निकालना चाहता था, जब माँ ने उसके त्याग और समर्पण का ‘हिसाब’ डायरी खोलकर दिखाया, तो लाखों कमाने वाले बेटे को अपनी ही दौलत कौड़ियों के भाव लगने लगी।”* “बस बहुत हो गया मां! मैं अब इस अनपढ़ औरत के साथ एक छत के नीचे … Read more

error: Content is protected !!