नई राह – प्रियंका सक्सेना : Moral Stories in Hindi
रामनगर शहर की भीड़भाड़ वाली गलियों में नलिनी जब भी किताबें दबाए निकलती, मोहल्ले में कानाफूसी शुरु हो जाती — “यही है विमल की विधवा!” “विधवा होकर पढ़ाई करने जाएगी ? शर्म नहीं आती इसे ?” “एक महीना नहीं हुआ पति को गुजरे और चल दी मैडम बन-ठन कर। “ लेकिन नलिनी हर आवाज़ को … Read more