नींव का पत्थर – मीनू त्रिपाठी
*”दिखावे की रोशनी में हम अक्सर उस दीये को बुझा देते हैं जो अंधेरे में चुपचाप जलकर हमारे घर की आबरू बचाता है। जानिए क्यों एक ‘एमबीए’ बहू झुक गई एक ‘घरेलू’ जिठानी के सामने।”* रसोई में बर्तनों की खनखनाहट के बीच सुमेधा के मन में चल रही उथल-पुथल का शोर कहीं ज्यादा तेज था। … Read more